
अंटार्कटिका में चार दशक बाद पहचाना गया पहला डायनासोर जीवाश्म, समुद्री संरक्षण के नए आयाम
1985 में मिली एक हड्डी के टाइटनोसोर होने की पुष्टि ने दक्षिणी महाद्वीपों के बीच डायनासोरों के प्रवास मार्ग की परिकल्पना को बल दिया है, जबकि हंपबैक व्हेल की आबादी में ऐतिहासिक सुधार और संग्रहालयों में संरक्षित प्राचीन अवशेष जैव विविधता के प्रति बदलते नजरिए को रेखांकित करते हैं।
ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वेक्षण के संग्रह में चार दशक से रखी एक हड्डी को अब महाद्वीप का पहला डायनासोर जीवाश्म घोषित किया गया है। 1985 में जेम्स रॉस द्वीप से प्राप्त इस नमूने को तब ‘विशाल सरीसृप की कशेरुका’ मानकर दराज में रख दिया गया था। लंदन के प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय के विशेषज्ञों ने ‘एक्टा पैलियन्टोलॉजिका पोलोनिका’ में पुष्टि की है कि यह टाइटनोसोर समूह के एक लंबी गर्दन वाले शाकाहारी डायनासोर की पूंछ की कशेरुका है। यह पूरे अंटार्कटिका से मिला ऐसा मात्र दूसरा सॉरोपोड अवशेष है, किंतु खोज की तिथि के आधार पर यह पहला जीवाश्म बन गया है।
यह पहचान जीवाश्म विज्ञान के एक भौगोलिक रहस्य को सुलझाने में सहायक है। क्रिटेशियस काल में दक्षिण अमेरिका, अंटार्कटिका और न्यूजीलैंड आपस में जुड़े थे। न्यूजीलैंड में टाइटनोसोर के जीवाश्म मिले हैं, परंतु ऑस्ट्रेलिया में नहीं। शोधकर्ताओं का मानना है कि अंटार्कटिक प्रायद्वीप ने एक गलियारे का काम किया, जिससे ये विशालकाय जीव ऑस्ट्रेलिया को दरकिनार कर सीधे न्यूजीलैंड तक पहुंचे। जीवाश्म के साथ मिले अमोनाइट अंशों से संकेत मिलता है कि मृत डायनासोर किसी नदी के जरिए समुद्र में बह गया था।
समुद्री जीवन के एक अन्य मोर्चे पर, ब्राजील के रियो डि जेनेरियो तट पर हंपबैक व्हेल की मौजूदगी में जोरदार वृद्धि दर्ज की गई है। हंपबैक व्हेल परियोजना के अनुसार, पिछले चार दशकों में इनकी वैश्विक आबादी लगभग 2,000 से बढ़कर 35,000 तक पहुंच गई है, जो वाणिज्यिक शिकार से पहले के स्तर के करीब है। यह सुधार 1982 में अंतरराष्ट्रीय व्हेलिंग आयोग द्वारा 1985-86 सत्र से सभी प्रजातियों के व्यावसायिक शिकार पर रोक लगाने के निर्णय के बाद संभव हुआ। अब गुआनाबारा खाड़ी में भी ये व्हेल दिखने लगी हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर जीवविज्ञानियों के साथ नौकायन भ्रमण की मांग बढ़ी है।
संरक्षण का एक अलग आयाम ब्रिटेन के हल समुद्री संग्रहालय में दिखता है, जहां 119 वर्ष पुराना 40 फुट का नॉर्थ अटलांटिक राइट व्हेल का कंकाल पांच दिन की मेहनत के बाद पुनर्स्थापित किया गया। 1907 में न्यूयॉर्क तट पर पकड़ी गई इस प्रजाति के अब 400 से भी कम सदस्य बचे हैं। संग्रहालय के £20 मिलियन के नवीनीकरण के बाद अगस्त में खुलने पर दर्शक एक सुरंग के जरिए इसकी पसलियों के भीतर प्रवेश कर सकेंगे। इसी बीच, न्यूयॉर्क में सोथबीज 14 जुलाई को ‘गस’ नामक एक 63 प्रतिशत पूर्ण टी-रेक्स कंकाल की नीलामी करेगा, जिसका अनुमानित मूल्य 20-30 मिलियन डॉलर है। चिली के सांतो दोमिंगो में पार्क त्रिकाओ ने 100 हेक्टेयर आर्द्रभूमि को पुनर्जीवित कर दक्षिण अमेरिका का सबसे बड़ा मुक्त-उड़ान पक्षीशाला स्थापित किया है, जो 50 से अधिक विदेशी पक्षी प्रजातियों का आवास है।
अगला ठोस पड़ाव हल संग्रहालय का अगस्त में पुनर्प्रारंभ है, जहां संरक्षित कंकाल के साथ-साथ प्रजातियों के संकट की कहानी नए ढंग से प्रस्तुत की जाएगी। अंटार्कटिक जीवाश्म पर आगे का शोध यह स्पष्ट कर सकता है कि क्या यह टाइटनोसोर एक अपरिपक्व व्यष्टि था या कोई छोटी प्रजाति।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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The return of the giants is framed as a local issue of environmental management and economic opportunity. Emphasis is on concessions and practical impacts for the community, with a descriptive and unemotional tone.
The return of the giants is treated with skepticism, highlighting commercial and media aspects. The contrast between the spectacular event and economic motives is emphasized, with an ironic tone toward nature marketing.
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