
जर्मनी का विश्व कप अभियान फिर नाकाम, पैराग्वे ने पेनल्टी पर हराया; नागल्समैन ने छोड़ने से इनकार किया
पैराग्वे ने पेनल्टी शूटआउट में जर्मनी को 4-3 से हराकर विश्व कप से बाहर कर दिया, जिसके बाद कोच नागल्समैन ने इस्तीफे से इनकार किया लेकिन जर्मन मीडिया में उनके भविष्य पर सवाल उठे।
फॉक्सबरो, मैसाचुसेट्स के जिलेट स्टेडियम में सोमवार रात जोसे कनाले की निर्णायक पेनल्टी ने जर्मनी के विश्व कप सफर का अंत कर दिया। पैराग्वे ने राउंड ऑफ 32 के इस मुकाबले में 1-1 की बराबरी के बाद पेनल्टी शूटआउट 4-3 से जीत लिया। जर्मनी के लिए यह पहला मौका था जब वह विश्व कप में पेनल्टी शूटआउट हारा। इससे पहले, पैराग्वे ने 42वें मिनट में जूलियो एनसिसो के हेडर से बढ़त बनाई थी, जिसे काई हैवर्ट्ज ने 54वें मिनट में फ्लोरियन विर्ट्ज के क्रॉस पर हेडर से बराबर कर दिया। अतिरिक्त समय में जोनाथन ताह के हेडर को वीएआर समीक्षा के बाद गोलकीपर पर फाउल के कारण अमान्य करार दिया गया, जिससे जर्मनी की जीत की उम्मीदें धूमिल हो गईं। शूटआउट में हैवर्ट्ज, निक वोल्टेमेड और ताह चूक गए, जबकि पैराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल ने दो पेनल्टी बचाकर टीम को अंतिम-16 में पहुंचा दिया।
यह हार जर्मनी के लिए लगातार तीसरे विश्व कप में जल्दी बाहर होने का सिलसिला बन गई—2018 और 2022 में ग्रुप चरण से बाहर होने के बाद अब पहले नॉकआउट दौर में ही सफर खत्म हुआ। कप्तान जोशुआ किमिच ने हार की जिम्मेदारी पूरी तरह खिलाड़ियों पर ली और कहा कि यह कोच या मीडिया की गलती नहीं है। कोच जूलियन नागल्समैन ने स्पष्ट किया कि वह भागने वालों में से नहीं हैं और यदि जर्मन फुटबॉल संघ (डीएफबी) चाहेगा तो वह यूरो 2028 और नेशंस लीग की तैयारी करेंगे। डीएफबी के खेल निदेशक रूडी फोलर ने भी नागल्समैन को सही व्यक्ति बताते हुए समर्थन दिया। हालांकि, जर्मन मीडिया के एक बड़े हिस्से ने इस प्रदर्शन की कड़ी आलोचना की—कुछ ने इसे शर्मनाक करार दिया तो कुछ ने कोच और टीम के बीच रिश्ते को अब न बचाए जा सकने वाला बताया। पूर्व कप्तान लोथर मैथियस ने कहा कि अब नए कोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
दक्षिण अमेरिकी मीडिया ने इस जीत को पैराग्वे के लिए ऐतिहासिक बताया। टीम 2010 के बाद पहली बार विश्व कप के नॉकआउट चरण में पहुंची थी और यह उसका अब तक का सबसे बड़ा विश्व कप मुकाबला जीत थी। गोलकीपर गिल, जो मैन ऑफ द मैच चुने गए, ने अपना पुरस्कार अस्पताल में भर्ती गंभीर रूप से बीमार भतीजे को समर्पित किया। एशियाई मीडिया में नागल्समैन के इस्तीफे से इनकार और जर्मन खिलाड़ियों की माफी को प्रमुखता से दिखाया गया, जबकि अंग्रेजी भाषा के अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने जर्मनी के संकट और पैराग्वे की अप्रत्याशित जीत पर ध्यान केंद्रित किया।
अब पैराग्वे का सामना 4 जुलाई को फिलाडेल्फिया में अंतिम-16 मुकाबले में फ्रांस या स्वीडन से होगा। जर्मनी को अगले कुछ दिनों में नागल्समैन के भविष्य पर फैसला करना होगा, जबकि टीम को नेशंस लीग और यूरो 2028 की तैयारियों से पहले आत्ममंथन के दौर से गुजरना पड़ेगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
2 संपादकीय समूह · 4 भाषाएँ
जर्मनी का बाहर होना एक शर्मनाक विफलता है। नागेल्समैन और महासंघ के बीच संबंध अब टूट चुके हैं और केवल उनका इस्तीफा ही विश्वसनीयता बहाल कर सकता है। जर्मन प्रेस तकनीकी नेतृत्व में तत्काल बदलाव की मांग कर रही है।
पराग्वे के खिलाफ पेनल्टी शूटआउट में चौंकाने वाली हार के बाद जर्मनी संकट में है। नागेल्समैन का भविष्य अधर में है, लेकिन उन्होंने इस्तीफा देने से इनकार किया। ध्यान महासंघ की प्रतिक्रिया और यूरोपीय चैंपियनशिप की राह पर है।
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
पेरू में केइको फुजीमोरी की जीत: 50,000 से कम वोटों के अंतर से राष्ट्रपति चुनाव का नतीजा तय
9 भाषाएँ · 29 स्रोत
Economy & Markets सेरूस में ईंधन संकट: पुतिन ने स्वीकारी कमी, आयात और घटिया मानकों पर विचार
7 भाषाएँ · 18 स्रोत
Technology सेWhatsApp में अब बिना नंबर चैट: यूज़रनेम रिज़र्वेशन शुरू, भारतीय सीईओ ने दी जानकारी
8 भाषाएँ · 29 स्रोत