
बर्फ पर वापसी: रूसी स्केटर्स को तटस्थ दर्जे के साथ अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में मिली एंट्री
ISU ने 2026-27 सीज़न से रूसी और बेलारूसी फिगर स्केटर्स, स्पीड स्केटर्स और शॉर्ट ट्रैक एथलीटों को बिना राष्ट्रीय प्रतीकों के तटस्थ खिलाड़ियों के रूप में वापसी की अनुमति दी।
तीन साल से अधिक के वनवास के बाद, रूसी और बेलारूसी स्केटर्स ने अंतरराष्ट्रीय बर्फ पर वापसी का टिकट हासिल कर लिया। अंतरराष्ट्रीय स्केटिंग संघ (ISU) ने 30 जून को घोषणा की कि 2026-27 सत्र से ये एथलीट सभी विश्व चैंपियनशिप, ग्रां प्री और चैलेंजर सीरीज़ में तटस्थ खिलाड़ियों के रूप में उतर सकेंगे। यह फैसला मार्च 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने के आक्रमण के बाद लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध को आंशिक रूप से हटाता है। हालांकि, वापसी सख्त शर्तों के साथ जुड़ी है—कोई राष्ट्रीय ध्वज, गान या वर्दी नहीं, और हर खिलाड़ी की पात्रता की व्यक्तिगत जांच होगी।
यह निर्णय उस सावधानी भरे रास्ते को दर्शाता है जो ISU ने अन्य खेल महासंघों से अलग चुना। जहां जिम्नास्टिक्स और फेंसिंग जैसे खेलों ने रूसियों को राष्ट्रीय प्रतीकों के साथ वापस बुला लिया, वहीं ISU ने ‘सुरक्षा और प्रतियोगिता की अखंडता’ को प्राथमिकता दी। तटस्थता के मानदंड स्पष्ट हैं: सक्रिय सैन्य सेवा, यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में भागीदारी, या फरवरी 2022 के बाद सार्वजनिक समर्थन करने वाले किसी भी एथलीट या सहयोगी स्टाफ को प्रवेश नहीं मिलेगा। ISU परिषद स्वयं या एक स्वतंत्र आयोग के माध्यम से हर मामले की समीक्षा करेगी, और खिलाड़ी को अपील का अधिकार होगा। यह कदम मिलान-कोर्टिना 2026 शीतकालीन ओलंपिक के अनुभव से प्रेरित है, जहां छह रूसी स्केटर्स ने बिना किसी विवाद के तटस्थ दर्जे में भाग लिया था।
खेल के नजरिए से देखें तो रूसी स्केटिंग की यह वापसी एक नए सिरे से शुरुआत है। प्रतिबंध से पहले रूस के पास विश्व चैंपियनशिप में हर स्पर्धा में अधिकतम तीन कोटा स्थान थे, लेकिन अब हर स्पर्धा में सिर्फ एक प्रतिनिधि उतारने की अनुमति होगी। केवल ओलंपिक में भाग ले चुके एडेलिया पेत्रोसियान और पेत्र गुमेनिक के पास ही विश्व रैंकिंग है। बाकी स्केटर्स को चैलेंजर सीरीज़ के जरिए अंक जुटाने होंगे और ग्रां प्री में प्रवेश के लिए किसी के हटने का इंतजार करना होगा। यह एक लंबी और कठिन चढ़ाई है, लेकिन रूसी फिगर स्केटिंग की गहरी प्रतिभा को देखते हुए प्रतिस्पर्धी वापसी की उम्मीद जगी है।
रूसी खेमे से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आईं। तीन बार की ओलंपिक चैंपियन इरिना रोदनीना ने कहा कि बिना झंडे के भी ‘सब जानते हैं कि यह रूसी टीम है’, जबकि कोच तातियाना तरासोवा ने इसे घरेलू खेल के लिए अहम पल बताया। वहीं, यूक्रेन और कई यूरोपीय देशों ने पहले ही ऐसे फैसलों की आलोचना की है, लेकिन ISU ने जोर देकर कहा कि यह प्रतिबंध ‘सुरक्षात्मक उपाय’ था, न कि दंड। भारतीय उपमहाद्वीप में फिगर स्केटिंग के बढ़ते दर्शकों के लिए यह फैसला उच्च-स्तरीय प्रतिस्पर्धा की वापसी का संकेत है, जो खेल के वैश्विक विस्तार को गति दे सकता है।
अब सारी निगाहें 1 जुलाई से शुरू हो रहे नए सत्र पर टिकी हैं। चैलेंजर सीरीज़ के शुरुआती आयोजनों में रूसी स्केटर्स को अपनी रैंकिंग सुधारने का पहला मौका मिलेगा। इसके बाद ग्रां प्री सर्किट और 2027 विश्व चैंपियनशिप की राह खुलेगी। ISU ने संकेत दिया है कि यदि सुरक्षा और अखंडता से जुड़ी कोई समस्या नहीं उठती, तो भविष्य में प्रतिबंधों में और ढील दी जा सकती है। फिलहाल, बर्फ पर वापसी की यह कहानी सख्त नियमों के दायरे में ही लिखी जाएगी।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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आईएसयू का निर्णय रूसी स्केटर्स की अंतरराष्ट्रीय मंच पर विजयी वापसी का प्रतीक है। ध्वज और राष्ट्रगान पर प्रतिबंध को एक साधारण तकनीकी बाधा के रूप में देखा जा रहा है, जबकि रूसी महासंघ को दुनिया की सबसे प्रभावशाली संस्थाओं में से एक बताया गया है। पूरा ध्यान आगामी प्रतिस्पर्धी सत्र और फिर से जीतने की संभावना पर केंद्रित है।
आईएसयू ने सख्त शर्तों के तहत रूसी और बेलारूसी स्केटर्स को तटस्थ एथलीटों के रूप में सावधानीपूर्वक बहाल किया है। यूक्रेन के खिलाफ युद्ध का समर्थन करने वाले या सशस्त्र बलों में सेवा देने वाले खिलाड़ी प्रतिबंधित रहेंगे, और जजों व अधिकारियों की वापसी स्थगित कर दी गई है। इस कदम को एक सशर्त निर्णय के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो निरंतर सुरक्षा और अखंडता समीक्षाओं के अधीन है।
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