
सेहत विज्ञान में बड़ा बदलाव: कम खाने से बढ़ सकता है वजन, नींद और व्यायाम के नए मापदंड
नए अध्ययन बता रहे हैं कि अत्यधिक कैलोरी कटौती शरीर की चयापचय दर को गिराकर वजन घटाने में बाधक बन सकती है, जबकि भोजन की गुणवत्ता और प्राकृतिक नींद अधिक प्रभावी हैं।
पिछले कुछ महीनों में पोषण और नींद विज्ञान से जुड़े कई अध्ययनों ने सेहत को लेकर प्रचलित कई धारणाओं को उलट दिया है। सबसे चौंकाने वाला निष्कर्ष यह है कि लंबे समय तक बहुत कम खाना वजन घटाने की रफ्तार को धीमा कर सकता है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल और पेन स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार, जब शरीर को लगातार बहुत कम कैलोरी मिलती है, तो वह अपनी बुनियादी चयापचय दर को कम कर देता है और मांसपेशियों को तोड़ने लगता है, जिससे ऊर्जा खर्च और घट जाता है। साथ ही, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की मौजूदगी में लोग अनजाने में अधिक कैलोरी खा लेते हैं, भले ही भोजन की मात्रा छोटी हो। यह बदलाव इस पुरानी सोच को चुनौती देता है कि वजन घटाने के लिए सिर्फ कैलोरी गिनना काफी है।
इसी कड़ी में भोजन की आवृत्ति को लेकर भी नई समझ सामने आई है। अमेरिकी और यूरोपीय पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि दिन में तीन बार या पांच-छह बार खाने से चयापचय दर पर कोई खास फर्क नहीं पड़ता, बशर्ते कुल कैलोरी समान रहे। वजन घटाने की सफलता कैलोरी की कमी पर निर्भर करती है, न कि भोजन की संख्या पर। हालांकि, मधुमेह या इंसुलिन प्रतिरोध वाले लोगों के लिए छोटे-छोटे अंतराल पर भोजन करना रक्त शर्करा को स्थिर रखने में मददगार हो सकता है। दूसरी ओर, भोजन के बाद जल्दी भूख लगने की समस्या अक्सर तेजी से खाने, पानी की कमी या प्रोटीन-फाइबर की कमी वाले असंतुलित आहार से जुड़ी होती है, जिसे सुधारकर काबू पाया जा सकता है।
नींद के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। विश्व स्वास्थ्य संगठन, अमेरिकी सीडीसी और स्पेनिश स्लीप सोसाइटी जैसी संस्थाएं अब इस बात पर जोर दे रही हैं कि बिना अलार्म के प्राकृतिक रूप से जागना, किसी भी नींद सप्लीमेंट से बेहतर है। यह शरीर की जैविक घड़ी को पूरा चक्र पूरा करने देता है, जिससे मेटाबॉलिज्म, हृदय स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति बेहतर रहती है। वहीं, व्यायाम के मोर्चे पर तैराकी एक प्रभावी विकल्प के रूप में उभरी है, खासकर महिलाओं के लिए, क्योंकि यह जोड़ों पर दबाव डाले बिना चलने या जॉगिंग से अधिक कैलोरी जलाती है। विशेषज्ञ सप्ताह में 2-3 बार 45-60 मिनट के सत्र की सलाह देते हैं, जिसमें अंतराल प्रशिक्षण और विभिन्न तैराकी शैलियों का मिश्रण हो।
इन सबका व्यावहारिक निष्कर्ष यह है कि सेहतमंद रहने के लिए अति-प्रतिबंधात्मक आहार या जादुई सप्लीमेंट की बजाय संतुलित, प्रोटीन और फाइबर युक्त भोजन, नियमित नींद-जागने का चक्र और आनंददायक शारीरिक गतिविधि को अपनाना चाहिए। भारतीय संदर्भ में, जहां मधुमेह और मोटापा तेजी से बढ़ रहे हैं, यह नई समझ सार्वजनिक स्वास्थ्य संदेशों को फिर से परिभाषित कर सकती है। अगला कदम इन निष्कर्षों को बड़े पैमाने पर क्लिनिकल परीक्षणों में प्रमाणित करना और राष्ट्रीय आहार एवं नींद दिशानिर्देशों में शामिल करना होगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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रूसी मीडिया रिपोर्ट करता है कि तैराकी वजन घटाने का एक प्रभावी तरीका है, जो चलने या जॉगिंग से अधिक कैलोरी जलाता है और जोड़ों पर तनाव कम करता है। वे विशेष रूप से महिलाओं के लिए, सामान्य तैराकी के बजाय सप्ताह में दो से तीन बार 45-60 मिनट के संरचित सत्रों की सलाह देते हैं।
लैटिन अमेरिकी आउटलेट प्राकृतिक, अलार्म-मुक्त जागरण को चयापचय और हृदय स्वास्थ्य का एक स्तंभ बताते हैं, WHO और CDC का हवाला देते हुए। वे चेतावनी देते हैं कि गंभीर कैलोरी प्रतिबंध चयापचय अनुकूलन को ट्रिगर करके उल्टा असर करता है, और इस बात पर जोर देते हैं कि पोषक तत्वों का समय और नींद की गुणवत्ता स्थायी वजन प्रबंधन के लिए प्रमुख सहयोगी हैं।
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