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न्याय और कानूनसोमवार, 29 जून 2026

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: चुनाव बाद आने वाले डाक मतपत्रों की गिनती को मंजूरी, ट्रंप को झटका

न्यायालय के 5-4 के फैसले ने मिसिसिपी के कानून को बरकरार रखा, जिससे लगभग 30 राज्यों में चुनाव बाद प्राप्त डाक मतपत्रों की गिनती जारी रहेगी; रिपब्लिकन नेताओं ने इसे चुनावी अखंडता के लिए खतरा बताया।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में मिसिसिपी राज्य के उस कानून को वैध ठहराया जो चुनाव दिवस तक डाक से भेजे गए लेकिन पांच कार्यदिवस बाद तक प्राप्त होने वाले मतपत्रों की गिनती की अनुमति देता है। 5-4 के बहुमत से आए इस निर्णय का व्यावहारिक प्रभाव यह है कि कैलिफोर्निया सहित लगभग 30 राज्यों में ऐसे ही प्रावधान बने रहेंगे, जहां चुनाव बाद प्राप्त डाक मतपत्रों को वैध माना जाता है। न्यायालय के अनुसार, संघीय चुनाव कानून केवल मतदाता द्वारा निर्णय लेने की अंतिम तिथि तय करता है, न कि मतपत्र प्राप्ति की कोई समय-सीमा।

इस फैसले पर अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया देखी गई। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन नेताओं ने इसे 'बहुत बड़ी हार' और चुनावी अखंडता के लिए खतरा करार दिया। ट्रंप प्रशासन और रिपब्लिकन नेशनल कमेटी का तर्क था कि संघीय कानून के तहत सभी मतपत्र चुनाव दिवस तक प्राप्त हो जाने चाहिए। वहीं, कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूसम और अन्य डेमोक्रेटिक नेताओं ने इस निर्णय को मतदाता पहुंच और लोकतंत्र की जीत बताया। न्यायमूर्ति एमी कोनी बैरेट, जिन्हें ट्रंप ने नियुक्त किया था, ने बहुमत की राय लिखी, जिससे परंपरावादी खेमे में उनकी कड़ी आलोचना हुई। ईरानी मीडिया के विश्लेषण में इस फैसले को ट्रंप की चुनावी रणनीति के लिए एक गंभीर झटका बताया गया, क्योंकि डाक मतपत्रों के अधिक उपयोग से मतदान प्रतिशत बढ़ता है, जो परंपरागत रूप से डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के पक्ष में जाता है।

चुनाव कानून विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय मतगणना की गति को बहुत अधिक प्रभावित नहीं करेगा, क्योंकि देर से आने वाले मतपत्र कुल मतों का बहुत छोटा हिस्सा होते हैं—कैलिफोर्निया में 2024 में यह केवल 2.5% थे। विलंब का मुख्य कारण चुनाव दिवस पर या उसके आसपास भारी संख्या में डाक मतपत्रों का आना है, जिनके हस्ताक्षरों का मिलान सावधानीपूर्वक करना पड़ता है। इस बीच, ट्रंप ने कांग्रेस से सेव अमेरिका एक्ट (SAVE Act) पारित करने की अपील तेज कर दी है, जो मतदान के लिए नागरिकता प्रमाण और सख्त पहचान नियम लागू करेगा। हालांकि, सीनेट में यह विधेयक अटका हुआ है, क्योंकि सभी डेमोक्रेटिक सीनेटरों और कुछ रिपब्लिकन सदस्यों ने इसके प्रावधानों पर आपत्ति जताई है।

वैश्विक स्तर पर, यह मामला चुनावी प्रक्रियाओं में राज्य बनाम संघीय अधिकार क्षेत्र के संतुलन को रेखांकित करता है। भारत जैसे लोकतंत्रों में, जहां डाक मतपत्र मुख्यतः सेवा मतदाताओं और कुछ विशेष श्रेणियों के लिए सीमित हैं, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला चुनावी कानूनों की स्पष्टता और समावेशिता पर बहस को नया आयाम देता है। भारतीय चुनाव आयोग भी डाक मतपत्रों की समय-सीमा और सुरक्षा को लेकर समय-समय पर सुधार करता रहा है। अमेरिका में, इस फैसले के बाद अब ध्यान सेव अमेरिका एक्ट के भविष्य पर केंद्रित है, जिस पर सीनेट में मतदान की कोई निश्चित तिथि तय नहीं है, लेकिन रिपब्लिकन नेतृत्व इसे आगामी मध्यावधि चुनावों से पहले पारित करने का दबाव बना रहा है।

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अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस
व्यावहारिकताउदासीनता

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि चुनाव दिवस तक डाक से भेजे गए मतपत्र पाँच दिन बाद पहुँचने पर भी गिने जा सकते हैं। 5-4 के बहुमत से, जस्टिस बैरेट की राय ने रिपब्लिकन चुनौती को खारिज कर दिया और कहा कि संघीय कानून राज्य की छूट अवधि को रद्द नहीं करता। यह फैसला ट्रंप के लिए झटका है, जिन्होंने इसे धोखाधड़ी बताया।

महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस
व्यावहारिकताउदासीनता

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव दिवस के बाद पहुँचने वाले डाक मतपत्रों की गिनती की अनुमति दी, मिसिसिपी के एक कानून को बरकरार रखा। इस फैसले को ट्रंप की चुनाव नियम बदलने की कोशिशों पर रोक के रूप में देखा जा रहा है और मध्यावधि चुनावों से पहले इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। न्यायाधीशों ने कहा कि संघीय कानून राज्यों को बाद की प्राप्ति समय-सीमा तय करने से नहीं रोकता।

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सोमवार, 29 जून 2026

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: चुनाव बाद आने वाले डाक मतपत्रों की गिनती को मंजूरी, ट्रंप को झटका

न्यायालय के 5-4 के फैसले ने मिसिसिपी के कानून को बरकरार रखा, जिससे लगभग 30 राज्यों में चुनाव बाद प्राप्त डाक मतपत्रों की गिनती जारी रहेगी; रिपब्लिकन नेताओं ने इसे चुनावी अखंडता के लिए खतरा बताया।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में मिसिसिपी राज्य के उस कानून को वैध ठहराया जो चुनाव दिवस तक डाक से भेजे गए लेकिन पांच कार्यदिवस बाद तक प्राप्त होने वाले मतपत्रों की गिनती की अनुमति देता है। 5-4 के बहुमत से आए इस निर्णय का व्यावहारिक प्रभाव यह है कि कैलिफोर्निया सहित लगभग 30 राज्यों में ऐसे ही प्रावधान बने रहेंगे, जहां चुनाव बाद प्राप्त डाक मतपत्रों को वैध माना जाता है। न्यायालय के अनुसार, संघीय चुनाव कानून केवल मतदाता द्वारा निर्णय लेने की अंतिम तिथि तय करता है, न कि मतपत्र प्राप्ति की कोई समय-सीमा।

इस फैसले पर अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया देखी गई। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन नेताओं ने इसे 'बहुत बड़ी हार' और चुनावी अखंडता के लिए खतरा करार दिया। ट्रंप प्रशासन और रिपब्लिकन नेशनल कमेटी का तर्क था कि संघीय कानून के तहत सभी मतपत्र चुनाव दिवस तक प्राप्त हो जाने चाहिए। वहीं, कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूसम और अन्य डेमोक्रेटिक नेताओं ने इस निर्णय को मतदाता पहुंच और लोकतंत्र की जीत बताया। न्यायमूर्ति एमी कोनी बैरेट, जिन्हें ट्रंप ने नियुक्त किया था, ने बहुमत की राय लिखी, जिससे परंपरावादी खेमे में उनकी कड़ी आलोचना हुई। ईरानी मीडिया के विश्लेषण में इस फैसले को ट्रंप की चुनावी रणनीति के लिए एक गंभीर झटका बताया गया, क्योंकि डाक मतपत्रों के अधिक उपयोग से मतदान प्रतिशत बढ़ता है, जो परंपरागत रूप से डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के पक्ष में जाता है।

चुनाव कानून विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय मतगणना की गति को बहुत अधिक प्रभावित नहीं करेगा, क्योंकि देर से आने वाले मतपत्र कुल मतों का बहुत छोटा हिस्सा होते हैं—कैलिफोर्निया में 2024 में यह केवल 2.5% थे। विलंब का मुख्य कारण चुनाव दिवस पर या उसके आसपास भारी संख्या में डाक मतपत्रों का आना है, जिनके हस्ताक्षरों का मिलान सावधानीपूर्वक करना पड़ता है। इस बीच, ट्रंप ने कांग्रेस से सेव अमेरिका एक्ट (SAVE Act) पारित करने की अपील तेज कर दी है, जो मतदान के लिए नागरिकता प्रमाण और सख्त पहचान नियम लागू करेगा। हालांकि, सीनेट में यह विधेयक अटका हुआ है, क्योंकि सभी डेमोक्रेटिक सीनेटरों और कुछ रिपब्लिकन सदस्यों ने इसके प्रावधानों पर आपत्ति जताई है।

वैश्विक स्तर पर, यह मामला चुनावी प्रक्रियाओं में राज्य बनाम संघीय अधिकार क्षेत्र के संतुलन को रेखांकित करता है। भारत जैसे लोकतंत्रों में, जहां डाक मतपत्र मुख्यतः सेवा मतदाताओं और कुछ विशेष श्रेणियों के लिए सीमित हैं, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला चुनावी कानूनों की स्पष्टता और समावेशिता पर बहस को नया आयाम देता है। भारतीय चुनाव आयोग भी डाक मतपत्रों की समय-सीमा और सुरक्षा को लेकर समय-समय पर सुधार करता रहा है। अमेरिका में, इस फैसले के बाद अब ध्यान सेव अमेरिका एक्ट के भविष्य पर केंद्रित है, जिस पर सीनेट में मतदान की कोई निश्चित तिथि तय नहीं है, लेकिन रिपब्लिकन नेतृत्व इसे आगामी मध्यावधि चुनावों से पहले पारित करने का दबाव बना रहा है।

स्रोतों में मतभेद

न्याय और कानून · 7 स्रोत · 1 भाषा

16%कम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

समर्थक9%
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अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेसमहाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस
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व्यावहारिकताउदासीनता

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि चुनाव दिवस तक डाक से भेजे गए मतपत्र पाँच दिन बाद पहुँचने पर भी गिने जा सकते हैं। 5-4 के बहुमत से, जस्टिस बैरेट की राय ने रिपब्लिकन चुनौती को खारिज कर दिया और कहा कि संघीय कानून राज्य की छूट अवधि को रद्द नहीं करता। यह फैसला ट्रंप के लिए झटका है, जिन्होंने इसे धोखाधड़ी बताया।

महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस
व्यावहारिकताउदासीनता

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव दिवस के बाद पहुँचने वाले डाक मतपत्रों की गिनती की अनुमति दी, मिसिसिपी के एक कानून को बरकरार रखा। इस फैसले को ट्रंप की चुनाव नियम बदलने की कोशिशों पर रोक के रूप में देखा जा रहा है और मध्यावधि चुनावों से पहले इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। न्यायाधीशों ने कहा कि संघीय कानून राज्यों को बाद की प्राप्ति समय-सीमा तय करने से नहीं रोकता।

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