
एंचेलोटी का शांत दिमाग, ब्राजील की ऐतिहासिक वापसी: जापान के खिलाफ आखिरी सांसों में जीत
2026 विश्व कप के नॉकआउट में ब्राजील ने पहली बार पिछड़ने के बाद मैच जीता, जब कोच कार्लो एंचेलोटी के सधे फैसलों और अटूट शांति ने टीम को हार से जीत की ओर मोड़ दिया।
डलास की रात जब खत्म होने को थी, तब गैब्रियल मार्टिनेली ने 96वें मिनट में गेंद को जाल में पहुंचाकर ब्राजील के पूरे शिविर को एक अविश्वसनीय उन्माद में डुबो दिया। जापान के खिलाफ 1-0 से पिछड़ने के बाद 2-1 की यह जीत सिर्फ अगले दौर का टिकट नहीं थी; यह 2002 के बाद पहला मौका था जब सेलेसाओ ने विश्व कप के किसी नॉकआउट मुकाबले में हार की स्थिति से वापसी की। तब ऐसा करने पर टीम पांचवीं बार विश्व चैंपियन बनी थी। अब कार्लो एंचेलोटी की निगरानी में यह टीम एक अलग ही पहचान गढ़ रही है, जहां सितारों की चमक से ज्यादा सामूहिक धैर्य और सधी हुई रणनीति हावी है।
पहला हाफ ब्राजील के लिए निराशाजनक रहा। जापान की संगठित रक्षा ने बीच से हमले की हर कोशिश को विफल कर दिया, और लुकास पाकेता की चोट ने संकट को और गहरा दिया। यहीं एंचेलोटी ने अपनी सोच का परिचय दिया। उन्होंने घायल पाकेता की जगह किसी मिडफील्डर को नहीं, बल्कि युवा स्ट्राइकर एंड्रिक को उतारा और टीम का ढांचा 4-2-4 में बदल दिया। यह एक बड़ा जोखिम था, लेकिन इसने पूरा खेल पलट दिया। विनीसियस जूनियर को बाईं ओर खुली जगह मिली, ब्राजील ने विंग्स से क्रॉस की बौछार शुरू कर दी और जापान पूरी तरह रक्षात्मक हो गया। एंचेलोटी ने बाद में स्वीकार किया कि पहले हाफ की गहराई से प्रवेश की रणनीति विफल रही थी, लेकिन दूसरे हाफ में पेनल्टी एरिया में ज्यादा मौजूदगी और फ्लैंक से गेंद डालने पर जोर ने ताला खोल दिया।
लेकिन यह सिर्फ रणनीति नहीं थी; ड्रेसिंग रूम में एंचेलोटी का शांत व्यक्तित्व ही वह असली हथियार बना जिसने खिलाड़ियों का आत्मविश्वास लौटाया। डिफेंडर गैब्रियल मागाल्हाएस ने बताया कि कोच ने हाफ टाइम पर घबराहट नहीं, बल्कि शांति और संयम बनाए रखने का संदेश दिया। इंडोनेशियाई मीडिया से बात करते हुए मार्टिनेली ने खुलासा किया, “एंचेलोटी ने हमें भरोसा दिलाया कि गोल आएगा, हम मैच पलट देंगे। उनकी शांति ने हमें रिलैक्स कर दिया।” अरब मीडिया ने भी इस पहलू को रेखांकित किया: जब मार्टिनेली का गोल हुआ और पूरा ब्राजीली खेमा पागलों की तरह दौड़ पड़ा, एंचेलोटी शांति से अपने सहायक पॉल क्लेमेंट की ओर मुड़े और एक अतिरिक्त मिडफील्डर उतारकर जीत को सुरक्षित करने का फैसला किया। यह नजारा उनके पूरे दर्शन को बयां करता है।
55वें मिनट में कासेमीरो ने बराबरी का गोल दागा, जो पहले हाफ में पीला कार्ड पाने के बावजूद मैदान पर बने रहे। फिर 66वें मिनट में एंचेलोटी ने एक और निर्णायक कदम उठाया: उन्होंने नेमार को नहीं, बल्कि मार्टिनेली को मैटेउस कुन्हा की जगह उतारा। नेमार पूरे दूसरे हाफ टचलाइन के पीछे वार्मअप करते रहे, लेकिन एंचेलोटी ने टीम के सफल ढांचे से छेड़छाड़ नहीं की। यह फैसला आखिरी क्षणों में सही साबित हुआ जब ब्रूनो गिमाराएश के पास पर मार्टिनेली ने गोल कर ब्राजील को जीत दिला दी। ऑप्टा के आंकड़ों के अनुसार, यह 1966 के बाद विश्व कप के नॉकआउट चरण में सामान्य समय में किया गया सबसे देर से आने वाला विजयी गोल था।
यह जीत ऐसे दिन आई जब विश्व कप में बड़े उलटफेर देखने को मिले। जर्मनी को पैराग्वे ने पेनल्टी शूटआउट में हराकर बाहर कर दिया, जो जर्मन इतिहास में पहली पेनल्टी हार थी। नीदरलैंड्स भी मोरक्को से पेनल्टी पर हारकर टूर्नामेंट से बाहर हो गया। अब ब्राजील का सामना राउंड ऑफ 16 में नॉर्वे और आइवरी कोस्ट के बीच होने वाले मैच के विजेता से होगा। एंचेलोटी की इस टीम ने साबित कर दिया कि अब सेलेसाओ सिर्फ नामों पर निर्भर नहीं, बल्कि सामरिक विविधता और मानसिक मजबूती की ताकत बन चुकी है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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एक ऐतिहासिक वापसी में, ब्राजील ने जापान के खिलाफ घाटा पलटते हुए अंतिम 16 में जगह बनाई, जो 2002 के खिताबी अभियान की याद दिलाता है। एंसेलोटी का धैर्य और युवा एंड्रिक के साथ सामरिक जुआ निर्णायक साबित हुआ। यह खबर असंबंधित सुर्खियों के बीच दिखाई दी, जिसने जीत को कई वैश्विक घटनाओं में से एक के रूप में प्रस्तुत किया।
ब्राजील ने जापान को एक अलग व्यक्तित्व के साथ हराया: कोच की शांति ने अराजकता को हराया, धैर्य ने आवेग को मात दी। जब बेंच पर जश्न मनाया जा रहा था, एंसेलोटी ने शांति से अपने सहायक को मैच को बंद करने के लिए एक रक्षात्मक मिडफील्डर उतारने का निर्देश दिया। यह जीत भावना पर संयम की विजय थी।
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