
समझौते के बावजूद दक्षिण लेबनान पर इज़राइली हमले, हिज़्बुल्लाह ने समझौते को ‘शून्य’ ठहराया
दो दिन पहले हस्ताक्षरित अमेरिकी-मध्यस्थता ढाँचा समझौते के बाद इज़राइली हमलों और हिज़्बुल्लाह के विरोध से युद्ध विराम की उम्मीद कमजोर।
इज़राइल और लेबनान के बीच शुक्रवार को वाशिंगटन में हुए ढाँचा समझौते के बावजूद इज़राइली सेना ने रविवार को दक्षिणी लेबनान में फिर से हवाई हमले किए। लेबनान की सरकारी नेशनल न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, लड़ाकू विमानों ने देइर सिरयान और तैयबेह के नज़दीक क्षेत्रों को निशाना बनाया, जबकि ख़ियाम में विस्फोटों से आवासीय मकान जल गए। इज़राइली सेना ने दावा किया कि उसने नबातियेह क्षेत्र में हिज़्बुल्लाह के लड़ाकों और रॉकेट लॉन्चर को ढेर किया और एक सैनिक की दक्षिण लेबनान में मौत की पुष्टि की। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ जब दो पायलट क्षेत्रों से इज़राइली वापसी की प्रक्रिया शुरू होने की घोषणा की गई थी।
समझौते के मूल में वह शर्त है जो इज़राइली सेना की पूर्ण वापसी को हिज़्बुल्लाह के सत्यापित निरस्त्रीकरण से जोड़ती है। लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ़ औन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत में कहा कि उनका देश समझौते के क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी लेगा, जबकि बेरूत स्थित अमेरिकी दूतावास ने स्पष्ट किया कि पहले चरण में दो पायलट इलाक़ों से इज़राइली वापसी होगी और फिर लेबनानी सेना वहाँ तैनात की जाएगी। दूसरी ओर, इज़राइल ने सैन्य प्रमुख इयाल ज़मीर के ज़रिए ‘सुरक्षा क्षेत्र’ में अभियान जारी रखने का आदेश दिया और रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ ने कहा कि जब तक हिज़्बुल्लाह सशस्त्र है, सेना लेबनान में ही रहेगी। हिज़्बुल्लाह नेता नईम क़ासिम ने इस समझौते को ‘अपमानजनक’ और ‘संप्रभुता का आत्मसमर्पण’ बताते हुए इसे शून्य घोषित कर दिया, जबकि समूह के सांसद हसन फ़दलल्लाह ने चेतावनी दी कि यह देश को अंदरूनी संघर्ष की ओर धकेल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका ने समझौते की निगरानी के लिए सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के ज़रिए इज़राइल-लेबनान निगरानी तंत्र को पुनर्जीवित किया है; सेंटकॉम कमांडर ब्रैड कूपर वापसी प्रक्रिया पर नज़र रखने के लिए इज़राइल पहुँच चुके हैं। ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ़ ने लेबनानी समकक्ष नबीह बेरी से बातचीत में कहा कि तेहरान का लक्ष्य युद्ध समाप्त करना, शरणार्थियों की वापसी और ‘ज़ायोनी शासन’ की लेबनानी भूमि से वापसी है, तथा वह इस मुद्दे पर गंभीरता से काम कर रहा है। फ़्रांस ने भी समझौते के कार्यान्वयन में योगदान की पेशकश की है।
यह समझौता नवंबर 2024 के युद्धविराम के बाद की गई ऐसी ही पहली कोशिश नहीं है, लेकिन इस बार पायलट ज़ोन की अवधारणा और सेंटकॉम की सीधी निगरानी इसे पिछले प्रयासों से अलग बनाती है। हिज़्बुल्लाह और ईरान के कड़े विरोध ने लेबनान के भीतर सांप्रदायिक तनाव बढ़ा दिया है, जिससे गृहयुद्ध जैसी स्थिति की आशंका जताई जा रही है। भारत के लिए यह परिदृश्य महत्वपूर्ण है: पश्चिम एशिया में बढ़ती अस्थिरता ऊर्जा आपूर्ति और प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है, जबकि लेबनान में तैनात यूएनआईएफ़आईएल में भारतीय शांति सैनिकों की मौजूदगी किसी भी आंतरिक संघर्ष से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होगी। अगले कदम के तौर पर दो अज्ञात पायलट क्षेत्रों से इज़राइली वापसी की प्रक्रिया शुरू होनी थी, लेकिन लगातार हमलों और हिज़्बुल्लाह के इनकार ने समझौते की राह को अनिश्चित बना दिया है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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त्रिपक्षीय समझौता शांति की वास्तविक आशा प्रदान करता है, लेकिन इसकी सफलता लेबनान की हिजबुल्लाह को निरस्त्र करने की क्षमता पर निर्भर करती है, जिसे समूह हिंसक रूप से अस्वीकार करता है।
यह समझौता एक खतरनाक आत्मसमर्पण है जो इजरायल की सुरक्षा को लेबनान से ऊपर रखता है, राष्ट्रीय संप्रभुता को कमजोर करता है और आंतरिक संघर्ष का जोखिम पैदा करता है।
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