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भू-राजनीति और राजनीतिरविवार, 28 जून 2026

तेहरान ने अमेरिकी हमलों को युद्धविराम का उल्लंघन बताया, कुवैत-बहरीन में ईरानी जवाबी कार्रवाई

ईरान ने अमेरिकी हवाई हमलों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन करार देते हुए इस्लामाबाद ज्ञापन के उल्लंघन का आरोप लगाया और कुवैत व बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल-ड्रोन हमले किए।

ईरान ने रविवार को संयुक्त राज्य अमेरिका पर 17 जून 2026 को हस्ताक्षरित इस्लामाबाद ज्ञापन और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन करने का आरोप लगाया, जब अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने दक्षिणी ईरानी तट पर सैन्य निगरानी और संचार प्रतिष्ठानों पर रात्रि हवाई हमले किए। जवाब में, ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कुवैत में अली अल सलेम हवाई अड्डे और बहरीन के सलमान बंदरगाह स्थित अमेरिकी पांचवें बेड़े के अड्डे सहित आठ सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों से हमले किए।

ईरानी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी कार्रवाई को ‘बर्बर हमला’ करार देते हुए कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का स्पष्ट उल्लंघन है, जो किसी भी राज्य की क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ बल प्रयोग पर रोक लगाता है। मंत्रालय के बयान में कहा गया कि वाशिंगटन अपनी प्रतिबद्धताओं को ‘कोई मूल्य या विश्वसनीयता’ नहीं देता और ‘वादा तोड़ना इस शासन की प्रकृति का हिस्सा है’। तेहरान ने चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा के अपने अधिकार का हवाला दिया और आगाह किया कि किसी भी बहाने से होने वाली नई अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को ‘कुचलने वाली प्रतिक्रिया’ मिलेगी। साथ ही, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री निगरानी और रोकथाम को पहले से अधिक सख्ती से लागू करने की घोषणा की।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, हमले ईरान द्वारा एक दिन पहले होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक टैंकर एम/टी किकू पर हमले और क्षेत्र में शिपिंग के खिलाफ जारी आक्रमण की सीधी प्रतिक्रिया थे। सेंटकॉम ने बताया कि नौसेना और वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने ईरानी सैन्य खुफिया बुनियादी ढांचे, वायु रक्षा प्रणालियों, ड्रोन भंडारण और नौसैनिक खदान क्षमताओं सहित दस स्थानों को निशाना बनाया। एक अमेरिकी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि ईरानी जवाबी हमलों में कोई अमेरिकी हताहत नहीं हुआ और न ही खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी प्रतिष्ठानों को महत्वपूर्ण क्षति पहुँची।

इस्लामाबाद ज्ञापन, जिस पर मूलतः स्विट्जरलैंड में आमने-सामने की योजना के बाद दूरस्थ रूप से हस्ताक्षर किए गए थे, ने फरवरी 2026 के अंत में अमेरिका और इज़रायल द्वारा शुरू किए गए चार महीने के संघर्ष को समाप्त किया और 60 दिनों की वार्ता अवधि शुरू की, जिसमें ईरान का परमाणु कार्यक्रम और अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने जैसे व्यापक मुद्दे शामिल थे। हालाँकि, ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने से पहले ही 28 मई 2026 को होर्मुज क्षेत्र में अमेरिकी सेना ने ईरानी हमलावर ड्रोनों को मार गिराया और बंदर-अब्बास में एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन पर हमला किया, जिसे अमेरिका ने ‘नपा-तुला और रक्षात्मक’ बताया। इसके अलावा, इसी वर्ष जून में इज़रायल ने नतांज, फोर्दो और इस्फ़हान सहित ईरानी परमाणु स्थलों पर हमले किए, जिनकी ईरान और ओमान जैसे देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए निंदा की और ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने का अनुरोध किया।

ईरानी विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव और सुरक्षा परिषद से अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के अपने दायित्वों को निभाने का आह्वान किया। आईआरजीसी ने चेतावनी दी कि युद्धविराम का उल्लंघन पूरी राजनयिक प्रक्रिया को ठप कर देगा। अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के ताज़ा आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के साथ, ज्ञापन के तहत बातचीत का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है और खाड़ी में व्यापक सैन्य टकराव का खतरा मँडरा रहा है।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

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लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
ईरानी और संबद्ध प्रेसरूसी और सीआईएस प्रेस
ईरानी और संबद्ध प्रेस
चेतावनीआक्रोशपीड़ितभाव

Iran's Foreign Ministry condemned the US airstrikes as a blatant violation of the UN Charter and the ceasefire memorandum. It accused Washington of habitual oath-breaking and called on the UN Security Council to uphold international peace. The statement portrayed Iran as a victim of US aggression, emphasizing the regime's untrustworthiness.

रूसी और सीआईएस प्रेस
आक्रोशसंदेह

Russian outlets reported Iran's condemnation of US strikes as a breach of the ceasefire memorandum. They highlighted Iranian accusations that the US shows no regard for its commitments and that promise-breaking is inherent to its nature. The coverage framed the US as an unreliable actor, supporting Iran's position without explicit endorsement.

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तेहरान ने अमेरिकी हमलों को युद्धविराम का उल्लंघन बताया, कुवैत-बहरीन में ईरानी जवाबी कार्रवाई

ईरान ने अमेरिकी हवाई हमलों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन करार देते हुए इस्लामाबाद ज्ञापन के उल्लंघन का आरोप लगाया और कुवैत व बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल-ड्रोन हमले किए।

ईरान ने रविवार को संयुक्त राज्य अमेरिका पर 17 जून 2026 को हस्ताक्षरित इस्लामाबाद ज्ञापन और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन करने का आरोप लगाया, जब अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने दक्षिणी ईरानी तट पर सैन्य निगरानी और संचार प्रतिष्ठानों पर रात्रि हवाई हमले किए। जवाब में, ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कुवैत में अली अल सलेम हवाई अड्डे और बहरीन के सलमान बंदरगाह स्थित अमेरिकी पांचवें बेड़े के अड्डे सहित आठ सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों से हमले किए।

ईरानी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी कार्रवाई को ‘बर्बर हमला’ करार देते हुए कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का स्पष्ट उल्लंघन है, जो किसी भी राज्य की क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ बल प्रयोग पर रोक लगाता है। मंत्रालय के बयान में कहा गया कि वाशिंगटन अपनी प्रतिबद्धताओं को ‘कोई मूल्य या विश्वसनीयता’ नहीं देता और ‘वादा तोड़ना इस शासन की प्रकृति का हिस्सा है’। तेहरान ने चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा के अपने अधिकार का हवाला दिया और आगाह किया कि किसी भी बहाने से होने वाली नई अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को ‘कुचलने वाली प्रतिक्रिया’ मिलेगी। साथ ही, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री निगरानी और रोकथाम को पहले से अधिक सख्ती से लागू करने की घोषणा की।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, हमले ईरान द्वारा एक दिन पहले होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक टैंकर एम/टी किकू पर हमले और क्षेत्र में शिपिंग के खिलाफ जारी आक्रमण की सीधी प्रतिक्रिया थे। सेंटकॉम ने बताया कि नौसेना और वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने ईरानी सैन्य खुफिया बुनियादी ढांचे, वायु रक्षा प्रणालियों, ड्रोन भंडारण और नौसैनिक खदान क्षमताओं सहित दस स्थानों को निशाना बनाया। एक अमेरिकी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि ईरानी जवाबी हमलों में कोई अमेरिकी हताहत नहीं हुआ और न ही खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी प्रतिष्ठानों को महत्वपूर्ण क्षति पहुँची।

इस्लामाबाद ज्ञापन, जिस पर मूलतः स्विट्जरलैंड में आमने-सामने की योजना के बाद दूरस्थ रूप से हस्ताक्षर किए गए थे, ने फरवरी 2026 के अंत में अमेरिका और इज़रायल द्वारा शुरू किए गए चार महीने के संघर्ष को समाप्त किया और 60 दिनों की वार्ता अवधि शुरू की, जिसमें ईरान का परमाणु कार्यक्रम और अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने जैसे व्यापक मुद्दे शामिल थे। हालाँकि, ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने से पहले ही 28 मई 2026 को होर्मुज क्षेत्र में अमेरिकी सेना ने ईरानी हमलावर ड्रोनों को मार गिराया और बंदर-अब्बास में एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन पर हमला किया, जिसे अमेरिका ने ‘नपा-तुला और रक्षात्मक’ बताया। इसके अलावा, इसी वर्ष जून में इज़रायल ने नतांज, फोर्दो और इस्फ़हान सहित ईरानी परमाणु स्थलों पर हमले किए, जिनकी ईरान और ओमान जैसे देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए निंदा की और ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने का अनुरोध किया।

ईरानी विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव और सुरक्षा परिषद से अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के अपने दायित्वों को निभाने का आह्वान किया। आईआरजीसी ने चेतावनी दी कि युद्धविराम का उल्लंघन पूरी राजनयिक प्रक्रिया को ठप कर देगा। अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के ताज़ा आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के साथ, ज्ञापन के तहत बातचीत का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है और खाड़ी में व्यापक सैन्य टकराव का खतरा मँडरा रहा है।

स्रोतों में मतभेद

भू-राजनीति और राजनीति · 3 स्रोत · 2 भाषाएँ

0%कम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

निंदक100%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 2 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
ईरानी और संबद्ध प्रेसरूसी और सीआईएस प्रेस
ईरानी और संबद्ध प्रेस
चेतावनीआक्रोशपीड़ितभाव

Iran's Foreign Ministry condemned the US airstrikes as a blatant violation of the UN Charter and the ceasefire memorandum. It accused Washington of habitual oath-breaking and called on the UN Security Council to uphold international peace. The statement portrayed Iran as a victim of US aggression, emphasizing the regime's untrustworthiness.

रूसी और सीआईएस प्रेस
आक्रोशसंदेह

Russian outlets reported Iran's condemnation of US strikes as a breach of the ceasefire memorandum. They highlighted Iranian accusations that the US shows no regard for its commitments and that promise-breaking is inherent to its nature. The coverage framed the US as an unreliable actor, supporting Iran's position without explicit endorsement.

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