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भू-राजनीति और राजनीतिरविवार, 28 जून 2026

हसीना की वापसी की घोषणा और भारत का वीज़ा क़दम

भारत ने बांग्लादेशियों के लिए पर्यटक वीज़ा फिर से शुरू कर दिए, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मौत की सज़ा के बावजूद इसी साल लौटने की बात कही।

भारत ने लगभग दो वर्ष बाद बांग्लादेशी नागरिकों के लिए पर्यटक वीज़ा सेवा बहाल करने का निर्णय लिया है। ढाका में उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने घोषणा की कि रविवार से पाँच केंद्रों—ढाका, राजशाही, चटगांव, सिलहट और खुलना—पर आवेदन शुरू होंगे। यह क़दम अगस्त 2024 में छात्र विद्रोह के बाद शेख हसीना सरकार के पतन और उनके भारत आगमन के बाद ठप हुई वीज़ा प्रक्रिया को आंशिक रूप से फिर खोलता है। पहले सालाना 21 लाख से अधिक बांग्लादेशी भारत आते थे, जो 2025 में घटकर 4.7 लाख रह गए; इस गिरावट से चिकित्सा, व्यापार और पारिवारिक संबंध प्रभावित हुए।

इस बीच, निर्वासन में रह रहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने एनडीटीवी को दिए साक्षात्कार में कहा कि वे इसी वर्ष बांग्लादेश लौटेंगी। उन्होंने अनुपस्थिति में सुनाई गई मौत की सज़ा को “अवैध, असंवैधानिक और राजनीति से प्रेरित” बताया तथा अवामी लीग पर प्रतिबंध को लोकतंत्र पर हमला करार दिया। हसीना ने दावा किया कि पार्टी ज़मीनी समर्थन के बल पर फिर खड़ी होगी, और अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों के लिए वर्तमान सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया। उन्होंने किसी गुप्त समझौते से इनकार किया।

ढाका में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार बार-बार हसीना के प्रत्यर्पण की माँग कर चुकी है और अवामी लीग के नेताओं के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई जारी है। वहीं, भारत का वीज़ा क़दम द्विपक्षीय संबंधों में विश्वास बहाली के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जो हसीना की मौजूदगी, मीडिया में ग़लत जानकारियों और सीमा पर होने वाली मुठभेड़ों के कारण तनावपूर्ण हो गए थे। बांग्लादेश में भारत विरोधी भावनाएँ और इस्लामी कट्टरता के उभार के बावजूद, आम नागरिकों का भारत से सांस्कृतिक और व्यावहारिक जुड़ाव बना हुआ है, विशेषकर चिकित्सा सुविधाओं के लिए।

विश्लेषकों के अनुसार, भारत का यह क़दम अपने सबसे बड़े दक्षिण एशियाई पड़ोसी के साथ रिश्तों में स्थिरता लाने की कोशिश का हिस्सा है, ख़ास तौर पर तब जब प्रधानमंत्री रहमान चीन की राजकीय यात्रा पर गए हों। हालाँकि, वीज़ा सेवा केवल पाँच केंद्रों से शुरू हो रही है जबकि पहले 16 केंद्र थे, और पूर्ण सामान्यता के लिए राजनीतिक भरोसे की आवश्यकता होगी। हसीना का प्रत्यर्पण अनसुलझा मुद्दा बना हुआ है; ढाका इसे रिश्तों की बड़ी कसौटी बता रहा है जबकि नई दिल्ली ने इस पर सार्वजनिक रूप से कोई रुख़ स्पष्ट नहीं किया है। फ़िलहाल, वीज़ा आवेदन रविवार से खुलेंगे और दोनों देश आर्थिक व कूटनीतिक ज़रूरतों के बीच संतुलन साधने का प्रयास करते दिख रहे हैं।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 2 भाषाएँ

41%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेसअरब खाड़ी प्रेस
भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस
व्यावहारिकतासंदेह

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना, जिन्हें वर्तमान सरकार भगोड़ा करार देती है, मृत्युदंड की सजा के बावजूद इस साल बांग्लादेश लौटने की कसम खाती हैं। उनका यह वादा ऐसे समय में आया है जब द्विपक्षीय संबंधों में नरमी के संकेत मिल रहे हैं और भारत बांग्लादेशी नागरिकों के लिए पर्यटक वीज़ा फिर से शुरू कर रहा है।

अरब खाड़ी प्रेस
चेतावनीप्रतिशोधवादपीड़ितभाव

शेख हसीना अपनी नियोजित वापसी को बांग्लादेश में लोकतंत्र बहाल करने और हमले के शिकार अल्पसंख्यकों की रक्षा की लड़ाई के रूप में पेश करती हैं। दुबई से रिपोर्ट किए गए उनके बयान मृत्युदंड और उनकी पार्टी पर प्रतिबंध को एक अवैध शासन की राजनीति-प्रेरित चाल बताते हैं।

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पुतिन ने स्वीकारी ईंधन की कमी, यूक्रेनी हमलों के बाद क्रीमिया में आपातकाल·सिचुआन में 5.5 तीव्रता के भूकंप में 13 घायल, कोई मौत नहीं·लेबनान-इज़राइल समझौता: अमेरिकी दबाव में बना ढांचा, गुप्त सुरक्षा अनुबंध से क्रियान्वयन पर सवाल·चिंता और आर्थिक व्यवहार: मनोवैज्ञानिक पैटर्न कैसे तय करते हैं वित्तीय भविष्य·विंबलडन 2026: सिनर की वापसी, सेरेना का जादू और चोटों का साया·ब्राजील बनाम जापान: एंसेलोटी ने रहस्य बनाए रखा, नेमार की भूमिका पर सस्पेंस·रंगपुर की सड़क से कुआलालंपुर के दातारन तक: नशे के विरुद्ध साझा स्वर·अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चे तेल में उछाल, होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति जोखिम बरकरार·पुतिन ने स्वीकारी ईंधन की कमी, यूक्रेनी हमलों के बाद क्रीमिया में आपातकाल·सिचुआन में 5.5 तीव्रता के भूकंप में 13 घायल, कोई मौत नहीं·लेबनान-इज़राइल समझौता: अमेरिकी दबाव में बना ढांचा, गुप्त सुरक्षा अनुबंध से क्रियान्वयन पर सवाल·चिंता और आर्थिक व्यवहार: मनोवैज्ञानिक पैटर्न कैसे तय करते हैं वित्तीय भविष्य·विंबलडन 2026: सिनर की वापसी, सेरेना का जादू और चोटों का साया·ब्राजील बनाम जापान: एंसेलोटी ने रहस्य बनाए रखा, नेमार की भूमिका पर सस्पेंस·रंगपुर की सड़क से कुआलालंपुर के दातारन तक: नशे के विरुद्ध साझा स्वर·अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चे तेल में उछाल, होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति जोखिम बरकरार·
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रविवार, 28 जून 2026

हसीना की वापसी की घोषणा और भारत का वीज़ा क़दम

भारत ने बांग्लादेशियों के लिए पर्यटक वीज़ा फिर से शुरू कर दिए, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मौत की सज़ा के बावजूद इसी साल लौटने की बात कही।

भारत ने लगभग दो वर्ष बाद बांग्लादेशी नागरिकों के लिए पर्यटक वीज़ा सेवा बहाल करने का निर्णय लिया है। ढाका में उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने घोषणा की कि रविवार से पाँच केंद्रों—ढाका, राजशाही, चटगांव, सिलहट और खुलना—पर आवेदन शुरू होंगे। यह क़दम अगस्त 2024 में छात्र विद्रोह के बाद शेख हसीना सरकार के पतन और उनके भारत आगमन के बाद ठप हुई वीज़ा प्रक्रिया को आंशिक रूप से फिर खोलता है। पहले सालाना 21 लाख से अधिक बांग्लादेशी भारत आते थे, जो 2025 में घटकर 4.7 लाख रह गए; इस गिरावट से चिकित्सा, व्यापार और पारिवारिक संबंध प्रभावित हुए।

इस बीच, निर्वासन में रह रहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने एनडीटीवी को दिए साक्षात्कार में कहा कि वे इसी वर्ष बांग्लादेश लौटेंगी। उन्होंने अनुपस्थिति में सुनाई गई मौत की सज़ा को “अवैध, असंवैधानिक और राजनीति से प्रेरित” बताया तथा अवामी लीग पर प्रतिबंध को लोकतंत्र पर हमला करार दिया। हसीना ने दावा किया कि पार्टी ज़मीनी समर्थन के बल पर फिर खड़ी होगी, और अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों के लिए वर्तमान सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया। उन्होंने किसी गुप्त समझौते से इनकार किया।

ढाका में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार बार-बार हसीना के प्रत्यर्पण की माँग कर चुकी है और अवामी लीग के नेताओं के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई जारी है। वहीं, भारत का वीज़ा क़दम द्विपक्षीय संबंधों में विश्वास बहाली के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जो हसीना की मौजूदगी, मीडिया में ग़लत जानकारियों और सीमा पर होने वाली मुठभेड़ों के कारण तनावपूर्ण हो गए थे। बांग्लादेश में भारत विरोधी भावनाएँ और इस्लामी कट्टरता के उभार के बावजूद, आम नागरिकों का भारत से सांस्कृतिक और व्यावहारिक जुड़ाव बना हुआ है, विशेषकर चिकित्सा सुविधाओं के लिए।

विश्लेषकों के अनुसार, भारत का यह क़दम अपने सबसे बड़े दक्षिण एशियाई पड़ोसी के साथ रिश्तों में स्थिरता लाने की कोशिश का हिस्सा है, ख़ास तौर पर तब जब प्रधानमंत्री रहमान चीन की राजकीय यात्रा पर गए हों। हालाँकि, वीज़ा सेवा केवल पाँच केंद्रों से शुरू हो रही है जबकि पहले 16 केंद्र थे, और पूर्ण सामान्यता के लिए राजनीतिक भरोसे की आवश्यकता होगी। हसीना का प्रत्यर्पण अनसुलझा मुद्दा बना हुआ है; ढाका इसे रिश्तों की बड़ी कसौटी बता रहा है जबकि नई दिल्ली ने इस पर सार्वजनिक रूप से कोई रुख़ स्पष्ट नहीं किया है। फ़िलहाल, वीज़ा आवेदन रविवार से खुलेंगे और दोनों देश आर्थिक व कूटनीतिक ज़रूरतों के बीच संतुलन साधने का प्रयास करते दिख रहे हैं।

स्रोतों में मतभेद

भू-राजनीति और राजनीति · 6 स्रोत · 2 भाषाएँ

41%मध्यम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

न्यूनत्र29%
निंदक71%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 2 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेसअरब खाड़ी प्रेस
भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस
व्यावहारिकतासंदेह

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना, जिन्हें वर्तमान सरकार भगोड़ा करार देती है, मृत्युदंड की सजा के बावजूद इस साल बांग्लादेश लौटने की कसम खाती हैं। उनका यह वादा ऐसे समय में आया है जब द्विपक्षीय संबंधों में नरमी के संकेत मिल रहे हैं और भारत बांग्लादेशी नागरिकों के लिए पर्यटक वीज़ा फिर से शुरू कर रहा है।

अरब खाड़ी प्रेस
चेतावनीप्रतिशोधवादपीड़ितभाव

शेख हसीना अपनी नियोजित वापसी को बांग्लादेश में लोकतंत्र बहाल करने और हमले के शिकार अल्पसंख्यकों की रक्षा की लड़ाई के रूप में पेश करती हैं। दुबई से रिपोर्ट किए गए उनके बयान मृत्युदंड और उनकी पार्टी पर प्रतिबंध को एक अवैध शासन की राजनीति-प्रेरित चाल बताते हैं।

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