
जी7 शिखर सम्मेलन: ईरान समझौते को समर्थन, होर्मुज जलडमरूमध्य में मुक्त आवागमन पर जोर
फ्रांस में आयोजित जी7 बैठक में नेताओं ने अमेरिका-ईरान समझौते का स्वागत किया, होर्मुज जलडमरूमध्य में निर्बाध पारगमन को व्यापार की आधारशिला बताया और लेबनान में तत्काल युद्धविराम की मांग की।
फ्रांस के एवियां में बुधवार को संपन्न जी7 शिखर सम्मेलन ने अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए प्रारंभिक समझौते को एक स्वर में समर्थन देकर क्षेत्रीय कूटनीति को नई गति प्रदान की। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि सभी सदस्य देशों ने इस “बहुत अच्छे समझौते” का स्वागत किया, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका और मध्यस्थ देशों के सहयोग से संभव बनाया गया। यह समझौता, जिस पर पहले ही डिजिटल हस्ताक्षर हो चुके हैं और शुक्रवार को जिनेवा में औपचारिक रूप से हस्ताक्षरित होने की उम्मीद है, पश्चिम एशिया में महीनों से जारी अस्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर उसके भयावह प्रभावों को समाप्त करने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।
सम्मेलन का सबसे ठोस संदेश होर्मुज जलडमरूमध्य में निर्बाध नौवहन को लेकर रहा। जी7 नेताओं ने अपने आधिकारिक वक्तव्य में स्पष्ट किया कि बिना किसी प्रतिबंध या शुल्क के पारगमन का अधिकार अंतरराष्ट्रीय व्यापार की आधारशिला है। मैक्रों ने रेखांकित किया कि यूरोप की लगभग एक-चौथाई तेल और गैस आपूर्ति इसी मार्ग से गुज़रती है, इसलिए इसकी सुरक्षा नागरिकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। समूह ने होर्मुज पर निर्भरता घटाने, ऊर्जा भंडार बढ़ाने और मध्य पूर्व से तेल-गैस निकासी के वैकल्पिक मार्ग विकसित करने की प्रतिबद्धता जताई। इसके साथ ही फ्रांस और ब्रिटेन के नेतृत्व में एक बहुराष्ट्रीय रक्षा पहल को समर्थन दिया गया, जिसमें 20 देशों ने जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाज़ों की सुरक्षा, माइन-सफ़ाई की पुष्टि और शिपिंग कंपनियों को आश्वस्त करने में भाग लेने की इच्छा दिखाई है। भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों के लिए, जो अपनी कच्चे तेल की बड़ी खेप इसी मार्ग से मंगाते हैं, यह पहल ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से राहत और सतर्कता दोनों का संकेत है।
जी7 नेताओं ने लेबनान में तत्काल और प्रभावी युद्धविराम की पुरज़ोर मांग की तथा हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण के लिए लेबनानी नेतृत्व के प्रयासों का समर्थन किया। मैक्रों ने कहा कि लेबनान की संप्रभुता का सम्मान अनिवार्य है और यह एकीकृत रुख महीनों के मतभेदों के बाद सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, लेबनान-इज़राइल वार्ता 23 जून से शुरू होकर तीन दिन चलने वाली है, जो युद्धविराम को स्थायी बनाने की कोशिशों का हिस्सा है। यह क्षेत्रीय पहल ईरान समझौते के व्यापक ढाँचे से जुड़ी हुई है, क्योंकि जी7 का मानना है कि समझौता ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल क्षमताओं से उपजे ख़तरों से निपटने का अवसर भी प्रदान करता है।
तेहरान की ओर से ईरानी समाचार एजेंसी इरना ने सोशल मीडिया पर चल रही उन अफ़वाहों का खंडन किया कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल की स्विट्ज़रलैंड यात्रा रद्द कर दी गई है। एजेंसी ने पुष्टि की कि जिनेवा वार्ता के कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं हुआ है और सोमवार सुबह समझौता ज्ञापन के अंतिम प्रारूप को मंज़ूरी दे दी गई। इस बयान का उद्देश्य वार्ता प्रक्रिया को लेकर किसी भी अनिश्चितता को दूर करना है और यह संकेत देता है कि ईरान समझौते को अमली रूप देने के लिए प्रतिबद्ध है।
वैश्विक परिदृश्य में यह घटनाक्रम एक नाज़ुक संतुलन को दर्शाता है। एक ओर जी7 होर्मुज की मुक्त नौवहन को अहिंसक ढंग से बहाल करने और ईरान को परमाणु हथियार से दूर रखने के लक्ष्य पर एकजुट है, वहीं दूसरी ओर लेबनान में स्थायी शांति और हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण जैसे जटिल मुद्दों पर प्रगति की उम्मीद कर रहा है। भारत और व्यापक दक्षिण एशिया के लिए, होर्मुज में स्थिरता ऊर्जा आयात की लागत और आपूर्ति शृंखला को सीधे प्रभावित करेगी, जबकि वैकल्पिक मार्गों की खोज दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति पर पुनर्विचार का अवसर है। आने वाले सप्ताहों में जिनेवा हस्ताक्षर और लेबनान वार्ता के नतीजे यह तय करेंगे कि क्या यह बहुपक्षीय सहमति वास्तव में पश्चिम एशिया को एक स्थायी शांति की ओर ले जा सकती है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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एवियन में G7 शिखर सम्मेलन ने ईरान-अमेरिका समझौते का जोरदार समर्थन किया और इसे एक ऐतिहासिक अवसर बताया। ईरानी सूत्र इस समझौते को कूटनीतिक जीत के रूप में देखते हैं, लेकिन तेहरान की क्षेत्रीय और बैलिस्टिक गतिविधियों पर अंकुश की भाषा को लेकर एक हद तक संशय भी प्रकट करते हैं।
G7 ने ईरान समझौते का समर्थन किया और होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता पर जोर दिया तथा किसी भी शुल्क को खारिज किया। अरब लेवांत और मगरेब मीडिया ने लेबनान में युद्धविराम को मजबूत करने और उसकी संप्रभुता के सम्मान पर मैक्रों के फोकस को उजागर किया, साथ ही होर्मुज पर ऊर्जा निर्भरता कम करने के प्रयासों को भी रेखांकित किया।
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