
नीदरलैंड्स ने स्वीडन को 5-1 से कुचला, ग्रुप एफ की चौखट पर दहाड़
ब्रॉब्बी और गाकपो के दो-दो गोल की बदौलत ऑरेंजे ने ह्यूस्टन में स्वीडन को ध्वस्त कर विश्व कप में लगातार 14 मैचों की अजेयता का कीर्तिमान रचा।
ह्यूस्टन के एनआरजी स्टेडियम में नीदरलैंड्स ने फुटबॉल की बादशाहत का ऐसा नमूना पेश किया कि स्वीडन की मजबूत दीवार मिट्टी की तरह ढह गई। पहले ही हाफ में ब्रायन ब्रॉब्बी के दो गोल ने ऑरेंजे को 2-0 से आगे कर दिया और दूसरे हाफ में कोडी गाकपो ने तीन मिनट के भीतर दो गोल दागकर स्कोर 4-0 कर मैच पर ताला जड़ दिया। अंत में क्रिसेंसियो समरविले ने पांचवां गोल ठोककर 5-1 की जीत पक्की कर दी और नीदरलैंड्स ग्रुप एफ में चार अंकों के साथ शीर्ष पर पहुंच गया।
डच टीम की शुरुआती रफ्तार ने स्वीडन को पहले ही मिनटों में चौंधिया दिया। पांचवें मिनट में गाकपो के नीचे के क्रॉस पर ब्रॉब्बी ने करीब से गोल कर खाता खोला। 17वें मिनट में डेन्ज़ल डुम्फ्रीस के दाएं छोर से आए रास्ते पर एक बार फिर ब्रॉब्बी खिसककर आए और डिफेंडरों के बीच से गेंद को जाल में पहुंचा दिया। यह नीदरलैंड्स का विश्व कप इतिहास का 100वां गोल था। हाफ-टाइम तक स्वीडन ने कई मौके बनाए – गुस्ताफ लागेरबिएल्के का हेडर ऑफसाइड करार दिया गया और बार्ट वर्ब्रुगन ने विक्टर ग्योकेरेस व यासिन आयारी के शॉट रोककर डच किले को सुरक्षित रखा।
दूसरे हाफ की शुरुआत में ही नीदरलैंड्स ने झटके देना जारी रखा। 47वें मिनट में डुम्फ्रीस ने दाएं से सेंटर किया और गाकपो ने दूसरी पोस्ट पर खड़े होकर गेंद को खाली पोस्ट में डाल दिया। सात मिनट बाद ही गाकपो ने समरविले के पास पर बाएं छोर से पैंतरा लगाकर नाप-तौल कर शॉट मारा – गेंद सीधा निचले कोने में समाई। स्वीडन की ओर से एंथोनी एलांगा ने 59वें मिनट में अलेक्जेंडर इसाक के शानदार थ्रू-बॉल पर दौड़ते हुए गोल कर स्कोर 4-1 किया, लेकिन यह महज सांत्वना साबित हुआ। 89वें मिनट में मेम्फिस डेपाय ने समरविले को गोल पर भेजा और उसने बॉक्स के बाहर से दाएं पैर का जोरदार शॉट लगाकर विपक्षी गोलकीपर को निराश कर दिया।
यह जीत नीदरलैंड्स के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक रही। टीम ने लगातार 14 विश्व कप मैचों में नियमित समय में हार न झेलने का कीर्तिमान बनाया – इससे पहले यह रिकॉर्ड ब्राजील के नाम था जिसने 1958-66 के बीच 13 मैचों तक अजेयता बरकरार रखी थी। डच टीम 2010 के फाइनल के बाद से विश्व कप में नियमित या अतिरिक्त समय में कोई मुकाबला नहीं हारी है। स्वीडन को 1950 में ब्राजील से 7-1 की हार के बाद सबसे बड़ी विश्व कप पराजय झेलनी पड़ी।
इस जीत ने ग्रुप एफ की तस्वीर साफ कर दी। नीदरलैंड्स चार अंकों के साथ शीर्ष पर है, जबकि स्वीडन के तीन अंक हैं और उसके आगे जापान (एक अंक) व ट्यूनीशिया (शून्य) का मैच बाकी है। अब 25 जून को नीदरलैंड्स कैनसस सिटी में ट्यूनीशिया से भिड़ेगा, वहीं डलास में स्वीडन का सामना जापान से होगा। दोनों मुकाबले अगले दौर में जगह पक्की करने के लिए निर्णायक साबित होंगे।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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अरब मीडिया ट्यूनीशिया की 5-1 की हार और कोच की बर्खास्तगी की कड़वाहट के साथ नीदरलैंड-स्वीडन मैच देख रहा है। यह मुकाबला स्वीडन की असली ताकत परखने का मौका माना जा रहा है, इस उम्मीद के साथ कि डच टीम स्कैंडिनेवियाई टीम को रोककर ग्रुप को फिर से खोल दे। कवरेज में बदले की भावना और यह इच्छा समाई है कि ग्रुप F अभी तय न हो।
नॉर्डिक मीडिया इस मैच को ट्यूनीशिया के खिलाफ शानदार शुरुआत के बाद स्वीडन के लिए एक अहम परीक्षा के रूप में पेश करता है। ध्यान रक्षात्मक मजबूती और डच दबाव को संभालने पर है, एक व्यावहारिक लहजे के साथ जो समयपूर्व विजयोत्सव से बचता है। जीत अगले दौर में जगह लगभग पक्की कर देगी, लेकिन कवरेज संतुलित और शांत बनी हुई है।
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