
मेसी की हैट्रिक के बीच विवादित टैकल पर अल्जीरिया ने फीफा से की शिकायत
अर्जेंटीना के 3-0 से जीत और मेसी के रिकॉर्ड तीन गोलों के बाद अल्जीरियाई संघ ने मेसी के एक टैकल को लाल कार्ड न दिए जाने पर आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई, जिससे वैश्विक स्तर पर रेफरी निर्णयों की बहस छिड़ गई।
कैनसस सिटी के एरोहेड स्टेडियम में खेले गए विश्व कप 2026 के ग्रुप जे के पहले मुकाबले में गत चैंपियन अर्जेंटीना ने अल्जीरिया को 3-0 से हराकर अपने अभियान की जोरदार शुरुआत की। कप्तान लियोनेल मेसी ने 17वें, 60वें और 76वें मिनट में गोल दागते हुए हैट्रिक पूरी की और मिरोस्लाव क्लोजे के 16 विश्व कप गोलों के सर्वकालिक रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। 38 वर्षीय मेसी का यह प्रदर्शन अर्जेंटीना की आक्रामक शैली का केंद्र बिंदु रहा, लेकिन मैदान के बाहर एक अलग ही कहानी ने आकार ले लिया।
विवाद की जड़ पहले हाफ के 30वें मिनट में उस समय पड़ी जब मेसी ने पीछे से अल्जीरियाई डिफेंडर और कप्तान आइसा मांडी की पिंडली पर स्टड्स के साथ जोरदार चुनौती दी। पोलिश रेफरी शाइमन मार्चिनियाक, जिन्होंने 2022 का फाइनल भी संचालित किया था, ने इस टैकल पर कोई कार्ड नहीं दिखाया और वीडियो असिस्टेंट रेफरी (वीएआर) ने भी हस्तक्षेप नहीं किया। उस समय अर्जेंटीना 1-0 से आगे था और मेसी मैदान पर बने रहकर बाद में दो और गोल करने में सफल रहे। अल्जीरियाई खेमे ने इसे सीधे लाल कार्ड की चूक माना, जिससे पूरे मैच की दिशा प्रभावित हो सकती थी।
अल्जीरियाई फुटबॉल महासंघ (एफएएफ) ने मैच के अगले ही दिन फीफा के पास औपचारिक शिकायत दर्ज कराई, जिसमें ‘रेफरी अन्याय’ का आरोप लगाया गया। शिकायत में मेसी के टैकल के अलावा अर्जेंटीना के मिडफील्डर एलेक्सिस मैक एलिस्टर द्वारा इब्राहिम माजा और अनीस हज मूसा पर कथित कोहनी प्रहारों को भी शामिल किया गया, जिन पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं हुई। एफएएफ सूत्रों ने एएफपी को बताया कि “हम यह नहीं कह रहे कि अर्जेंटीना की टीम मजबूत नहीं थी, लेकिन हम अन्याय पर चुप नहीं रह सकते।” हालांकि, संघ ने स्पष्ट किया कि वह परिणाम बदलने की उम्मीद नहीं कर रहा, बल्कि रेफरी आयोग से निर्णयों के मूल्यांकन की मांग कर रहा है।
इस घटनाक्रम ने विभिन्न महाद्वीपों से प्रतिक्रियाएं खींची हैं। दक्षिण अफ्रीका के कोच ह्यूगो ब्रूस ने अपने खिलाड़ी थेम्बा ज्वाने को मिले तीन मैचों के प्रतिबंध की तुलना करते हुए सजा में असमानता पर सवाल उठाया। जर्मनी के पूर्व बुंडेसलीगा रेफरी पैट्रिक इट्रिच ने मैगेंटा टीवी पर कहा कि उनके अनुसार यह लाल कार्ड का मामला था। वहीं फीफा के नियमों के अनुच्छेद 9.6 के तहत खेल से जुड़े तथ्यों पर रेफरी के फैसले अंतिम और अपील-रहित होते हैं, जिससे शिकायत का व्यावहारिक प्रभाव सीमित रहने की संभावना है। सोशल मीडिया पर भी बहस तेज रही, जहां कुछ प्रशंसकों ने स्टार खिलाड़ी होने के कारण मेसी को मिली ढील पर सवाल उठाए, जबकि एक अल्जीरियाई परिवार में मेसी की जर्सी पहने बच्चे के अर्जेंटीना के गोलों पर जश्न मनाने का वीडियो वायरल होकर मेसी की वैश्विक अपील का प्रतीक बन गया।
अब दोनों टीमों का ध्यान ग्रुप जे के अगले मुकाबलों पर है। अर्जेंटीना सोमवार को डलास में ऑस्ट्रिया से भिड़ेगा, जहां जीत से उसकी नॉकआउट चरण की राह लगभग तय हो जाएगी। अल्जीरिया को उसी दिन सैन फ्रांसिस्को में जॉर्डन के खिलाफ जीत की सख्त जरूरत है, ताकि 2014 के बाद दूसरी बार अंतिम-16 में पहुंचने की उम्मीदें जीवित रखी जा सकें।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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अर्जेंटीना की 3-0 की शानदार जीत और मेसी की हैट्रिक मुख्य कहानी है; अल्जीरिया की शिकायत को ध्यान भटकाने का एक निरर्थक प्रयास माना जा रहा है। विवादास्पद रेफरी निर्णय एकतरफा मैच की सच्चाई को नहीं बदलते।
मेसी को स्टड्स-अप चुनौती के लिए लाल कार्ड से बच निकलना अल्जीरिया की शिकायत का केंद्र है। फीफा में औपचारिक विरोध एक रेफरी त्रुटि को उजागर करता है जो मैच का रुख बदल सकती थी।
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