
ईरान-अमेरिका वार्ता: 60 दिनों में समझौते का रोडमैप, लेबनान में तनाव कम करने पर सहमति
पाकिस्तान-क़तर की मध्यस्थता में हुई पहली बैठक में दोनों पक्षों ने युद्ध समाप्ति, आर्थिक प्रतिबंधों में ढील और होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित आवागमन के लिए तंत्र पर सहमति जताई।
स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में हुई ईरान और अमेरिका के बीच पहली उच्च-स्तरीय वार्ता सोमवार को संपन्न हुई, जिसमें पाकिस्तान और क़तर की मध्यस्थता में 60 दिनों के भीतर युद्ध समाप्ति के लिए एक निश्चित समझौते तक पहुँचने का रोडमैप तय किया गया। संयुक्त विज्ञप्ति के अनुसार, दोनों पक्ष लेबनान में सैन्य अभियानों को रोकने के लिए एक "डी-कंफ्लिक्शन सेल" (तनाव-न्यूनीकरण प्रकोष्ठ) बनाने पर सहमत हुए, जिसमें लेबनान सरकार भी शामिल होगी। साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए एक "संचार लाइन" स्थापित करने और शेष सप्ताह तकनीकी वार्ता जारी रखने पर भी सहमति बनी।
वार्ता के दौरान तल्ख़ बयानबाजी का दौर भी चला। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान को लेबनान में हिज़बुल्लाह के ज़रिए "समस्या पैदा करने" से तुरंत रोकने की चेतावनी दी, अन्यथा "पहले से भी कड़ी" सैन्य कार्रवाई की धमकी दी। इस पर ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाक़र क़ालीबाफ़ ने करारा जवाब देते हुए कहा कि ईरानी सेना "दूसरे तरीक़े से जवाब देने के लिए तैयार है।" हालाँकि, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची के नेतृत्व वाली टीम के बीच करीब 80 मिनट तक चर्चा चली और बाद में अराग़ची ने "बड़ी प्रगति" की घोषणा की।
समझौते के तात्कालिक आर्थिक और सामरिक पहलू भी सामने आए हैं। ईरानी विदेश मंत्री के अनुसार, ईरानी तेल और पेट्रोरसायन निर्यात पर से प्रतिबंध हटा लिए गए हैं, कुछ जब्त संपत्तियाँ मुक्त कर दी गई हैं और एक बड़ी पुनर्निर्माण योजना शुरू की गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य में संचार व्यवस्था से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को स्थिरता मिलने की उम्मीद है, क्योंकि इस मार्ग से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है। लेबनान में तनाव-न्यूनीकरण प्रकोष्ठ का गठन अभी भी अनिश्चित है, क्योंकि इज़राइल हिज़बुल्लाह के ख़िलाफ़ कार्रवाई की स्वतंत्रता पर ज़ोर देता रहा है और हिज़बुल्लाह इज़राइली वापसी के बिना संघर्ष रोकने को तैयार नहीं है।
ग़ौरतलब है कि पिछले 28 फ़रवरी को इज़राइल और अमेरिकी हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई की मौत के बाद यह युद्ध शुरू हुआ, जिसमें 2 मार्च को हिज़बुल्लाह भी शामिल हो गया। अब तक हज़ारों लोग मारे जा चुके हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था हिल चुकी है। पाकिस्तान और क़तर की मध्यस्थता में यह वार्ता दक्षिण एशिया के लिए भी अहम है, क्योंकि पाकिस्तान की सक्रिय भूमिका क्षेत्रीय कूटनीति में उसकी स्थिति को मज़बूत करती है, और भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों के लिए खाड़ी में स्थिरता अति-आवश्यक है। अब तकनीकी वार्ताएँ स्विट्जरलैंड में पूरे सप्ताह जारी रहेंगी, और उच्च-स्तरीय समिति समय-समय पर रिपोर्ट करेगी; अगले 60 दिनों में अंतिम समझौते पर दस्तख़त की उम्मीद है।
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स्विट्जरलैंड के बर्गनस्टॉक में पहली उच्च-स्तरीय वार्ता संपन्न हुई, जिसमें 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते के लिए एक रोडमैप पर सहमति बनी। लेबनान में युद्धविराम सुनिश्चित करने के लिए एक समन्वय प्रकोष्ठ भी स्थापित किया जाएगा। मध्यस्थ कतर और पाकिस्तान ने इसकी घोषणा की।
ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका ने 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते पर पहुंचने का प्रयास करने के लिए एक रोडमैप तय किया है, जिससे मध्य पूर्व संघर्ष समाप्त होगा। लेबनान में सैन्य अभियानों को रोकने की गारंटी के लिए एक संघर्ष समाधान समूह पर भी सहमति बनी। मध्यस्थ कतर और पाकिस्तान ने संयुक्त वक्तव्य जारी किया।
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