
उत्तरी इज़राइल से सैन्य पाबंदियाँ हटीं, लेकिन नेतन्याहू का लेबनान में बने रहने का संकल्प; हिज़्बुल्लाह ने दी टकराव की चेतावनी
युद्धविराम के बाद इज़राइल ने सीमावर्ती इलाकों में सार्वजनिक गतिविधियों पर लगे प्रतिबंध हटा लिए, जबकि प्रधानमंत्री ने दक्षिणी लेबनान में सैन्य उपस्थिति बनाए रखने और ईरान को परमाणु हथियार से रोकने की कसम दोहराई।
इज़राइल ने सोमवार सुबह उत्तरी सीमा से लगे सभी समुदायों पर लागू सार्वजनिक सुरक्षा प्रतिबंधों को हटा लिया, जो पिछले ढाई वर्षों से हिज़्बुल्लाह के साथ संघर्ष के कारण लगाए गए थे। इज़राइली रक्षा बलों (आईडीएफ) के अनुसार, यह निर्णय स्थिति के आकलन के बाद लिया गया। संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (यूनिफिल) के एक सूत्र ने बताया कि रविवार को इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच कोई हमला दर्ज नहीं किया गया, जो 2 मार्च के बाद पहली बार हुआ। इस बीच, इज़राइली सूत्रों के अनुसार, इस सप्ताह दक्षिणी लेबनान के कुछ हिस्सों से इज़राइली सेना की वापसी पर बातचीत शुरू होने वाली है, जिसमें 'पायलट ज़ोन' पर विशेष लेबनानी नियंत्रण स्थापित करने पर चर्चा होगी।
हालांकि, इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को स्पष्ट किया कि सेना दक्षिणी लेबनान में स्थापित सुरक्षा क्षेत्र में 'जब तक आवश्यक हो' बनी रहेगी, ताकि उत्तरी इज़राइल के नागरिकों की रक्षा की जा सके। इज़राइली सैन्य प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल इयाल ज़मीर ने दक्षिणी लेबनान में सैनिकों से मुलाकात के दौरान कहा कि हिज़्बुल्लाह को 'गंभीर और महत्वपूर्ण झटका' लगा है और वह 'बहुत कठिन स्थिति' में है, लेकिन युद्धविराम 'नाज़ुक' है और युद्ध संचालन फिर से शुरू होने की तैयारी बनाए रखनी होगी। नेतन्याहू ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में यह भी दोहराया कि जब तक वह प्रधानमंत्री हैं, ईरान परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा, चाहे अमेरिका-ईरान वार्ता का कोई भी परिणाम हो। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी वायुसेना के साथ मिलकर किए गए हवाई हमलों ने ईरान के परमाणु ढाँचे को नष्ट कर दिया और ईरानी शासन के पतन की परिस्थितियाँ बना दीं।
दूसरी ओर, हिज़्बुल्लाह के महासचिव नईम कासिम ने रविवार को कहा कि इज़राइल को लेबनान छोड़ना ही होगा और समूह किसी भी उल्लंघन का सामना करेगा। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड से संबद्ध तस्नीम समाचार एजेंसी के अनुसार, कासिम ने इज़राइली सैनिकों के लिए दक्षिणी लेबनान में 'कोई सुरक्षित क्षेत्र नहीं' होने की बात कही और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नेतन्याहू के 'कब्ज़े' का समर्थन करने के प्रति आगाह किया। लेबनानी सेना ने निवासियों से सीमावर्ती गाँवों में लौटने में देरी करने की अपील की, क्योंकि इज़राइली उल्लंघनों और हमलों का ख़तरा बना हुआ है। हिज़्बुल्लाह से जुड़े एक लेबनानी सांसद ने राज्य के हथियारों पर एकाधिकार की माँग करने वालों की आलोचना करते हुए कहा कि 'प्रतिरोध और हमारे हथियार बने रहेंगे'।
यह गतिरोध अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्ज़रलैंड में चल रही वार्ता की पृष्ठभूमि में है, जहाँ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए हैं, जिसमें लेबनान में युद्धविराम भी शामिल है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अगर लेबनान में इज़राइली सैन्य कार्रवाइयाँ नहीं रुकतीं तो वह व्यापक परमाणु समझौते पर बातचीत आगे नहीं बढ़ाएगा। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 2 मार्च से अब तक इज़राइली हमलों में 4,100 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल हैं। क्षेत्रीय विश्लेषकों का मानना है कि इस संघर्ष के लंबा खिंचने से खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति और भारतीय प्रवासी समुदाय की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है, क्योंकि पश्चिम एशिया में अस्थिरता का सीधा असर दक्षिण एशिया की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ता है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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नेतन्याहू झूठे सुरक्षा बहानों के तहत दक्षिणी लेबनान के कब्जे पर अड़े हैं। हिजबुल्लाह प्रतिरोध के रूप में युद्धविराम के किसी भी उल्लंघन का सामना करने की शपथ लेता है। इजरायल की सैन्य उपस्थिति को लगातार आक्रामकता के रूप में निंदा की जाती है।
हिजबुल्लाह का नेता इजरायली सेना की वापसी की मांग करता है और इजरायली सैनिकों के लिए किसी सुरक्षित क्षेत्र की चेतावनी देता है। इजरायल जोर देता है कि वह जब तक आवश्यक होगा, दक्षिण में सुरक्षा उपस्थिति बनाए रखेगा। कथा हिजबुल्लाह के आक्रामक रुख और इजरायल की रक्षात्मक जरूरतों को रेखांकित करती है।
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