
दक्षिण लेबनान में 'सुरक्षा क्षेत्र' पर इज़राइल का अडिग रुख, वाशिंगटन वार्ता से पहले प्रतीकात्मक वापसी के संकेत
अमेरिका की मध्यस्थता में होने वाली इज़राइल-लेबनान वार्ता से ठीक पहले, इज़राइली नेतृत्व ने दक्षिण लेबनान में अपनी सैन्य उपस्थिति बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है, जबकि सीमित वापसी और रक्षात्मक अभियानों के आदेश की खबरें भी सामने आई हैं।
इज़राइल-लेबनान सीमा पर तनाव के बीच, प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू, रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ और सेना प्रमुख इयाल ज़मीर ने एक संयुक्त बयान में स्पष्ट किया कि इज़राइली सेना दक्षिण लेबनान में 'सुरक्षा क्षेत्र' बनाए रखेगी और सैनिकों व उत्तरी इज़राइल के निवासियों के लिए किसी भी प्रत्यक्ष या उभरते खतरे को विफल करने की 'पूर्ण स्वतंत्रता' रखती है। नेतन्याहू ने कहा कि सेना पर कोई प्रतिबंध नहीं है और यह क्षेत्र में तब तक बनी रहेगी जब तक नागरिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक हो। इसके विपरीत, द न्यूयॉर्क टाइम्स ने इज़राइली अधिकारियों के हवाले से बताया कि सेना को केवल आत्मरक्षात्मक कार्रवाई तक सीमित रहने और बिना उच्च अनुमति के आक्रामक कदम न उठाने के आदेश दिए गए हैं। सीएनएन ने एक इज़राइली स्रोत के हवाले से यह भी बताया कि इस सप्ताह वाशिंगटन में होने वाली वार्ता से पहले इज़राइल कुछ कम महत्वपूर्ण क्षेत्रों से 'प्रतीकात्मक' वापसी पर विचार कर रहा है, हालांकि रक्षा मंत्री काट्ज़ ने बोफोर्ट किले से पीछे हटने से इनकार किया है।
वाशिंगटन की कूटनीतिक पहल के तहत, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से अपने लेबनानी प्रॉक्सी को तुरंत तनाव भड़काने से रोकने को कहा, जबकि उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने ज़ोर दिया कि अमेरिका हिज़्बुल्लाह को निरस्त्र करने के लिए एक तंत्र स्थापित कर रहा है और इज़राइल की सुरक्षा तथा लेबनान की संप्रभुता दोनों सुनिश्चित करना चाहता है। अमेरिका और ईरान के बीच 18 जून को हस्ताक्षरित 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन में सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों की स्थायी समाप्ति और लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की प्रतिबद्धता शामिल है। इसी कड़ी में कतर और पाकिस्तान की संयुक्त विज्ञप्ति के अनुसार, एक 'डी-एस्केलेशन सेल' का गठन किया गया है जिसमें लेबनान भी शामिल है और जिसका उद्देश्य लेबनान में सैन्य कार्रवाई रोकने की प्रतिबद्धता सुनिश्चित करना है।
इज़राइली मीडिया में प्रकाशित विश्लेषण इस कूटनीतिक ढाँचे और इज़राइल की सुरक्षा चिंताओं के बीच एक बड़ा अंतर रेखांकित करते हैं। जेरूसलम पोस्ट के संपादकीय के अनुसार, समझौता ज्ञापन में हिज़्बुल्लाह को निरस्त्र करने या उसकी सैन्य क्षमता के पुनर्निर्माण को रोकने का कोई ठोस तंत्र नहीं है, और न ही यह गारंटी देता है कि युद्धविराम के बाद उत्तरी इज़राइल पर हमले फिर शुरू नहीं होंगे। हाल ही में कफ़र तबनीत गाँव में हिज़्बुल्लाह द्वारा इज़राइली टैंक पर किए गए हमले में चार सैनिकों की मौत को इज़राइली विश्लेषक इस बात का प्रमाण मानते हैं कि उत्तरी सीमा पर खतरा अब भी सक्रिय है। इस बीच, इज़राइली चैनल 12 ने बताया कि वार्ता में इज़राइल लेबनानी सेना को कफ़र तबनीत में हिज़्बुल्लाह की सुरंगों का नियंत्रण सौंपने का प्रस्ताव रख सकता है, जिसे लेबनानी सेना की क्षमता की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।
ये घटनाक्रम एक ऐसे समय में हो रहे हैं जब अमेरिका-ईरान विशेषज्ञ वार्ता स्विट्ज़रलैंड में जारी है और 60-दिवसीय संक्रमण काल की रूपरेखा तय की जा रही है। इज़राइली कैबिनेट की बैठक गुरुवार को ईरान और लेबनान के मुद्दों पर होने वाली है। वाशिंगटन में इज़राइल-लेबनान वार्ता का परिणाम यह तय करेगा कि क्या कूटनीतिक मार्ग इज़राइल की सुरक्षा माँगों और अमेरिकी-ईरानी समझौते के बीच सामंजस्य स्थापित कर पाता है, या दक्षिण लेबनान में इज़राइल की सैन्य उपस्थिति एक स्थायी वास्तविकता बन जाती है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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इज़राइल दक्षिण लेबनान में अपनी सेना बनाए रखने पर ज़ोर देता है, इसे सुरक्षा क्षेत्र बताता है, और सेना को बिना किसी रोक-टोक के ख़तरों को ख़त्म करने की पूरी आज़ादी देता है। बातचीत की पूर्व संध्या पर यह घोषणा कूटनीतिक पहलों की अस्वीकृति और कब्ज़े की निरंतरता के रूप में देखी जाती है।
इज़राइल को हिज़्बुल्लाह से लगातार ख़तरों का सामना करना पड़ रहा है, जैसा कि उसके सैनिकों पर एक घातक हमले से साबित हुआ। दक्षिण लेबनान में बफ़र ज़ोन और अप्रतिबंधित सैन्य कार्रवाई सुरक्षा के लिए ज़रूरी है। हालाँकि वाशिंगटन वार्ता के लिए प्रतीकात्मक वापसी पर विचार किया जा रहा है, लेकिन सर्वोच्च प्राथमिकता इज़राइली नागरिकों की सुरक्षा बनी हुई है, और वापसी की कोई समय-सीमा नहीं है।
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