
हीट डोम की चपेट में विश्व कप: 46 डिग्री तापमान के बीच खिलाड़ी तड़पे, मैचों की लय बिगड़ी
अमेरिका और कनाडा के मध्य-पश्चिम से पूर्वी तट तक फैली भीषण हीट डोम ने नॉकआउट मुकाबलों को सुस्त बना दिया, जिससे फीफा को जबरन वॉटर ब्रेक देना पड़ा और कई शहरों में हीट अलर्ट जारी हुआ।
टोरंटो के बीएमओ फील्ड पर पुर्तगाल और क्रोएशिया के बीच राउंड ऑफ 32 का मुकाबला शुरू हुआ तो पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार था, और रात ढलने के बाद भी राहत नहीं मिली। यह सिर्फ एक मैच की कहानी नहीं थी; पूरे पूर्वी और मध्य अमेरिका पर एक विशाल ‘हीट डोम’ हावी था, जिसने कैनसस सिटी, फिलाडेल्फिया और ईस्ट रदरफोर्ड जैसे मेज़बान शहरों को अपनी चपेट में ले लिया। अमेरिकी राष्ट्रीय मौसम सेवा के अनुसार, यह उच्च दबाव का ऐसा क्षेत्र था जो गर्मी और नमी को हफ्तों तक कैद कर सकता है, जिससे तापमान 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया और ‘फील्स लाइक’ इंडेक्स 110 डिग्री फारेनहाइट को छूने लगा।
मैदान पर इसका सीधा असर खिलाड़ियों की रफ्तार पर पड़ा। एक्यूवेदर के वरिष्ठ मौसम विज्ञानी एलन रेपर्ट ने बताया कि न्यूयॉर्क में 2013 के बाद सबसे अधिक तापमान दर्ज किया गया, और सूरज ढलने के बाद भी गर्मी बरकरार रही। मियामी में अर्जेंटीना और केप वर्डे के बीच हुए प्री-क्वार्टर फाइनल में पारा 32 डिग्री तक रहा, लेकिन उमस और आंधी की आशंका ने माहौल को और चुनौतीपूर्ण बना दिया। फीफा ने सभी मैचों में प्रत्येक हाफ के दौरान तीन मिनट का अनिवार्य वॉटर ब्रेक लागू किया, जिसे खिलाड़ी संघ फिफप्रो ने पिछले साल क्लब विश्व कप के दौरान उठाई गई सुरक्षा चिंताओं के बाद जरूरी कदम बताया, हालांकि आलोचकों ने इसे खेल की लय बिगाड़ने वाला बताया।
प्रशंसकों के लिए हालात और भी मुश्किल थे। कनाडा के पर्यावरण मंत्रालय ने टोरंटो में मंगलवार से शुक्रवार तक हीट वार्निंग जारी की, जिसके बाद शहर ने अपनी ‘हीट रिलीफ स्ट्रैटेजी’ सक्रिय की। न्यू जर्सी के हैकनसैक यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर की आपातकालीन चिकित्सक अलीना मितिना ने छाया और पानी की उपलब्धता को जीवनरक्षक बताया, जबकि अमेरिकी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ने चक्कर आने, पसीना न आने और भ्रम की स्थिति को हीट स्ट्रोक के लक्षण बताते हुए तुरंत चिकित्सा सहायता लेने की सलाह दी। अटलांटा, डलास और ह्यूस्टन के वापस लिए जा सकने वाले छत वाले वातानुकूलित स्टेडियमों ने कुछ राहत दी, लेकिन डलास जैसे कंक्रीट-अस्फाल्ट वाले शहरों में स्टेडियम तक पैदल चलना अंगारों पर चलने जैसा अनुभव बन गया।
इस चरम मौसम के पीछे जलवायु परिवर्तन की भूमिका को भी रेखांकित किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि मानव-जनित कारणों ने हीट डोम की संभावना को 150 गुना बढ़ा दिया है, और विकसित हो रहा ‘गॉडजिला’ अल नीनो पैटर्न वैश्विक स्तर पर खतरनाक गर्मी को तीव्र कर रहा है। अमेरिका में हर साल गर्मी से लगभग 2,000 मौतें होती हैं, जो इसे तूफान और बाढ़ से भी बड़ा मौसम-संबंधी हत्यारा बनाती है।
अब निगाहें 4 जुलाई के स्वतंत्रता दिवस सप्ताहांत पर हैं, जब वाशिंगटन डी.सी. समेत पूर्वी तट पर हीट डोम के और पूर्व की ओर खिसकने का अनुमान है। टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल इन्हीं हालात में खेले जाने हैं, और आयोजकों के सामने खिलाड़ियों की सुरक्षा और प्रशंसकों के उत्साह के बीच संतुलन बनाने की चुनौती बनी हुई है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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4 जुलाई के सप्ताहांत में एक खतरनाक हीट डोम 25 करोड़ अमेरिकियों को प्रभावित करेगा, तापमान 100°F से ऊपर और उमस भारी होगी। मानव-जनित जलवायु परिवर्तन ने ऐसी घटनाओं की संभावना 150 गुना बढ़ा दी है। विश्व कप इस रिकॉर्ड-तोड़ गर्मी की लहर से प्रभावित कई आयोजनों में से एक है।
विश्व कप पर भीषण गर्मी की लहर का प्रकोप, 'हीट डोम' के तहत तापमान 46°C तक पहुँच रहा है। अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस सप्ताहांत के साथ इसका समय विडंबना पैदा करता है, 2022 विश्व कप में गर्मी को लेकर कतर की आलोचना की याद दिलाता है। फीफा द्वारा पानी के ब्रेक अनिवार्य किए जाने के बीच प्रशंसक और खिलाड़ी दमघोंटू स्थितियों का सामना कर रहे हैं।
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