
साप्ताहिक गिरावट के बीच शुक्रवार को सोने में तेजी; ईरान समझौते और मुद्रास्फीति पर टिकी नजरें
अमेरिका-ईरान युद्धविराम की उम्मीदों से शुक्रवार को सोना 3% चढ़ा, लेकिन सप्ताहभर में 2.3% गिरावट; विशेषज्ञों को मुद्रास्फीति बनी रहने और कीमतें $4,000 से नीचे जाने की आशंका।
वैश्विक सोना बाजार में शुक्रवार को राहत भरी तेजी देखी गई, जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए समझौते की खबरों ने जोर पकड़ा। न्यूयॉर्क कमोडिटी एक्सचेंज पर अगस्त डिलीवरी वायदा 3% उछलकर 4,238.80 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। हालांकि, यह उछाल साप्ताहिक गिरावट को नहीं रोक सका—हफ्तेभर में सोना लगभग 2.3% टूटा और लगातार दूसरी बार नुकसान में रहा। इस उलटफेर के पीछे भू-राजनीतिक घटनाक्रम और केंद्रीय बैंकों की सख्त नीतियों का मिला-जुला असर रहा।
यूरोपीय और अमेरिकी विश्लेषकों का मानना है कि असली खेल मुद्रास्फीति के इर्द-गिर्द घूम रहा है। क्वांटिटेटिव कमोडिटी रिसर्च के पीटर फर्टिग के अनुसार, बाजार मान रहा है कि यूरोपीय सेंट्रल बैंक और फेडरल रिजर्व ब्याज दरें बढ़ाने की राह पर बने रहेंगे। ज़ैनर मेटल्स के उपाध्यक्ष पीटर ग्रांट का कहना है कि अगर तेल की कीमतें नीचे भी आती हैं, तब भी मुद्रास्फीति कुछ समय तक बनी रहेगी। उन्होंने संकेत दिया कि ऊंची ब्याज दरें बिना ब्याज वाली सोने की चमक को फीका कर रही हैं, और यही दबाव पिछले कई हफ्तों से बना हुआ है।
पश्चिम एशिया से आ रही परस्पर विरोधी खबरों ने स्थिति को और पेचीदा बना दिया है। एक पश्चिमी सूत्र के हवाले से कहा गया कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता ज्ञापन रविवार तक हो सकता है, लेकिन ईरान की फ़ार्स समाचार एजेंसी ने इन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। इस असमंजस ने तेल की कीमतों में 3% से अधिक की गिरावट ला दी, फिर भी भू-राजनीतिक अनिश्चितता सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में सहारा देती रही। यदि समझौता टूटता है, तो सोने में फिर तेजी लौट सकती है।
दक्षिण एशिया, खासकर भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए, सोने की कीमतों में गिरावट त्योहारी सीजन की मांग को बढ़ावा दे सकती है। हालांकि, वैश्विक ब्याज दरों का रुख और डॉलर की मजबूती घरेलू कीमतों को सीधे प्रभावित करेगी। विश्लेषकों ने आगाह किया है कि अगर मुद्रास्फीति में तेजी आई, तो सोना 4,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर को तोड़ सकता है, जो लंबी अवधि के निवेशकों के लिए नई चुनौती पेश करेगा। फिलहाल बाजार की निगाहें आगामी केंद्रीय बैंक बैठकों और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर टिकी हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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शुक्रवार को सोने का वायदा 3% बढ़कर 4,238.80 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जिसे अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीदों से बल मिला। दैनिक लाभ के बावजूद, सप्ताह के अंत में कीमत में गिरावट आई क्योंकि अमेरिकी ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना ने इसकी चमक कम कर दी। बाजार मौद्रिक नीति के संकेतों और बिना प्रतिफल वाली परिसंपत्तियों पर उनके प्रभाव पर केंद्रित है।
अमेरिका-ईरान युद्ध समाप्त करने के समझौते की उम्मीदों से सोने की कीमतों में अस्थायी वृद्धि हुई, लेकिन साप्ताहिक रुझान नकारात्मक बना रहा। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि तेल की कीमतें गिरने पर भी मुद्रास्फीति बनी रहेगी, और बाजार ईसीबी और फेडरल रिजर्व से और दर वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं। संघर्ष को ईरान पर थोपे गए युद्ध के रूप में चित्रित किया गया है, जो पीड़ित भावना को रेखांकित करता है जबकि व्यापक आर्थिक दबावों को स्वीकार करता है।
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