
तेहरान बाजार में तूफानी तेजी, इंडोनेशिया भी चमका; क्या वैश्विक उभरते बाजारों के लिए नई उड़ान?
ईरान-अमेरिका समझौते की उम्मीद से तेहरान शेयर सूचकांक 2.12% उछला, जबकि इंडोनेशिया का आईएचएसजी साप्ताहिक 7.38% चढ़ा, जो बदलती भू-राजनीतिक धारणा का संकेत है।
तेहरान स्टॉक एक्सचेंज में शनिवार 23 खोरदाद (13 जून 2026) का कारोबारी सत्र निवेशकों के अभूतपूर्व उत्साह का गवाह बना। मुख्य सूचकांक टेडपिक्स 97,464 अंकों की जबरदस्त छलांग लगाकर 46.9 लाख इकाई के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो 2.12 प्रतिशत की दैनिक बढ़त दर्शाता है। उसी दिन समान भार वाला सूचकांक भी 2.22 प्रतिशत चढ़ा, जिससे साफ हो गया कि खरीदारी का यह ज्वार केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मझोले और छोटे शेयरों ने भी जोरदार प्रदर्शन किया। बाजार विशेषज्ञ इस उछाल का श्रेय ईरान और अमेरिका के बीच राजनीतिक सहमति बनने की बढ़ती उम्मीदों को दे रहे हैं। पिछले सप्ताह भी बाजार में मजबूती रही थी, जिसमें कुल सूचकांक 5.4 प्रतिशत और हमवजन सूचकांक 6.3 प्रतिशत उछला था। कारोबारियों के अनुसार, केवल राजनीतिक जोखिम घटने से ही नहीं, बल्कि पहले से आकर्षक मूल्यांकन और मुद्रा नीति में बदलाव से कंपनियों की बेहतर आमदनी ने भी बुनियादी मजबूती प्रदान की थी।
दूसरी ओर, दक्षिण-पूर्व एशिया का एक और उभरता बाजार इंडोनेशिया भी चमका। जकार्ता कम्पोजिट इंडेक्स (आईएचएसजी) ने 8-12 जून के सप्ताह में 7.38 प्रतिशत की भारी तेजी दर्ज करते हुए 6,007.656 का स्तर छू लिया। इंडोनेशिया स्टॉक एक्सचेंज के अनुसार, बाजार पूंजीकरण 7.31 प्रतिशत बढ़कर 10,524 ट्रिलियन रुपये पर पहुंच गया और सौदों की औसत आवृत्ति में भी इजाफा हुआ। हालांकि इंडोनेशियाई रिपोर्ट में उछाल का कोई ठोस कारण नहीं बताया गया, लेकिन इसकी अवधि और पैमाना ईरान-अमेरिका वार्ता की सकारात्मक खबरों से मेल खाता है, जिससे संकेत मिलता है कि भू-राजनीतिक तनाव में कमी का असर सीमित क्षेत्र से परे वैश्विक उभरते बाजारों पर भी पड़ा है।
भारत और दक्षिण एशिया के लिए यह परिदृश्य कई मायनों में अहम है। भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे बड़े तेल आयातक देश लंबे समय से खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता पर निर्भर रहे हैं। ईरान-अमेरिका संबंधों में नरमी से कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव घट सकता है और आपूर्ति श्रृंखला का जोखिम कम हो सकता है। हालांकि भारतीय बाजार अभी घरेलू कारकों पर केंद्रित हैं, भू-राजनीतिक जोखिम का प्रीमियम घटने से विदेशी पोर्टफोलियो निवेश एशियाई बाजारों की ओर मुड़ सकता है, जिसका सकारात्मक असर मुंबई, ढाका और कराची सभी पर संभव है।
आगे का रास्ता इस बात पर टिका होगा कि क्या राजनयिक उम्मीदें ठोस समझौते में बदलती हैं। तेहरान के विशेषज्ञों की राय में, यदि वार्ता में बाधा आई तो बाजार की तेजी फुसफुसाहट में बदल सकती है, लेकिन यदि प्रतिबंधों में ढील मिली तो विदेशी निवेश की बाढ़ परिसंपत्तियों का पुनर्मूल्यांकन कर सकती है। इंडोनेशिया और अन्य एशियाई उभरते बाजारों के लिए यह राहत रैली तभी टिकाऊ साबित होगी जब वैश्विक वृद्धि और व्यापार की बुनियादी स्थितियां मजबूत रहें। कुल मिलाकर, ईरान-अमेरिका संबंधों में एक गर्माहट पूरे मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया की जोखिम प्रोफाइल को नीचे ला सकती है, जिसके दीर्घकालिक प्रभाव व्यापार गलियारों, ऊर्जा सुरक्षा और निवेश प्रवाह पर पड़ना तय है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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ईरान और अमेरिका के बीच राजनीतिक समझौते की संभावना तेहरान शेयर बाजार में अभूतपूर्व उत्साह की लहर पैदा कर रही है। मुख्य सूचकांक एक ही दिन में 2% से अधिक उछलकर 4.7 मिलियन अंक के प्रतीकात्मक स्तर के करीब पहुंच गया, सभी क्षेत्र हरे निशान में रहे और खुदरा निवेशकों का रिकॉर्ड पैसा विशेष रूप से बैंकिंग और ऑटो शेयरों में आया।
इंडोनेशिया का बेंचमार्क आईएचएसजी सूचकांक 7.38% की वृद्धि के साथ 6,000 के स्तर को पार करते हुए एक असाधारण सप्ताह बंद करता है। इस तेजी को केंद्रीय बैंक की दर वृद्धि और बेहतर होते घरेलू आर्थिक माहौल के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जाता है, अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनावों से कोई स्पष्ट संबंध नहीं जोड़ा गया।
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