
अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय गर्व और लोकतांत्रिक चिंता का द्वंद्व
वाशिंगटन में भव्य आतिशबाजी के बीच, सर्वेक्षण बता रहे हैं कि दो-तिहाई नागरिक लोकतंत्र की मजबूती को लेकर आशंकित हैं और हर पांच में से एक उत्सव से दूरी बना रहा है।
संयुक्त राज्य अमेरिका ने शनिवार को अपनी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ मनाई, जिसके केंद्र में वाशिंगटन डी.सी. का नेशनल मॉल रहा। व्हाइट हाउस ने इसे 'इतिहास का सबसे बड़ा आतिशबाजी प्रदर्शन' बताते हुए राष्ट्रीय एकता का संदेश देने का प्रयास किया, लेकिन गैलप और अन्य सर्वेक्षणों के अनुसार, अमेरिकी नागरिकों में देशभक्ति की भावना ऐतिहासिक निम्न स्तर पर है। लगभग 20 प्रतिशत लोगों ने स्पष्ट किया कि वे इस वर्ष कोई सार्वजनिक उत्सव नहीं मनाएंगे, जबकि दो-तिहाई से अधिक नागरिकों ने लोकतांत्रिक संस्थाओं के क्षरण की आशंका जताई।
यूरोपीय और लातिन अमेरिकी मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, राजधानी में आयोजित 'ग्रेट अमेरिकन स्टेट फेयर' में अपेक्षित भीड़ नहीं जुटी और कई संगीतकारों ने कार्यक्रम से हाथ खींच लिया। इतालवी पत्रिका ल'एस्प्रेसो ने इतिहासकार एलन टेलर के हवाले से लिखा कि राष्ट्रपति का आचरण पिछले ढाई सौ वर्षों में बनी राजनीतिक मर्यादाओं के विपरीत है। ऑस्ट्रेलियाई समाचार पत्र सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड के संपादकीय ने इस आयोजन को 'आत्म-प्रशंसा में लिपटा' बताया और वाशिंगटन के लिंकन मेमोरियल रिफ्लेक्टिंग पूल में शैवाल और उखड़ते पेंट को प्रतीकात्मक बताया।
प्रशासन के समर्थकों ने अवैध आप्रवासन में भारी गिरावट को बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया, हालांकि यूरोपीय रिपोर्टों में आईसीई की हिंसक छापों की कीमत पर मिली इस सफलता का उल्लेख किया गया। कोलंबियाई समाचार पत्र एल एस्पेक्टाडोर ने मेले के धार्मिक मंडपों का वर्णन करते हुए बताया कि वहां केवल ईसाई धर्म को स्थान दिया गया और गर्भपात विरोधी प्रचार के साथ कोविड-19 को सरकारी नियंत्रण की साजिश बताने वाली पुस्तकें प्रदर्शित की गईं। इसी पत्र ने यह भी रेखांकित किया कि संस्थापकों ने ईश्वर का उल्लेख तो किया था, पर वे आज के ईसाई राष्ट्रवाद के उभार को शायद ही स्वीकार करते।
मैक्सिकन वित्तीय दैनिक एल फिनानसिएरो ने स्वतंत्रता की घोषणा के आदर्शों—सभी मनुष्यों की समानता और जीवन, स्वतंत्रता व खुशी की तलाश के अधिकार—को याद करते हुए लिखा कि यह प्रयोग विश्व इतिहास में सबसे सफल रहा, लेकिन साथ ही येल की इतिहासकार बेवर्ली गेज की पुस्तक का हवाला देते हुए कहा कि बिना अंतर्विरोधों का सामना किए इस यात्रा को नहीं समझा जा सकता। वाशिंगटन में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती और न्याय विभाग की इमारत पर राष्ट्रपति के विशाल चित्र वाले बैनर ने, जैसा कि एल एस्पेक्टाडोर ने रेखांकित किया, राजधानी के निवासियों में 'आक्रमण' की भावना पैदा कर दी।
यह द्विवार्षिकी समारोह ऐसे समय में हुआ जब राजनीतिक हिंसा और ध्रुवीकरण आम बातचीत का हिस्सा बन चुके हैं। वैश्विक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह आयोजन अमेरिकी लोकतंत्र की मौजूदा दशा पर एक केंद्रित बहस को जन्म देगा। अगले कदम के रूप में, कांग्रेस में कार्यकारी आदेशों की सीमा तय करने वाले विधेयक पर बहस अपेक्षित है, जबकि नागरिक समाज समूह 'नो किंग्स' जैसे आंदोलनों के माध्यम से संस्थागत संतुलन की मांग कर रहे हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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The 250th anniversary of the United States arrives amid internal reflection: patriotism hits record lows and debates on democratic health intensify. The narrative focuses on institutional challenges without yielding to triumphalism.
The US 250th anniversary is overshadowed by record-low patriotism and a democracy in crisis. Social divisions and political polarization are highlighted, underscoring the failure of the American model.
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