
वैश्विक तेल कीमतों में गिरावट, लेकिन आम उपभोक्ता को राहत नहीं
कच्चे तेल के दाम चार माह के न्यूनतम स्तर पर आ गए हैं, मगर इटली, भारत और अर्जेंटीना में पेट्रोल-डीज़ल की खुदरा कीमतें स्थानीय कारणों से ऊंची बनी हुई हैं।
वैश्विक बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें तेज़ी से नीचे आई हैं। अमेरिका-ईरान समझौते के बाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति बहाल होने और पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से ब्रेंट क्रूड 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया है। इसके बावजूद, भारतीय उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीज़ल पर तत्काल कोई राहत नहीं मिल रही। सरकारी तेल कंपनियाँ अभी भी संकट के दौरान खरीदे गए महँगे कच्चे तेल का प्रसंस्करण कर रही हैं, जिससे खुदरा दाम स्थिर बने हुए हैं। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय कीमतें स्थिर रहीं तो भविष्य में कटौती संभव है, पर अभी नहीं।
दूसरी ओर, इटली में सरकार ने ऊर्जा संकट के दौरान दी गई उत्पाद शुल्क (एक्साइज़) में छूट को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। 4 जुलाई से पेट्रोल और डीज़ल पर करीब 6.1 सेंट प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है, जिससे एक पूरा टैंक भरने पर लगभग 3 यूरो का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। सरकार का तर्क है कि आपातकालीन राहत अब ज़रूरी नहीं, क्योंकि तेल बाज़ार सामान्य हो रहा है। हालाँकि, इस कदम का सीधा असर गर्मियों की छुट्टियों में सफर करने वाले लाखों इटालियन परिवारों और ट्रांसपोर्टरों पर पड़ेगा।
अर्जेंटीना में स्थिति और भी जटिल है। वहाँ ईंधन की कीमतें प्रांत और ब्रांड के अनुसार व्यापक रूप से भिन्न हैं। 5 जुलाई के आँकड़ों के मुताबिक, नेउक्वेन प्रांत में शेल पर साधारण पेट्रोल 962 पेसो प्रति लीटर है, जबकि कोरिएंटेस में प्यूमा पर यही 2030 पेसो तक है। यह अंतर अंतरराष्ट्रीय क्रूड कीमतों, डॉलर की विनिमय दर और आंतरिक करों के मिश्रित प्रभाव को दर्शाता है, जिससे उपभोक्ताओं के लिए कीमतों का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है।
खाड़ी देशों और भारत के बीच हवाई यात्रा पर भी ऊँचे किरायों का दबाव बना हुआ है। उड़ानें धीरे-धीरे बहाल हो रही हैं, लेकिन गर्मियों की छुट्टियों और स्कूल वेकेशन की वजह से माँग चरम पर है, खासकर दक्षिण भारतीय रूटों पर। ट्रैवल एजेंटों का कहना है कि सितंबर से पहले किराए में नरमी की उम्मीद नहीं है, क्योंकि एयरलाइंस पिछले नुकसान की भरपाई में लगी हैं। अगस्त के लिए दुबई-हैदराबाद रिटर्न टिकट 9250 दिरहम तक पहुँच चुका है।
आगे की राह इस बात पर निर्भर करेगी कि वैश्विक तेल कीमतों में गिरावट कितनी टिकाऊ साबित होती है। भारत में यदि क्रूड के दाम स्थिर रहे तो सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियाँ आने वाले महीनों में खुदरा मूल्य घटा सकती हैं। इटली का कदम अन्य यूरोपीय देशों के लिए भी संकेत हो सकता है कि ऊर्जा सब्सिडी का दौर खत्म हो रहा है। अर्जेंटीना और खाड़ी-भारत हवाई बाज़ार में स्थानीय कारक ही निर्णायक रहेंगे।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
2 संपादकीय समूह · 1 भाषाएँ
Fuel prices in Argentina vary by province, influenced by international crude costs, exchange rates, and taxes. The Energy Secretariat provides daily reference values. There is no direct link to the drop in crude oil.
In Italy, the end of the government's excise duty discount raises petrol and diesel prices by about 6 cents per litre. This increase cancels out the benefit from the oil price drop, returning costs to previous levels. The measure is presented as a return to normal after an extraordinary intervention.
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
अली ख़ामेनेई का सप्ताहव्यापी अंतिम संस्कार शुरू: ईरान की शक्ति प्रदर्शन की कोशिश, नए नेतृत्व पर सवाल
7 भाषाएँ · 30 स्रोत
Economy & Markets सेवैश्विक ऑटो बाजार में दोहरी चाल: इंडोनेशिया में नीतिगत अनिश्चितता, ब्राजील और रूस में मजबूत वृद्धि
4 भाषाएँ · 10 स्रोत
Technology सेएंथ्रोपिक की चीनी पहुंच पर रोक के बीच अलीबाबा ने क्लॉड कोड पर प्रतिबंध लगाया
4 भाषाएँ · 4 स्रोत