
बेलारूस के स्वतंत्रता दिवस पर पुतिन और ट्रंप का दोहरा संदेश, लुकाशेंको ने 32 कैदियों को किया क्षमा
रूस और अमेरिका दोनों ने मिन्स्क को बधाई दी, जबकि राष्ट्रपति लुकाशेंको ने राजनीतिक बंदियों सहित 32 लोगों को रिहा करने का आदेश दिया और सैन्य भर्ती नियमों में बदलाव के संकेत मिले।
बेलारूस के स्वतंत्रता दिवस (3 जुलाई) पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अलग-अलग बधाई संदेश भेजे, जो मिन्स्क की मॉस्को और वाशिंगटन के साथ एक साथ जारी कूटनीतिक सक्रियता को रेखांकित करता है। क्रेमलिन की वेबसाइट पर प्रकाशित टेलीग्राम में पुतिन ने इस अवसर को दोनों देशों के साझा इतिहास — नाज़ी कब्जे से मिन्स्क की मुक्ति — से जोड़ा और “भाईचारे की मित्रता व पारस्परिक सहायता” को मौजूदा गठबंधन संबंधों की नींव बताया। वहीं, व्हाइट हाउस की ओर से जारी ट्रंप के संदेश में बेलारूस के लोगों के लिए शांति और समृद्धि की कामना की गई तथा भविष्य में मुलाकात की उम्मीद जताई गई।
रूसी पक्ष ने अपने संदेश में सोयूज़ राज्य के संस्थागत ढांचे को मज़बूत करने और बाहरी ख़तरों के ख़िलाफ़ समन्वित प्रयासों पर ज़ोर दिया। पुतिन ने कहा कि दोनों देश सभी क्षेत्रों में फलदायी सहयोग कर रहे हैं और वैध हितों की रक्षा करते हुए किसी भी परीक्षा का सामना कर सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के संदेश में ठोस नीतिगत बातें नहीं थीं, लेकिन यह पिछले कुछ महीनों में हुई क़ैदियों की रिहाई की कड़ी में आया। दिसंबर 2025 में लुकाशेंको ने 123 राजनीतिक बंदियों को क्षमा किया था, जिसे अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील से जोड़कर देखा गया; मार्च 2026 में 250 और लोग रिहा हुए। मई में ट्रंप ने कुछ और बंदियों की रिहाई के लिए मिन्स्क के साथ सहमति की घोषणा की थी।
इसी क्रम में, स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर लुकाशेंको ने 32 लोगों को क्षमा करने के आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिनमें 28 को “अतिवादी अपराधों” का दोषी ठहराया गया था — बेलारूसी अधिकारी इस शब्द का प्रयोग राजनीतिक बंदियों के लिए करते हैं। बीबीसी रूसी सेवा की रिपोर्ट के अनुसार, ये सभी रिहा लोग बेलारूस में ही रहेंगे और उनकी आवाजाही व अभिव्यक्ति पर प्रतिबंध रहेगा। विपक्षी नेता स्वेतलाना तिखानोव्स्काया के सलाहकार फ़्रानक व्याचोर्का ने बताया कि रिहाई के दो अलग-अलग रास्ते हैं: अमेरिकी वार्ता के ज़रिए बड़े और ख़तरनाक माने जाने वाले क़ैदी देश छोड़ देते हैं, जबकि तिथियों पर होने वाली क्षमादान प्रक्रिया में लोग बेलारूस में ही सीमित स्वतंत्रता के साथ रहते हैं। इसके अलावा, बेलारूसी सैन्य भर्ती कार्यालयों ने 27 वर्ष से अधिक आयु के उन पुरुषों को पुनः चिकित्सा जाँच के लिए बुलाना शुरू कर दिया है जिन्हें पहले शांतिकाल में सेवा के लिए अयोग्य घोषित किया गया था, जिससे भविष्य में सैन्य प्रशिक्षण के लिए बुलाए जाने की संभावना बढ़ गई है।
बेलारूस का स्वतंत्रता दिवस 1997 से 3 जुलाई को मनाया जाता है, जो 1944 में लाल सेना द्वारा मिन्स्क की मुक्ति का प्रतीक है, न कि सोवियत संघ से अलगाव का। यह तारीख़ रूस के साथ साझा सैन्य विरासत को रेखांकित करती है; 2024 की 80वीं वर्षगांठ पर हुए सैन्य परेड में रूस, चीन, कज़ाकिस्तान, किर्गिज़स्तान, ताजिकिस्तान, उज़्बेकिस्तान और अज़रबैजान की टुकड़ियाँ शामिल हुई थीं। वहीं, लुकाशेंको के पुत्र निकोलाई ने पेकिंग विश्वविद्यालय से जैवप्रौद्योगिकी में डिप्लोमा प्राप्त किया, जिसके अवसर पर स्वयं लुकाशेंको ने विश्वविद्यालय प्रबंधन से मुलाकात कर व्यावहारिक-उन्मुख कार्यक्रमों को गहरा करने की इच्छा जताई, जो बेलारूस-चीन संबंधों के बढ़ते आयाम को दर्शाता है। दक्षिण एशियाई रणनीतिक विशेषेषज्ञों के अनुसार, बेलारूस का रूस, अमेरिका और चीन के बीच यह संतुलन भारत जैसे देशों के लिए भी प्रासंगिक है, जो स्वयं मॉस्को और वाशिंगटन दोनों के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए हुए हैं। फ़िलहाल, अमेरिकी-बेलारूसी क़ैदी रिहाई वार्ता जारी है और ट्रंप ने भविष्य में लुकाशेंको से मुलाकात की संभावना जताई है, जबकि लुकाशेंको ने अमेरिका-रूस संबंधों में मध्यस्थता का प्रस्ताव रखा है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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बेलारूस के स्वतंत्रता दिवस पर, राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति ट्रम्प दोनों ने लुकाशेंको को बधाई संदेश भेजे। पुतिन के टेलीग्राम में फासीवाद पर साझा जीत और उस स्थायी भाईचारे पर जोर दिया गया जो दोनों देशों को बाहरी खतरों का सामना करने में मदद करता है। वहीं, ट्रम्प के संदेश ने भविष्य में मुलाकात की इच्छा व्यक्त की, जो एक संभावित कूटनीतिक पहल का संकेत है।
जहाँ लुकाशेंको को विदेशों से औपचारिक शुभकामनाएँ मिलीं, वहीं बेलारूस में सप्ताह के वास्तविक घटनाक्रम ने एक गहरी तस्वीर पेश की। राजनीतिक बंदियों के लिए एक नई क्षमा याचिका की घोषणा की गई, लेकिन आलोचकों का कहना है कि रिहा किए गए लोग राज्य की निगरानी में रहते हैं। इस बीच, अधिकारियों ने पहले सेवा के लिए अयोग्य ठहराए गए पुरुषों की भर्ती शुरू कर दी, और एक यूक्रेनी नागरिक को बिना आरोपों के हिरासत में रखा गया है, जो शासन की दमनकारी मशीनरी को रेखांकित करता है।
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