
52,000 करोड़ की रक्षा खरीद को मंजूरी, भारत-जापान सहयोग पर चीन की आपत्ति
रक्षा अधिग्रहण परिषद ने स्वदेशी मिसाइलों, ड्रोन रोधी प्रणालियों और कामिकेज़ ड्रोन समेत बड़े सौदों को सैद्धांतिक मंजूरी दी, वहीं जापान के साथ बढ़ते रक्षा संबंधों पर बीजिंग ने चिंता जताई।
भारत की रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने शुक्रवार को सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए लगभग 52,000 करोड़ रुपये (6.3 अरब डॉलर) के सैन्य उपकरणों की खरीद को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इनमें ड्रोन रोधी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली ‘आकाश तरंग’, मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (एमपीएटीजीएम), मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (एमआरएसएएम), वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (वी-शोरैड), टैंकों के लिए सक्रिय सुरक्षा प्रणाली, जेट-आधारित कामिकेज़ ड्रोन, नौसेना के लिए मल्टी-इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइन और शिपबोर्न ड्रोन, तथा वायुसेना के लिए फिक्स्ड-विंग हाई एल्टीट्यूड स्यूडो सैटेलाइट (एफडब्ल्यू-एचएपीएस) शामिल हैं। यह मंजूरी खरीद प्रक्रिया का पहला चरण है और इसके बाद अनुबंध वार्ता व टेंडर जारी किए जाएंगे।
इस फैसले को ऐसे समय में लिया गया जब भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग गहराने पर चीन ने आपत्ति दर्ज की। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि देशों के बीच सहयोग “किसी तीसरे पक्ष को निशाना न बनाए और न ही किसी तीसरे पक्ष के हितों को नुकसान पहुंचाए।” यह बयान जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की भारत यात्रा के ठीक बाद आया, जिसमें दोनों देशों ने जापान की यूनिकॉर्न नौसैनिक स्टील्थ प्रणाली के सह-उत्पादन, महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं में सहयोग और आर्थिक साझेदारी ढांचे पर सहमति बनाई। जापानी प्रधानमंत्री ने “अर्थव्यवस्था के हथियारीकरण” का हवाला देते हुए कहा कि दोनों देश गैर-बाजार नीतियों की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
दक्षिण एशियाई परिप्रेक्ष्य में, भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारेक रहमान की हालिया चीन यात्रा पर कहा कि भारत पड़ोसी देशों की गतिविधियों पर करीबी नजर रखता है और समय आने पर आवश्यक कदम उठाता है। बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, इस यात्रा के दौरान चीन ने बांग्लादेश-म्यांमार-चीन आर्थिक गलियारे का प्रस्ताव रखा और जे-10सी लड़ाकू विमानों की संभावित खरीद पर चर्चा हुई, हालांकि ढाका ने अभी तक कोई औपचारिक रुख नहीं अपनाया है। भारत ने तीस्ता नदी परियोजना पर अपने रुख से बांग्लादेश को अवगत करा दिया है और कहा है कि द्विपक्षीय रोडमैप की नियमित समीक्षा होती है।
रक्षा विशेषज्ञों के हवाले से भारतीय मीडिया में आए विश्लेषण बताते हैं कि डीएसी की मंजूरी भारत की रूस पर निर्भरता कम करने और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने की दीर्घकालिक रणनीति के अनुरूप है। पिछले वर्ष पाकिस्तान के साथ चार दिवसीय संघर्ष और हिंद महासागर में चीन की बढ़ती उपस्थिति ने नौसेना के आधुनिकीकरण की जरूरत को और रेखांकित किया है। भारत का मौजूदा रक्षा बजट 85 अरब डॉलर है और दिसंबर में कम से कम 75 जंगी जहाजों व पनडुब्बियों के ऑर्डर दिए जा चुके हैं।
इस बीच, भारत और जापान ने 2027 को ‘साझा क्षितिज वर्ष’ के रूप में मनाने की घोषणा की है, जिसमें क्रिकेट मैच, एनीमे-मांगा सहयोग और बौद्ध सर्किट पर्यटन जैसे कार्यक्रम शामिल होंगे। डीएसी द्वारा मंजूर खरीद प्रस्ताव अब औपचारिक अनुबंध प्रक्रिया में प्रवेश करेंगे, जबकि बांग्लादेश चीन के आर्थिक गलियारे के प्रस्ताव की जांच कर रहा है और जापान के साथ यूनिकॉर्न प्रणाली का सह-उत्पादन जल्द शुरू होने की उम्मीद है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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India and Japan are strengthening their defense ties as a natural step for regional stability. China's warning against bloc thinking is seen as an attempt to limit India's strategic autonomy. The cooperation is pragmatic and not directed against any country.
The India-Japan defense cooperation is a development in the Indo-Pacific security landscape. China's warning reflects its concern over emerging alliances. The Gulf states observe these dynamics with a focus on their own security interests.
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