
लगार्ड ने ईसीबी प्रमुख पद से समय पूर्व इस्तीफे का रास्ता खोला, फ्रांसीसी चुनाव में यूरोपीय आवाज़ बनने की इच्छा जताई
यूरोपीय सेंट्रल बैंक की अध्यक्ष क्रिस्टीन लगार्ड ने पहली बार स्वीकार किया कि अक्टूबर 2027 में कार्यकाल समाप्ति से पहले पद छोड़ना “संभव” है, बशर्ते मूल्य स्थिरता सुनिश्चित हो और फ्रांस के राष्ट्रपति चुनावी विमर्श में एक यूरोपीय परिप्रेक्ष्य की आवश्यकता हो।
यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) की अध्यक्ष क्रिस्टीन लगार्ड ने फ्रांसीसी आर्थिक दैनिक ‘लेस एको’ को दिए साक्षात्कार में कहा कि उनका पद छोड़ना “संभव” है, यदि यूरोज़ोन में मूल्य स्थिरता सुनिश्चित हो और फ्रांस के राष्ट्रपति चुनावी विमर्श में “एक यूरोपीय आवाज़” की ज़रूरत महसूस हो। यह बयान इस वर्ष के आरंभ में उनके उस रुख़ से भिन्न है, जब उन्होंने कहा था कि “तूफ़ान में कप्तान जहाज़ नहीं छोड़ता” और अपना कार्यकाल पूरा करना ही उनका “आधार परिदृश्य” है। लगार्ड का कार्यकाल 31 अक्टूबर 2027 को समाप्त होना है, जबकि फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव उसी वर्ष अप्रैल-मई में होने हैं।
फ्रांसीसी राजनीतिक हलकों से जुड़े सूत्रों के अनुसार, लगार्ड का यह संकेत ऐसे समय आया है जब राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों लगातार तीसरी बार चुनाव नहीं लड़ सकते और दक्षिणपंथी विपक्ष के सत्ता में आने की प्रबल संभावना है। यूरोपीय संघ के संस्थागत स्रोत बताते हैं कि ब्रसेल्स में पहले से ही इस बात पर चर्चा थी कि यदि लगार्ड 2027 के चुनाव से पहले इस्तीफ़ा देती हैं, तो मैक्रों और जर्मन चांसलर फ़्रीडरिष मेर्ट्ज़ मिलकर ईसीबी प्रमुख का उत्तराधिकारी नियुक्त कर सकते हैं, ताकि किसी नवनिर्वाचित दक्षिणपंथी फ्रांसीसी राष्ट्रपति को इस नियुक्ति में हस्तक्षेप का अवसर न मिले।
लगार्ड ने स्पष्ट किया कि फ़िलहाल किसी उम्मीदवार का समर्थन करना या स्वयं चुनाव लड़ना उनके “एजेंडे में नहीं” है, लेकिन वे संभावित प्रत्याशियों से संवाद के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि वे “फ्रांसीसी और यूरोपीय, दोनों आवाज़ों” के साथ यह समझाना चाहेंगी कि यूरोपीय परिवेश और लंगर के बिना फ्रांस की आर्थिक संभावनाएं “कम से कम अनिश्चित” होंगी। जर्मन कूटनीतिक स्रोतों के हवाले से यह भी संकेत मिले हैं कि बर्लिन ईसीबी नेतृत्व में निरंतरता चाहता है, लेकिन मध्य-पूर्व संघर्ष के कारण बढ़ी ऊर्जा कीमतों और मुद्रास्फीति के दबाव के बीच किसी भी नेतृत्व परिवर्तन को स्थिरता के लिए जोखिम के रूप में देखा जा रहा है।
दक्षिण एशियाई परिप्रेक्ष्य से, ईसीबी के शीर्ष पर संभावित परिवर्तन का महत्व मौद्रिक नीति की दिशा से जुड़ा है। भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व अधिकारियों का मानना है कि यदि लगार्ड के स्थान पर अधिक मुद्रास्फीति-विरोधी रुख वाला नेतृत्व आता है, तो यूरोज़ोन में ब्याज दरें ऊंची बनी रह सकती हैं, जिसका असर वैश्विक पूंजी प्रवाह और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्रा स्थिरता पर पड़ सकता है। हालांकि, फ़िलहाल यह मामला प्रारंभिक चरण में है और लगार्ड ने कोई औपचारिक इस्तीफ़ा नहीं दिया है।
ईसीबी अध्यक्ष का पद आठ वर्ष के लिए होता है और इसका नवीनीकरण नहीं होता। यूरोपीय संघ की संस्थागत प्रक्रिया के अनुसार, अगले जनवरी में होने वाली ‘मिडटर्म’ समीक्षा के दौरान शीर्ष पदों पर नियुक्तियों पर चर्चा होगी। फ्रांसीसी राष्ट्रपति चुनाव अप्रैल 2027 में होने हैं, और लगार्ड का कार्यकाल अक्टूबर 2027 में समाप्त होगा। इस बीच, ईसीबी की आगामी मौद्रिक नीति बैठकों में ब्याज दरों पर निर्णय इस पूरे प्रकरण की पृष्ठभूमि में लिए जाएंगे।
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