
अमेरिका-ईरान युद्धविराम से तेल बाजार में राहत, हॉर्मुज खुलने से कीमतों में गिरावट
अमेरिका और ईरान के बीच हस्ताक्षरित अंतरिम समझौते ने 100 दिनों के युद्ध के बाद हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल दिया, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे बड़ा संकट समाप्त हुआ और कच्चे तेल की कीमतें लगातार गिर रही हैं।
गुरुवार सुबह वैश्विक तेल बाजारों में राहत की लहर दौड़ गई जब अमेरिका और ईरान ने एक अंतरिम शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिससे फरवरी 2026 से जारी युद्ध का अंत हुआ और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का मार्ग प्रशस्त हुआ। ब्रेंट क्रूड वायदा 89 सेंट या 1.12 प्रतिशत गिरकर 78.66 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 98 सेंट या 1.28 प्रतिशत की गिरावट के साथ 75.81 डॉलर पर पहुंच गया। यह गिरावट बुधवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान पर दोबारा बमबारी की धमकी के बाद आई तेजी को पूरी तरह पलट गई। विश्लेषकों के अनुसार, बाजार ने ईरानी तेल की अपेक्षा से अधिक तेज वापसी की संभावना को आक्रामक रूप से कीमतों में शामिल कर लिया है।
14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन वर्साय में जी7 शिखर सम्मेलन के बाद हस्ताक्षरित हुआ, जिसके तहत 60 दिनों की बातचीत अवधि शुरू होगी। इस दौरान ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य से बिना शुल्क के मुक्त आवागमन की अनुमति देगा, और 30 दिनों के भीतर यातायात को पूरी क्षमता पर बहाल करने का लक्ष्य है। समझौते में तेहरान के तेल निर्यात पर अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने का भी प्रावधान है, जिससे इतिहास के सबसे बड़े ऊर्जा आपूर्ति व्यवधान का समाधान निकलने की उम्मीद है। हालांकि, कारोबारी माहौल में सतर्कता बनी रही क्योंकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नए प्रमुख ने अपनी पहली नीति बैठक में लगातार ऊंची कीमतों को अमेरिकी जनता के लिए बोझ बताते हुए वर्ष के अंत से पहले ब्याज दरों में बढ़ोतरी का संकेत दिया।
भारत और दक्षिण एशिया के आयात-निर्भर देशों के लिए तेल की कीमतों में यह गिरावट राहत लेकर आई है, क्योंकि इससे महंगाई और सब्सिडी के बोझ में कमी आने की संभावना है। दक्षिण-पूर्व एशियाई बाजारों, खासकर इंडोनेशिया में भी इस कदम का स्वागत किया गया, जहां ऊर्जा लागत घरेलू अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है। अरब जगत की प्रतिक्रिया में हॉर्मुज की भौगोलिक अहमियत केंद्र में रही—यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल और गैस शिपिंग का प्रमुख मार्ग है, और इसके दोबारा खुलने से क्षेत्रीय स्थिरता की उम्मीद बढ़ी है। अफ्रीकी महाद्वीप से भी इस समझौते को वैश्विक तेल प्रवाह सामान्य होने के संकेत के रूप में देखा गया, हालांकि वहां के बाजार मुद्रास्फीति और मौद्रिक नीति के मिले-जुले प्रभावों पर नजर रखे हुए हैं।
आगे की राह आसान नहीं दिखती। आईजी के विश्लेषक टोनी साइकामोर ने चेताया कि ईरानी बैरलों की वापसी की गति को लेकर बाजार पहले ही आक्रामक रुख अपना चुका है, लेकिन निकट भविष्य में आपूर्ति सीमित रह सकती है। 60 दिनों की बातचीत की अवधि और ट्रंप की 'अगर ईरानी नेताओं ने अच्छा व्यवहार नहीं किया तो सैन्य कार्रवाई फिर शुरू करने' की चेतावनी भू-राजनीतिक जोखिम को जिंदा रखती है। साथ ही, फेड की संभावित दर वृद्धि से ऊर्जा मांग प्रभावित हो सकती है। ऐसे में तेल की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी रह सकता है, लेकिन स्थायी शांति और पूर्ण आपूर्ति बहाली पर अभी सवालिया निशान लगे हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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अमेरिका-ईरान अंतरिम समझौते के बाद तेल बाजार अनिश्चितता में डोल गए। राष्ट्रपति ट्रम्प की चेतावनी कि समझौता 'अंतिम नहीं है' और बमबारी फिर शुरू हो सकती है, ने व्यापारियों को सतर्क रखा। कीमतों में संक्षिप्त उछाल फीका पड़ गया, और बाजार शांति की नाजुकता पर केंद्रित हो गया।
अमेरिका-ईरान समझौते ने खाड़ी में स्थायी शांति की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। होरमुज के फिर से खुलने, प्रतिबंध हटने और ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर लगाम लगने से तेल की कीमतों से युद्ध प्रीमियम निकल गया है। इस समझौते को क्षेत्रीय स्थिरता और पुनर्निर्माण का मार्ग बताया जा रहा है, हालांकि ब्याज दरों को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
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