
सऊदी फुटबॉल प्रमुख का इस्तीफा: विश्व कप से बाहर होने के बाद जिम्मेदारी स्वीकार
यासर अल-मिसहल ने ग्रुप चरण में टीम के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद पद छोड़ा, जहाँ सऊदी अरब महज दो अंक लेकर अंतिम स्थान पर रहा।
सऊदी अरब के विश्व कप सफर का अंत एक शांत ड्रॉ के साथ हुआ, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया। केप वर्ड के खिलाफ गोलरहित मुकाबले ने ‘ग्रीन फाल्कंस’ को ग्रुप एच में सबसे निचले पायदान पर पहुँचा दिया, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी ने पहली बार नॉकआउट में जगह बनाई। इसके कुछ ही घंटों बाद, महासंघ अध्यक्ष यासर अल-मिसहल ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी कर अपने सात साल के कार्यकाल को समाप्त करने की घोषणा की। उन्होंने लिखा, “राष्ट्रीय टीम का अगले दौर में न पहुँचना हमारी सभी महत्वाकांक्षाओं से कम है, मैं इसकी पूरी जिम्मेदारी लेता हूँ।”
टूर्नामेंट की शुरुआत उम्मीद जगाने वाली रही थी जब सऊदी अरब ने उरुग्वे को 1-1 की बराबरी पर रोका। लेकिन स्पेन के खिलाफ 0-4 की करारी हार ने सारे समीकरण बदल दिए। केप वर्ड के सामने जीत अनिवार्य थी, मगर टीम एक भी गोल नहीं कर सकी और पूरे ग्रुप में सिर्फ दो अंक ही जुटा पाई। यह लगातार तीसरा और कुल सातवाँ विश्व कप था, फिर भी 1994 के बाद पहली बार नॉकआउट में पहुँचने का सपना एक बार फिर अधूरा रह गया।
यह निराशा ऐसे समय आई जब सऊदी फुटबॉल अभूतपूर्व निवेश के दौर से गुज़र रहा है। घरेलू लीग में क्रिस्टियानो रोनाल्डो, करीम बेंज़ेमा और नेमार जैसे सितारे खेल रहे हैं, और देश 2027 एशियाई कप तथा 2034 विश्व कप की मेज़बानी की तैयारी कर रहा है। अल-मिसहल खुद 2034 की मेज़बानी हासिल करने में अहम भूमिका निभा चुके थे। लेकिन टूर्नामेंट से ठीक पहले कोच हर्वे रेनार को हटाकर जॉर्जियोस डोनिस को लाने का फैसला भारी पड़ा—टीम को नई रणनीति में ढलने का समय ही नहीं मिला।
एशियाई फुटबॉल के लिए यह विश्व कप मिला-जुला रहा है। नौ में से सात एशियाई टीमें ग्रुप चरण से बाहर हो चुकी हैं, केवल जापान और ऑस्ट्रेलिया ही आगे बढ़ पाए हैं। सऊदी अरब का जल्दी बाहर होना इस क्षेत्र के लिए एक और झटका है, खासकर तब जब ईरान भी एक विवादास्पद ड्रॉ के चलते बाहर हुआ। अल-मिसहल के इस्तीफे ने इस बात को रेखांकित किया कि महँगे निवेश और बुनियादी ढाँचे के बावजूद, मैदान पर नतीजे अब भी सबसे बड़ी कसौटी हैं।
अब सऊदी फुटबॉल महासंघ नए अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करेगा। अगला बड़ा पड़ाव 2027 एशियाई कप है, जिसकी मेज़बानी सऊदी अरब को ही करनी है। नई अगुआई के सामने चुनौती होगी कि घरेलू सरज़मीं पर टीम को उस स्तर तक पहुँचाया जाए जिसकी उम्मीद प्रशंसक और निवेशक दोनों कर रहे हैं।
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सऊदी फुटबॉल महासंघ के अध्यक्ष ने विश्व कप से जल्दी बाहर होने के बाद इस्तीफा दे दिया। टीम उरुग्वे और केप वर्डे के साथ ड्रॉ और स्पेन से हार के बाद दो अंकों के साथ ग्रुप में सबसे नीचे रही। अधिकारी ने कहा कि वह पूरी जिम्मेदारी लेते हैं, माफी मांगते हैं और अपना कार्यकाल पूरा नहीं करेंगे।
सऊदी फुटबॉल के शीर्ष अधिकारी ने विश्व कप की विफलता के बाद पद छोड़ दिया। केवल दो अंकों और ग्रुप में अंतिम स्थान के साथ, राष्ट्रीय टीम आगे नहीं बढ़ सकी। अध्यक्ष ने कहा कि परिणाम महत्वाकांक्षाओं से कम रहा, पूरी जिम्मेदारी ली और अलग हटने का फैसला किया।
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