
चीन का दोहरा तकनीकी धमाका: सबसे तेज़ सुपरकंप्यूटर और छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान का आधिकारिक इशारा
अमेरिकी चिप प्रतिबंधों के बीच चीन ने स्वदेशी प्रोसेसर वाला दुनिया का सबसे शक्तिशाली सुपरकंप्यूटर स्थापित किया और सैन्य मीडिया में पहली बार अगली पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर की मौजूदगी स्वीकारी।
चीन ने एक साथ दो मोर्चों पर तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया है। टॉप500 सूची में लाइनशाइन नामक सुपरकंप्यूटर 2.198 एक्साफ्लॉप्स की प्रसंस्करण गति के साथ दुनिया का सबसे तेज़ सिस्टम बन गया, जिसने अमेरिकी एल कैपिटन को पीछे छोड़ दिया। वहीं, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के आधिकारिक मीडिया चाइना मिलिट्री ब्यूगल ने वाई-20 परिवहन विमान की दसवीं वर्षगांठ पर जारी एक वीडियो में ‘लिटिल सिक्स’ उपनाम से छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान की धुंधली तस्वीर दिखाई, जो इस कार्यक्रम की पहली अप्रत्यक्ष आधिकारिक स्वीकृति है।
चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, लाइनशाइन पूरी तरह स्वदेशी एलएक्स2 प्रोसेसर और लिंगकी इंटरकनेक्ट पर आधारित है, जिसमें ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट का उपयोग नहीं किया गया। यह पहला सीपीयू-आधारित सिस्टम है जिसने दो एक्साफ्लॉप्स की सीमा पार की। पश्चिमी प्रौद्योगिकी विश्लेषकों का आकलन है कि यह उपलब्धि अमेरिकी चिप निर्यात प्रतिबंधों के बीच चीन की स्वदेशी उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग क्षमता को रेखांकित करती है, हालांकि यह सुपरकंप्यूटर मुख्यतः जलवायु मॉडलिंग, भौतिकी और इंजीनियरिंग सिमुलेशन के लिए डिज़ाइन किया गया है, न कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता कार्यों के लिए, जहाँ जीपीयू-युक्त प्रणालियाँ अभी भी आगे हैं।
सैन्य विमानन से जुड़े अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के अनुसार, वीडियो में ईंधन भरने वाले संवाद के साथ बिना पूँछ वाले विमान की झलक यह संकेत देती है कि चेंगदू और शेनयांग की परियोजनाओं के तहत विकसित हो रहे छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान अब उड़ान-भर के दौरान ईंधन भरने की क्षमता के परीक्षण के चरण में हैं। रूसी सैन्य प्रेक्षकों ने जे-36 प्रोटोटाइप के तीखे मोड़ वाले युद्धाभ्यास पर ध्यान दिया, जो बिना क्षैतिज स्टेबलाइज़र के भी उच्च गतिशीलता सिद्ध करता है और संभवतः उन्नत फ्लाइट कंट्रोल सॉफ्टवेयर द्वारा संचालित है। चीनी टिप्पणीकारों का दावा है कि यह कार्यक्रम अमेरिकी एफ-47 परियोजना से लगभग एक दशक आगे है, और इसकी अनुमानित 4,000 किलोमीटर की युद्धक त्रिज्या, वाईवाई-20 टैंकरों के साथ मिलकर, पूर्वी और दक्षिणी प्रशांत क्षेत्र में चीन की सैन्य पहुँच को नाटकीय रूप से बढ़ा सकती है।
दक्षिण एशियाई सुरक्षा हलकों में इस बात पर चर्चा है कि इतनी लंबी मारक क्षमता वाला स्टील्थ विमान हिंद महासागर क्षेत्र में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है, जहाँ चीन की नौसैनिक उपस्थिति पहले से बढ़ रही है। इसी बीच, शेनयांग एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन की उत्पादन लाइन से जे-35 स्टील्थ फाइटर की तीसरी इकाई के दृश्य भी सामने आए हैं, जिससे चीन दो प्रकार के पाँचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों का श्रृंखलाबद्ध उत्पादन करने वाला पहला देश बन गया है। संस्थान के मुख्य विशेषज्ञ वांग योंगकिंग के हवाले से कहा गया है कि साझा अनुसंधान उपलब्धियों ने विकास लागत और समय में भारी कमी की है। फिलहाल, लाइनशाइन सुपरकंप्यूटर संचालन में आ चुका है, जबकि छठी पीढ़ी का लड़ाकू विमान उन्नत परीक्षण चरण में है और इसके 2030 के दशक की शुरुआत में सेवा में आने की उम्मीद है; अमेरिकी एफ-47 का परिचालन 2040 के दशक से पहले होने का अनुमान नहीं है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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चीन ने अमेरिका को उस समय नीचा दिखाया जब वाशिंगटन चिप प्रतिबंधों से उसका गला घोंटने की कोशिश कर रहा था, उसके सुपरकंप्यूटर को विश्व शिखर से हटाकर। छठी पीढ़ी का लड़ाकू विमान, जिसे पहली बार आधिकारिक रूप से दिखाया गया, इस बात की पुष्टि करता है कि आसमान अब बीजिंग का है और पश्चिमी तकनीकी वर्चस्व समाप्त हो गया है।
नए लड़ाकू विमान को दिखाने वाला आधिकारिक वीडियो एक संतुलित संकेत भेजता है: चीन बिना किसी दिखावे के लेकिन दृढ़ संकल्प के साथ अपनी राष्ट्रीय रक्षा को लगातार मजबूत कर रहा है। छठी पीढ़ी के विमान की क्षणिक छवि, सुपरकंप्यूटिंग रिकॉर्ड के साथ, तकनीकी आत्मनिर्भरता और दीर्घकालिक रणनीतिक परिपक्वता का मार्ग दर्शाती है।
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