
ईरानी ड्रोन हमलों पर ओमान का कड़ा विरोध, अरब लीग और अमेरिका भी सक्रिय
ओमान ने मुसंदम और अल-वुस्ता प्रांतों पर ड्रोन हमले के विरोध में ईरानी राजदूत को प्रोटेस्ट नोट सौंपा; अमेरिकी दूतावास ने सुरक्षा चेतावनी जारी की।
ओमान ने रविवार को ईरानी राजदूत मूसा फरहनक को तलब कर एक विरोध पत्र सौंपा, जिसमें मुसंदम और अल-वुस्ता प्रांतों में ड्रोन हमलों पर “गैर-जिम्मेदाराना कार्रवाई” बताते हुए नाराजगी जताई गई। ओमानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, उपमंत्री शेख खालिद बिन हाशिल अल-मुसलही ने राजदूत से मुलाकात में राष्ट्रीय संप्रभुता, अच्छे पड़ोसी संबंधों और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने के सिद्धांतों का पालन करने की जरूरत पर बल दिया। यह कूटनीतिक कदम ऐसे समय उठाया गया जब पारंपरिक रूप से मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाला ओमान पहली बार ईरानी कार्रवाई से इस तरह सीधे प्रभावित हुआ।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने इससे पहले बयान जारी कर कहा था कि अमेरिकी युद्धविराम उल्लंघन और ईरानी क्षेत्र पर हमलों के जवाब में दुक्म बंदरगाह (अल-वुस्ता) में अमेरिकी विमानवाहक पोतों के लॉजिस्टिक सपोर्ट सेंटर और ईंधन प्लेटफॉर्म को निशाना बनाया गया। हालांकि, ओमानी सरकारी मीडिया के अनुसार मुसंदम प्रांत पर भी ड्रोन गिरे, जो दुक्म से सैकड़ों किलोमीटर दूर है, जिससे लक्ष्यीकरण में भिन्नता या एक से अधिक घटनाओं की संभावना सामने आई। अरब लीग ने एक अलग बयान में ओमान के अलावा कतर, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हुए ईरानी “आक्रमणों” की कड़ी निंदा करते हुए इसे क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बताया।
इन हमलों के बीच ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की फिर घोषणा की, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है। भारत जैसे दक्षिण एशियाई देश, जो अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आयात करते हैं, इस स्थिति को करीब से देख रहे हैं। मस्कट में अमेरिकी दूतावास ने दुक्म और मुसंदम के लिए सुरक्षा चेतावनी जारी कर नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने और खिड़कियों से दूर रहने की सलाह दी है, हालांकि उसने खतरे की प्रकृति स्पष्ट नहीं की।
ओमान का यह विरोध पश्चिम और ईरान के बीच उसकी नाजुक कूटनीतिक भूमिका को चुनौती दे सकता है, पर साथ ही यह मस्कट की ओर से एक संतुलित संदेश भी है कि संप्रभुता का उल्लंघन स्वीकार नहीं होगा। फिलहाल किसी भी पक्ष ने सैन्य अभियान रोकने की घोषणा नहीं की है, और ईरान की ओर से इस विरोध पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अमेरिका और खाड़ी सहयोगी देशों की निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या तनाव में कमी के लिए कोई कूटनीतिक पहल होती है या यह टकराव और गहराता है।
| अरब खाड़ी प्रेस | −0.70 | critical |
|---|---|---|
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | −0.30 | critical |
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.10 | neutral |
Oman, as a sovereign offended state, formally protests against Iran for violations of its territorial integrity.
Oman personifies the state as a victim of irresponsible action, turning the incident into a matter of principle and international law.
Omit the US embassy's security alert and the broader regional tensions involving US-Iran proxy strikes, which could contextualize Iranian actions.
Iran, through its media, rejects the Omani protest as instrumentalized by the United States and reaffirms its position as a victim of American hostilities.
Iran shifts blame to the United States, equating the Omani protest to American interference, thereby undermining the legitimacy of the protest itself.
Omit any acknowledgment that the drone strikes may have been conducted by Iran, instead presenting them as ambiguous activities.
Atlantic media position themselves as neutral observers, reporting the facts without taking sides.
The mechanism is distancing: reporting the event without emotional or political contextualization, letting the reader draw conclusions.
Omit the US embassy security alert and any analysis of broader geopolitical implications.
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