
सीरिया की नई संसद का पहला सत्र: संविधान निर्माण और लोकतांत्रिक संक्रमण की चुनौती
राष्ट्रपति अहमद अल-शरअ की मौजूदगी में रविवार को हुए ऐतिहासिक सत्र में अब्दुल हमीद अल-अव्वाक अध्यक्ष चुने गए, जिनकी अगुवाई में संसद को नया संविधान तैयार करना है।
रविवार, 12 जुलाई 2026 को दमिश्क में सीरिया की नवगठित जनता सभा का पहला सत्र आयोजित हुआ, जो दिसंबर 2024 में बशर अल-असद शासन के पतन के बाद देश की राजनीतिक संक्रमण प्रक्रिया में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। इस सत्र में राष्ट्रपति अहमद अल-शरअ के सामने 206 सदस्यों ने शपथ ली, और 210 सदस्यीय सभा ने अब्दुल हमीद अकील अल-अव्वाक को 99 मतों से अध्यक्ष चुना गया। सीरियाई सरकारी एजेंसी सना के अनुसार, शरअ ने अपने संबोधन में इस अवसर को ‘नया इतिहास’ लिखने का क्षण बताया और सदस्यों से संवाद की संस्कृति, कानून के शासन और संस्थाओं के प्रति सम्मान सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
नई संसद की गठन प्रक्रिया पर स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय हलकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। सीरिया के नए नेतृत्व के अनुसार, संवैधानिक घोषणा (2025) के तहत पाँच वर्ष की अंतरिम अवधि के लिए बनाई गई इस सभा के दो-तिहाई सदस्य पिछले वर्ष अक्टूबर में अप्रत्यक्ष चुनावों के जरिए क्षेत्रीय निर्वाचक मंडलों द्वारा चुने गए, जबकि शेष 70 सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति ने स्वयं की। पश्चिमी पर्यवेक्षकों और मानवाधिकार समूहों ने इस प्रक्रिया को लोकतांत्रिक मानदंडों से परे बताया है; उनका कहना है कि इसमें प्रत्यक्ष जनादेश का अभाव है और सत्ता का केंद्रीकरण जारी है। संयुक्त राष्ट्र के उप विशेष दूत क्लॉदियो कोर्दोने ने इसे राजनीतिक संक्रमण का महत्वपूर्ण चरण बताते हुए राज्य संस्थाओं में विविधता का प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर जोर दिया। गौरतलब है कि दक्षिणी प्रांत स्वेदा (द्रूज बहुल) के लिए आरक्षित तीन सीटें वहाँ जारी हिंसा के कारण रिक्त पड़ी हैं, हालाँकि राष्ट्रपति ने वहाँ से दो सदस्य मनोनीत जरूर किए हैं।
क्षेत्रीय मीडिया में इस सत्र को लेकर विश्लेषण इस बात पर केंद्रित रहा कि यह दशकों के एकतरफा शासन के बाद एक अधिक समावेशी राजनीतिक ढाँचे की ओर बढ़ने का प्रयास है या पुरानी प्रवृत्तियों की निरंतरता। सीरियाई नेतृत्व का तर्क है कि युद्ध के बाद जनसंख्या विस्थापन और सटीक मतदाता सूची के अभाव में प्रत्यक्ष चुनाव कराना संभव नहीं था। अध्यक्ष अल-अव्वाक, जो एक विधि विशेषज्ञ और संवैधानिक मामलों के जानकार हैं, ने सदस्यों से सामूहिक जिम्मेदारी निभाने और विधायी प्रक्रिया को सहज बनाने की अपील की। उन्होंने संकेत दिया कि सभा शीघ्र ही एक नया आंतरिक नियमावली तैयार करेगी और 26 जुलाई 2026 तक इस पर मतदान के लिए अगली बैठक बुलाई जा सकती है।
संसद के सीमित अधिकार क्षेत्र — यह कानून प्रस्तावित और पारित कर सकती है, किंतु सरकार को विश्वास मत की आवश्यकता नहीं — और राष्ट्रपति के पास सदस्यों के एक-तिहाई हिस्से को नियुक्त करने की शक्ति जैसे प्रावधान यह संकेत देते हैं कि अंतरिम व्यवस्था में कार्यकारी शाखा का पलड़ा भारी रहेगा। विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले महीने इस बात की कसौटी होंगे कि सभा कितनी स्वायत्तता से नए स्थायी संविधान का मसौदा तैयार कर पाती है तथा देश के विभिन्न समुदायों — कुर्द, ईसाई, अलावी, द्रूज, सुन्नी — के हितों को संतुलित कर पाती है। फिलहाल, संविधान निर्माण की दिशा में पहला ठोस कदम आंतरिक नियमों और मसौदा समिति के गठन के साथ ही उठने की उम्मीद है।
| अरब खाड़ी प्रेस | +0.80 | aligned |
|---|---|---|
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | 0.00 | neutral |
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | −0.30 | critical |
We hail the first session of the transitional parliament as the dawn of a new era. President Sharaa is right: Syria writes a glorious history.
Amplifies the leader's words uncritically, creating an aura of unanimous consensus around the new course.
Omits the parliament's limited powers and transition challenges, such as lack of independence and public trust.
The parliament has met, but its powers are limited. The transition is a still-fragile process to be observed with caution.
Frames the event in institutional terms, balancing the positive fact with reservations about the new body's limits.
Omits both the triumphant rhetoric of the regime and substantive criticisms about lack of independence.
The new assembly must prove its independence and ability to gain public trust. Structural challenges remain enormous.
Adopts an analytical perspective focused on institutional shortcomings, presenting the event as a test for the new system's credibility.
Omits Sharaa's triumphant statements and the Arab press consensus on the transition's success.
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