
इजरायल में 27 अक्टूबर को आम चुनाव: नेतन्याहू के नेतृत्व की अग्निपरीक्षा
इजरायल की संसद ने 27 अक्टूबर को चुनाव की घोषणा की, जिसे प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के कार्यकाल पर जनमत संग्रह माना जा रहा है।
इजरायल में 27 अक्टूबर 2026 को आम चुनाव होंगे। संसद (कनेसेट) का वर्तमान कार्यकाल 17 जुलाई को पूरा होगा और फिर सरकार कार्यवाहक बन जाएगी। कनेसेट की कानूनी सलाहकार सागित अफिक के अनुसार, यह 1988 के बाद पहला अवसर है जब कोई सरकार अपना चार वर्ष का पूर्ण कार्यकाल पूरा कर रही है। इजरायली संसदीय सूत्रों का कहना है कि सत्तारूढ़ गठबंधन ने विघटन से पहले कई विधेयक पारित करके चुनावी स्थिति मजबूत करने की कोशिश की है। उम्मीदवारों की सूची 7 सितंबर तक जमा करनी होगी।
इजरायली चुनाव आयोग और प्रमुख मीडिया सर्वेक्षणों के अनुसार, मौजूदा गठबंधन के लिए बहुमत जुटाना चुनौतीपूर्ण है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने एक व्यापक राष्ट्रीय सरकार बनाने की इच्छा जताई है, पर उनकी सरकार को अति-रूढ़िवादी (शास और यूनाइटेड तोराह जुडाइज्म) तथा धुर-दक्षिणपंथी (ओत्ज़मा येहुदित, धार्मिक ज़ायनवाद) दलों का समर्थन प्राप्त है। विपक्षी खेमे में पूर्व सेना प्रमुख गादी आइज़नकोट की पार्टी ‘यशर’ सर्वेक्षणों में 23-24 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। नफ्ताली बेनेट और याइर लापिद ने ‘बेहायाद’ (एक साथ) गठबंधन बनाया है, जबकि अविग्दोर लीबरमैन की धर्मनिरपेक्ष राष्ट्रवादी पार्टी भी निर्णायक भूमिका में है। सर्वेक्षणों में गैर-नेतन्याहू गुट को 61 सीटों के करीब दिखाया गया है, लेकिन अरब दलों के प्रति कुछ यहूदी दलों के बहिष्कार के कारण स्पष्ट बहुमत अनिश्चित है।
पश्चिमी कूटनीतिक हलकों और इजरायली विश्लेषकों के अनुसार, चुनावी बहस के केंद्र में 7 अक्टूबर 2023 की सुरक्षा विफलता, गाज़ा व लेबनान युद्धों के परिणाम, और ईरान के साथ अप्रत्यक्ष संघर्ष हैं। अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर इजरायली जनता में असंतोष है, जिससे नेतन्याहू की ‘सुरक्षा विशेषज्ञ’ की छवि कमजोर हुई है। हिब्रू विश्वविद्यालय के एक सर्वेक्षण में 92 प्रतिशत इजरायलियों ने माना कि ईरान मध्य पूर्व युद्ध जीत गया, और नेतन्याहू के लिए समर्थन मार्च में 40.5% से गिरकर जून में 29.4% रह गया। अति-रूढ़िवादी यहूदियों की सैन्य सेवा से छूट और न्यायिक सुधार जैसे मुद्दों पर समाज में गहरा ध्रुवीकरण है। रूसी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वर्षों की राजनीतिक अस्थिरता के बाद यह चुनाव इजरायली मतदाताओं के लिए नई दिशा चुनने का अवसर हो सकता है।
क्षेत्रीय अरब विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव परिणाम फिलिस्तीनी क्षेत्रों और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को प्रभावित करेंगे। नेतन्याहू पर भ्रष्टाचार के आरोप और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय का वारंट भी चुनावी माहौल को प्रभावित कर रहा है। भारतीय विश्लेषकों के अनुसार, इजरायल की आंतरिक राजनीति पश्चिम एशिया में स्थिरता और भारत-इजरायल रणनीतिक साझेदारी को भी प्रभावित कर सकती है। चुनाव प्रचार 17 जुलाई से आरंभ होगा और 27 अक्टूबर को मतदान के बाद गठबंधन वार्ता शुरू होगी। इजरायली राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि नेतन्याहू का राजनीतिक भविष्य इस चुनाव पर टिका है, जो उनके लगभग दो दशक लंबे करियर का सबसे कठिन मुकाबला हो सकता है।
| इज़राइली प्रेस | +0.20 | neutral |
|---|---|---|
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | −0.50 | critical |
| चीनी प्रेस | −0.40 | critical |
The Netanyahu government celebrates completing a full term, a historic event that demonstrates the solidity of Israeli leadership despite challenges. The coalition prepares to compete for a new mandate, focusing on stability and experience.
Emphasizing the rarity of the full term serves to normalize Netanyahu's continued rule, turning an administrative fact into a political success.
The war in Gaza and the perception of political crisis that dominate Arab and Chinese coverage are absent or minimized.
Netanyahu faces the election burdened by war and political crisis: the voters' choice is presented as a judgment on his handling of the conflict and the country's stability.
Using the term 'referendum' turns a routine electoral deadline into a personalized vote of confidence, potentially delegitimizing a Netanyahu victory as the product of exceptional circumstances.
The historic milestone of an Israeli government finishing a full term for the first time in decades is entirely absent or downplayed.
The Israeli elections are a test for Netanyahu, with most voters desiring change. Chinese coverage observes from a distance, highlighting internal contradictions in Israeli politics.
Citing polls showing desire for change allows presenting the challenge to Netanyahu as objective and widely shared, without taking an explicit stance.
The historic milestone of a full government term and internal stability dynamics are almost entirely overlooked.
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