
टी-रेक्स ‘गस’ की 5 करोड़ डॉलर में रिकॉर्ड नीलामी, जीवाश्म बाजार में नया अध्याय
67 करोड़ वर्ष पुराने टायरानोसॉरस रेक्स के कंकाल ने सोथबी की नीलामी में अब तक का सर्वाधिक मूल्य पाकर वैज्ञानिक समुदाय में स्वामित्व और शोध पहुंच पर बहस तेज कर दी है।
न्यूयॉर्क के सोथबी नीलामी घर में मंगलवार को ‘गस’ नामक टी-रेक्स का जीवाश्म 5.01 करोड़ डॉलर (लगभग 420 करोड़ रुपये) में बिका, जो किसी डायनासोर जीवाश्म के लिए अब तक की सबसे ऊंची कीमत है। इसने 2024 में 4.46 करोड़ डॉलर में बिके स्टेगोसॉरस ‘एपेक्स’ और 2020 में 3.18 करोड़ डॉलर में बिके टी-रेक्स ‘स्टैन’ के पिछले रिकॉर्ड तोड़ दिए। दस मिनट की बोली में सात प्रतिस्पर्धियों को पछाड़कर एक अज्ञात खरीदार ने फोन पर यह राशि दी, जो पूर्व-अनुमान 2-3 करोड़ डॉलर से कहीं अधिक थी।
दक्षिण डकोटा के हार्डिंग काउंटी स्थित एक निजी रैंच पर 2021 में खोजे गए इस कंकाल की लंबाई 11.6 मीटर और ऊंचाई 3.8 मीटर है। इसमें 183 जीवाश्मित अस्थियां हैं और हड्डियों की गणना के अनुसार यह लगभग 61 प्रतिशत पूर्ण है, जो अनुमानित कुल अस्थि द्रव्यमान का 75-80 प्रतिशत दर्शाता है। खोपड़ी 82 प्रतिशत तक सुरक्षित है और उस पर काटने के निशान तथा चंगी हुई चोटें इसके जीवनकाल के संघर्षों की गवाही देती हैं। रैंच मालिक गैरी ‘गस’ लिकिंग के नाम पर रखे गए इस नमूने की खुदाई और पुनर्स्थापन में पांच वर्ष लगे।
यह बिक्री जीवाश्मों के बढ़ते व्यावसायीकरण की प्रवृत्ति को रेखांकित करती है। उत्तरी अमेरिका में निजी भूमि पर मिले जीवाश्मों को संपत्ति माना जाता है, जिससे इनकी नीलामी संभव हो पाती है। सोथबी की विज्ञान एवं प्राकृतिक इतिहास प्रमुख कैसेंड्रा हैटन के अनुसार, “यदि आप जमीन के मालिक हैं, तो जीवाश्म पर भी आपका अधिकार है।” पिछले रिकॉर्ड धारक ‘एपेक्स’ को अरबपति केन ग्रिफिन ने खरीदकर अमेरिकी प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय को दीर्घकालिक ऋण पर दिया था, जबकि ‘स्टैन’ अबू धाबी के प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय में प्रदर्शित है।
वैज्ञानिक समुदाय ने इस नीलामी पर चिंता व्यक्त की है। सोसायटी ऑफ वर्टिब्रेट पेलियोन्टोलॉजी ने आग्रह किया कि ऐसे वैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण नमूने सार्वजनिक संग्रहालयों में रखे जाएं ताकि भविष्य में नई तकनीकों से अध्ययन संभव हो सके। भारतीय परिप्रेक्ष्य में, यह बहस प्रासंगिक है क्योंकि देश में पाए जाने वाले जीवाश्म कानूनी रूप से सरकारी संरक्षण में आते हैं, किंतु तस्करी और अवैध व्यापार की चुनौतियां बनी रहती हैं।
इस बीच, एशिया में जीवाश्म खोजों का सिलसिला जारी है। थाईलैंड के कालासिन प्रांत में 15 करोड़ वर्ष पुराने एक विशालकाय शाकाहारी डायनासोर उरागासॉरस कालासिनेंसिस की पहचान एक ही कशेरुक से की गई, जो मामेंचिसॉरिड परिवार का दक्षिण-पूर्व एशिया में पहला प्रमाण है। अर्जेंटीना के पैटागोनिया क्षेत्र में भी 7 करोड़ वर्ष पुरानी एक नई एंकिलोसॉर प्रजाति पैटागोपेल्टा क्रिस्टाटा का विवरण सामने आया है। ये खोजें इस बात को रेखांकित करती हैं कि जीवाश्म केवल संग्रहणीय वस्तु नहीं, बल्कि पृथ्वी के अतीत के अपूरणीय वैज्ञानिक दस्तावेज हैं। ‘गस’ का अगला पड़ाव इस बात पर निर्भर करेगा कि उसका अज्ञात खरीदार इसे सार्वजनिक शोध के लिए उपलब्ध कराता है या निजी संग्रह में सीमित कर देता है।
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.60 | critical |
|---|---|---|
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.30 | critical |
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | +0.70 | aligned |
जीवाश्म विज्ञानी और शोधकर्ता अलार्म बजा रहे हैं: जीवाश्म व्यापार अमूल्य वैज्ञानिक खजानों को सार्वजनिक अध्ययन से दूर ले जा रहा है, और यह रिकॉर्ड बिक्री एक खतरनाक मिसाल है।
वैज्ञानिकों की भावनात्मक और पेशेवर चिंताओं को सामने रखकर, कथा नीलामी को बाजार की उपलब्धि के बजाय मानवता के लिए नुकसान के रूप में प्रस्तुत करती है।
नीलामी घर का उत्सवपूर्ण स्वर और रिकॉर्ड मूल्य को सकारात्मक मील के पत्थर के रूप में छोड़ दिया गया है, साथ ही यह तथ्य भी कि कंकाल को कानूनी रूप से खोदा और बेचा गया था।
रिपोर्ट बहस के दोनों पक्षों को प्रस्तुत करती है: जीवाश्म का वैज्ञानिक मूल्य बनाम बाजार की ताकतें, बिना कोई निश्चित रुख अपनाए लेकिन स्पष्ट रूप से अनुसंधान के जोखिमों को नोट करते हुए।
कहानी को दो वैध हितों के बीच संघर्ष के रूप में संरचित करके, कथा एक संतुलित ढांचा बनाती है जो पाठकों को व्यापार-नापसंद को तौलने के लिए आमंत्रित करती है।
अंतिम रिकॉर्ड मूल्य $50.1 मिलियन को प्रारंभिक फ्रेमिंग में छोड़ दिया गया है, इसके बजाय नीलामी-पूर्व अनुमान पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जो बाजार की जीत के पैमाने को कम करता है।
नीलामी घर और बाजार एक नए रिकॉर्ड का जश्न मनाते हैं: जीवाश्म बाजार फल-फूल रहा है, और यह बिक्री दुर्लभ प्राकृतिक इतिहास की कलाकृतियों के स्थायी मूल्य को साबित करती है।
कीमत, कंकाल की पूर्णता और प्रतिस्पर्धी बोली पर ध्यान केंद्रित करके, कथा बिक्री को एक सीधी सफलता की कहानी के रूप में प्रस्तुत करती है, किसी भी नैतिक या वैज्ञानिक आपत्तियों को अनदेखा करते हुए।
वैज्ञानिक पहुंच के नुकसान के बारे में जीवाश्म विज्ञानियों की चिंताएं और जीवाश्म व्यावसायीकरण पर व्यापक बहस पूरी तरह से छोड़ दी गई है।
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