
रोनाल्डो का जादू फीका? कांगो के खिलाफ बेअसर प्रदर्शन ने छठे विश्व कप में उठाए बड़े सवाल
पुर्तगाल के 1-1 ड्रॉ में क्रिस्टियानो रोनाल्डो महज 25 बार गेंद छू सके और एक भी शॉट निशाने पर नहीं लगा सके, जबकि लियोनेल मेस्सी ने हैट्रिक के साथ इतिहास रच दिया।
फीफा विश्व कप 2026 के शुरुआती मुकाबलों ने ही दो महानायकों की विपरीत तस्वीर खींच दी। ह्यूस्टन के एनआरजी स्टेडियम में पुर्तगाल को डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के खिलाफ 1-1 की निराशाजनक बराबरी पर रुकना पड़ा, जबकि क्रिस्टियानो रोनाल्डो रिकॉर्ड छठे विश्व कप में उतरने वाले पहले आउटफील्ड खिलाड़ी बने। लेकिन यह ऐतिहासिक उपलब्धि उनके प्रदर्शन की कड़वी सच्चाई से ढक गई: 90 मिनट में केवल 25 बार गेंद को छूना, तीन शॉट और उनमें से एक भी निशाने पर नहीं। ठीक एक दिन पहले अर्जेंटीना के लियोनेल मेस्सी ने अल्जीरिया के खिलाफ हैट्रिक जमाकर मिरोस्लाव क्लोजे के 16 गोल के सर्वकालिक रिकॉर्ड की बराबरी कर ली थी। इस जबरदस्त अंतर ने वैश्विक फुटबॉल प्रेमियों—खासकर भारत जैसे क्रिकेटप्रधान लेकिन फुटबॉल-दीवाने बाजारों—में एक बार फिर ‘जीओएटी’ की बहस छेड़ दी।
यूरोपीय और अफ्रीकी प्रतिक्रियाओं ने रोनाल्डो की घटती धार पर मुहर लगा दी। फ्रांस के विश्व कप विजेता थिएरी हेनरी ने फॉक्स स्पोर्ट्स पर कहा, “टीम को गोल चाहिए, तुम्हें नहीं,” और उस क्षण की ओर इशारा किया जब रोनाल्डो ने ब्रूनो फर्नांडिस को पास देने के बजाय खुद मुश्किल एंगल से शॉट लिया। जर्मनी के फ्रैंकफुर्टर आल्गेमाइने और स्वीडन के टीवी4 ने भी सुपरस्टार को टीम पर बोझ बताया। इससे भी अधिक चुभने वाली टिप्पणी कांगो के मिडफील्डर न्गाल’आयेल मुकाउ ने की: “हमने रोनाल्डो को रोकने की कोई खास योजना नहीं बनाई, क्योंकि वह अब पहले जैसे नहीं रहे—वह बूढ़े हो गए हैं।” यह बयान अफ्रीकी टीम के लिए ऐतिहासिक था, क्योंकि 1974 में ज़ैरे के रूप में खेलने के बाद यह कांगो का पहला विश्व कप अंक था। मैदान के बाहर भी कांगो के प्रशंसकों ने रोनाल्डो के जाते समय ‘मेस्सी, मेस्सी’ के नारे लगाकर माहौल गर्मा दिया।
एशियाई मीडिया और विशेषज्ञों ने भी इस बहस को गहराई दी। इंडोनेशिया के विवा डॉट कॉइड और ओकेज़ोन ने रोनाल्डो को “दस खिलाड़ियों के साथ एक मूर्ति” करार दिया, जबकि भारत के इंडिया टुडे और टाइम्स ऑफ इंडिया ने उनके दस मैचों के गोल-सूखे को रेखांकित किया—पिछला गैर-पेनल्टी गोल जून 2021 में आया था। हालांकि, कोच रॉबर्टो मार्टिनेज ने रोनाल्डो का बचाव करते हुए कहा कि “दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गोलस्कोरर को तब बाहर करना बेमानी है जब आपको गोल चाहिए।” इंग्लैंड के पूर्व स्ट्राइकर क्रिस सटन ने इसे ‘डर’ बताया—मार्टिनेज रोनाल्डो को बदलने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। दिलचस्प यह कि वेन रूनी ने रोनाल्डो की सराहना करते हुए कहा कि पहले गोल में उनकी चालाक मूवमेंट ने डिफेंडरों को उलझाकर जोआओ नेवेश के लिए जगह बनाई, लेकिन यह एकमात्र सकारात्मक पहलू रहा।
आगे का रास्ता पुर्तगाल के लिए चुनौतीपूर्ण है। ग्रुप के में एक अंक लेकर चलना मजबूरी नहीं, लेकिन अगर मार्टिनेज रणनीति में लचीलापन नहीं लाते तो अर्जेंटीना जैसी टीमों से बचने की अटकलें हवा हो जाएंगी। रोनाल्डो का व्यक्तिगत रिकॉर्ड जुनून टीम की सामूहिक जरूरतों पर भारी पड़ता दिख रहा है, और यह सवाल अब हर महाद्वीप के विश्लेषक पूछ रहे हैं: क्या छठे विश्व कप का सपना पुर्तगाल की विश्व विजेता बनने की महत्वाकांक्षा को कुर्बान कर देगा? मेस्सी के धमाकेदार आगाज ने तुलना को और तीखा बना दिया है, और आने वाले मैचों में रोनाल्डो के पास अपनी विरासत को फिर से परिभाषित करने का शायद आखिरी मौका होगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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मेस्सी की हैट्रिक के बाद, रोनाल्डो खाली रहे और पुर्तगाल को डीआर कांगो ने 1-1 से रोक दिया। कोच मार्टिनेज़ ने 41 वर्षीय खिलाड़ी को बदलने को अकल्पनीय बताया, जबकि ऑनलाइन अटकलें थीं कि पुर्तगाल ने क्वार्टर फाइनल में अर्जेंटीना से बचने के लिए जानबूझकर ड्रॉ खेला।
क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने डीआर कांगो के खिलाफ 1-1 से ड्रॉ में कोई शॉट ऑन टारगेट नहीं लगाया और बड़े टूर्नामेंटों में अपना गोल सूखा 10 मैचों तक बढ़ा दिया। 'मेस्सी, मेस्सी' के नारे गूंजे, जिससे सवाल उठा कि क्या 41 साल की उम्र आखिरकार हावी हो गई।
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