
ट्रंप के 'भीख मांगने' वाले बयान पर इटली का कड़ा रुख, विदेश मंत्री ने अमेरिका यात्रा रद्द की
जी-7 शिखर सम्मेलन में तस्वीर को लेकर ट्रंप की टिप्पणी से रोम और वाशिंगटन के बीच कूटनीतिक तनाव गहराया, मेलोनी ने आरोपों को 'पूरी तरह मनगढ़ंत' बताया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक टेलीफोन साक्षात्कार में इतालवी प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी पर की गई टिप्पणी ने दोनों देशों के बीच गंभीर कूटनीतिक संकट उत्पन्न कर दिया है। इतालवी टीवी चैनल ला7 से बातचीत में ट्रंप ने दावा किया कि फ्रांस के एवियां में संपन्न जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान मेलोनी ने उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए 'भीख मांगी' थी और उन्होंने केवल 'तरस खाकर' यह तस्वीर ली। मेलोनी ने तुरंत एक वीडियो जारी कर इसे 'पूरी तरह से मनगढ़ंत' बताया और कहा, 'न मैं, न इटली कभी भीख मांगते हैं।' इसके फलस्वरूप इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तायानी ने 21 और 22 जून को होने वाली अपनी अमेरिका यात्रा रद्द कर दी और कहा कि ट्रंप के 'गंभीर और आपत्तिजनक' शब्द पूरे इटली का अपमान करते हैं। मियामी में होने वाला इटली-अमेरिका व्यापार मंच भी रद्द कर दिया गया और प्रमुख उद्योग संघ कॉन्फिंडस्ट्रिया ने भी इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया।
इस विवाद पर इतालवी राजनीतिक हलके में व्यापक एकजुटता देखने को मिली। राष्ट्रपति सर्जियो मातारेला ने मेलोनी से फोन पर बात कर एकजुटता व्यक्त की। रक्षा मंत्री गुइदो क्रोसेतो ने कहा कि वे 'धमकी के बावजूद भी मेलोनी को किसी से तस्वीर मांगते हुए नहीं देख सकते।' प्रधानमंत्री कार्यालय के उपसचिव जियोवानबातिस्ता फात्सोलारी ने आरोप लगाया कि ट्रंप 'जानबूझकर या अक्षमता के कारण अमेरिका और यूरोप के ऐतिहासिक संबंधों को नष्ट कर रहे हैं।' विपक्षी दलों के नेताओं—जिनमें कार्लो कालेंदा और ज्यूसेपे कोंते शामिल हैं—ने भी ट्रंप की भाषा की निंदा की, हालांकि कुछ वामपंथी नेताओं ने मेलोनी की पिछली विदेश नीति पर भी सवाल उठाए। यूरोपीय स्तर पर स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज़ ने सार्वजनिक रूप से एकजुटता दिखाई, जबकि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत धीमी रही। रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़ाखारोवा ने व्यंग्यात्मक लहजे में पूछा कि क्या इटली ने अमेरिकी राजदूत को तलब किया, जबकि एक रूसी पत्रकार के बयान पर रूसी राजदूत को तुरंत बुलाया गया था।
यह टकराव ऐसे समय हुआ है जब दोनों नेताओं के बीच पहले से तनाव चल रहा था। मेलोनी कभी यूरोप में ट्रंप की सबसे करीबी सहयोगी मानी जाती थीं और 2025 में उनके शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने वाली एकमात्र यूरोपीय नेता थीं। इतालवी सरकारी सूत्रों के अनुसार, संबंधों में दरार इस वर्ष ईरान युद्ध के दौरान आई, जब इटली ने अमेरिकी बमवर्षक विमानों को सिगोनेला एयरबेस का उपयोग करने से मना कर दिया और सैन्य भागीदारी से इनकार किया। इसके बाद ट्रंप ने पोप लियो चौदहवें पर उनकी युद्ध-विरोधी टिप्पणियों के लिए हमला किया, जिसे मेलोनी ने 'अस्वीकार्य' बताया। ट्रंप ने पलटवार करते हुए कहा कि वे 'हैरान' हैं और उन्हें लगा था कि मेलोनी में साहस है, 'लेकिन मैं गलत था।' जी-7 में दोनों के बीच सुलह के संकेत दिखे थे, लेकिन ट्रंप के ताज़ा बयान ने उस धारणा को ध्वस्त कर दिया।
कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रकरण ट्रंप प्रशासन की लेन-देन वाली विदेश नीति की नाज़ुकता को उजागर करता है, जिसमें वैचारिक सहयोगी भी सार्वजनिक अपमान से अछूते नहीं हैं। इटली द्वारा यात्रा और व्यापार मंच रद्द करना यह संकेत देता है कि रोम गठबंधन की सुविधा के बजाय राष्ट्रीय गरिमा को प्राथमिकता देने को तैयार है। हालांकि, दोनों देशों के बीच सुरक्षा और आर्थिक अंतर्निर्भरता बनी हुई है; नाटो संबंधों को तोड़ने की कोई चर्चा नहीं है। यूरोपीय संघ के भीतर यह घटनाक्रम सामरिक स्वायत्तता की मांग को और बल दे सकता है। फिलहाल कोई उच्च-स्तरीय बैठक निर्धारित नहीं है और अमेरिकी पक्ष की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह मामला ट्रंप की अप्रत्याशित कूटनीति की एक और मिसाल के रूप में दर्ज हो गया है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी पर एक अकारण और आपत्तिजनक मौखिक हमला किया, यह दावा करते हुए कि उन्होंने तस्वीर के लिए विनती की। प्रधानमंत्री ने आरोपों को पूरी तरह से मनगढ़ंत बताकर दृढ़ता से खारिज कर दिया, जबकि विदेश मंत्री ने विरोध में अमेरिका की आधिकारिक यात्रा रद्द कर दी। इस प्रकरण ने एक राजनयिक संकट पैदा कर दिया और मेलोनी के प्रति राजनीतिक एकजुटता की लहर दौड़ गई, साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति की कड़ी निंदा की गई।
डोनाल्ड ट्रंप और जॉर्जिया मेलोनी के बीच तनाव तेजी से बढ़ गया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि इतालवी प्रधानमंत्री ने तस्वीर के लिए विनती की। इटली के विदेश मंत्री ने विरोध में वाशिंगटन की नियोजित यात्रा रद्द कर दी और इसे पूरे देश का अपमान बताया। यह झगड़ा पारंपरिक पश्चिमी सहयोगियों के बीच बढ़ती दरारों को उजागर करता है।
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