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समाज और संस्कृतिशनिवार, 27 जून 2026

बुडापेस्ट की सड़कों पर गूंजा 'साधारण' जश्न, पहला प्राइड जहां डर नहीं था

हंगरी में ओर्बन युग के बाद पहली बार बिना प्रतिबंध के निकली प्राइड परेड, जहां गर्म हवाओं के बीच इंद्रधनुषी झंडे एक नई राजनीतिक सुबह के गवाह बने।

बुडापेस्ट के एलिज़ाबेथ पुल पर इंद्रधनुषी झंडे लहरा रहे थे, तभी कुछ हाथों ने उन्हें खींचकर डेन्यूब नदी में फेंक दिया। यह विरोध का एक छोटा-सा दृश्य था, लेकिन शहर के बीचोंबीच गूंजता संगीत और चमकीले परिधानों में सजे हजारों लोगों का हुजूम इस बात का सबूत था कि इस साल प्राइड मार्च का स्वाद बिल्कुल अलग था। पिछले साल जहां पुलिस के प्रतिबंध के बावजूद करीब दो लाख लोग सड़कों पर उतरे थे, वहीं इस शनिवार को 40 डिग्री के करीब पहुंचते तापमान के बीच महज 25,000 प्रतिभागियों ने शिरकत की। लेकिन इस बार किसी को गिरफ्तारी का डर नहीं था, न ही यह मार्च किसी सरकार के खिलाफ सीधी चुनौती था।

कार्यकर्ता और पत्रकार अदाम कानिचार ने इस बदलाव को एक वाक्य में समेटा: 'पिछले साल हम अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे थे, इस साल यह एक सामान्य उत्सव है।' उनके लिए यह 'सामान्य' होना ही सबसे बड़ी उपलब्धि थी, क्योंकि विक्टर ओर्बान के 16 साल के शासन ने एलजीबीटीक्यू समुदाय के अधिकारों को लगातार क्षीण किया था। कानिचार कहते हैं कि उस दौर ने एक 'लगभग अभिघातजन्य प्रभाव' छोड़ा है, जिसे भरने में समय लगेगा। पिछले साल का प्रतिबंध, जिसे 'बाल संरक्षण' कानून के तहत लगाया गया था, अंततः ओर्बान के पतन की शुरुआत बन गया।

यूरोपीय संघ के न्यायालय ने अप्रैल में उस कानून को यूरोपीय कानून के खिलाफ करार दिया, और इसके ठीक नौ दिन बाद हुए चुनाव में ओर्बान की पार्टी सत्ता से बाहर हो गई। नए प्रधानमंत्री पीटर माग्यार ने प्राइड पर लगी रोक हटा दी और जून में एक तीखे संदेश में पूर्ववर्ती सरकार से कहा कि 'जितनी जल्दी हो सके, हंगरीवासियों के शयनकक्ष से बाहर निकलें।' हालांकि, माग्यार खुद इस परेड में शामिल नहीं हुए, ठीक वैसे ही जैसे पिछले साल विवाद के दौरान वे छुट्टी पर चले गए थे। उनकी रणनीति सांस्कृतिक मुद्दों से बचते हुए भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन पर केंद्रित रही, जिसने ग्रामीण और शहरी मतदाताओं को एकजुट किया।

बुडापेस्ट के उदारवादी मेयर गेर्गेली काराचोन्य, जिन्होंने पिछले साल कानूनी बारीकियों का सहारा लेकर परेड को नगर निगम का आयोजन घोषित किया था, इस बार मंच पर यूरोपीय आयुक्त हाद्जा लाहबीब के साथ खड़े दिखे। उन्होंने यौन अल्पसंख्यकों को प्रभावित करने वाले कानूनों को शीघ्र निरस्त करने की मांग की। वहीं, इटली में स्थिति बिल्कुल विपरीत थी। मिलान में उसी दिन प्राइड मार्च निकला, लेकिन वहां का माहौल 'विद्रोही शरीरों' के नारे के साथ सरकारी प्रतिबंधों और राजनेताओं की घृणित टिप्पणियों के खिलाफ गुस्से से भरा था। इल्गा-यूरोप के रेनबो मैप 2026 में हंगरी और इटली दोनों ही महाद्वीप के सबसे निचले पायदान पर हैं, लेकिन बुडापेस्ट की सड़कों पर इस साल जो राहत महसूस हुई, वह मिलान में नदारद थी।

पूरे यूरोप में भीषण गर्मी ने प्राइड आयोजनों की तस्वीर बदल दी। मिलान में परेड का समय शाम 5 बजे कर दिया गया ताकि छाया का सहारा लिया जा सके, और शराब पर प्रतिबंध लगा दिया गया। पेरिस ने तो अपनी मार्च पूरी तरह रद्द कर दी, क्योंकि अस्पताल मरीजों से भरे थे और आपात सेवाएं चरमरा गई थीं। बुडापेस्ट में भी आयोजकों ने कमजोर प्रतिभागियों को सावधानी बरतने की सलाह दी, लेकिन वहां गर्म हवाओं के बीच जो चीज सबसे अलग थी, वह थी एक लंबे संघर्ष के बाद मिली सामान्यता की सांस।

डेन्यूब में फेंके गए वे इंद्रधनुषी झंडे पानी पर कुछ देर तैरते रहे, फिर बह गए। लेकिन पुल के इस पार, हजारों लोगों के हाथों में थमे झंडे एक ऐसे शहर की कहानी कह रहे थे, जहां प्राइड अब प्रतिरोध का प्रतीक नहीं, बल्कि एक मौसमी उत्सव बनने की ओर है।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

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18%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेसलैटिन अमेरिकी प्रेस
महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस
विजयव्यंग्यपरपीड़ासुख

इस वर्ष की बुडापेस्ट प्राइड परेड सामान्य महसूस हुई, जो पिछले वर्ष की अवज्ञा से बिल्कुल अलग थी। ओर्बान के सोलह वर्षों के प्रतिबंधों के बाद, एलजीबीटीक्यू समुदाय ने पुलिस के हस्तक्षेप के डर के बिना मार्च किया, हालांकि दूर-दराज़ के कार्यकर्ताओं ने कुछ इंद्रधनुषी झंडे हटा दिए। यह आयोजन ऐतिहासिक रूप से सामान्य स्थिति की वापसी का प्रतीक है, भले ही गर्मी की लहर और राजनीतिक तनाव पृष्ठभूमि में बने रहे।

लैटिन अमेरिकी प्रेस/ बाज़ार
उदासीनताव्यावहारिकतासंदेह

इस शनिवार को बुडापेस्ट और मिलान में प्राइड मार्च विपरीत मनोदशाओं को उजागर करते हैं। जहाँ हंगरी की राजधानी ओर्बान युग की समाप्ति के बाद एक शांत उत्सव का आनंद ले रही है, वहीं मिलान की परेड शारीरिक विद्रोह का नारा अपनाती है। दोनों देश यूरोपीय रेनबो मानचित्र में सबसे निचले पायदान पर बने हुए हैं, जो लगातार भेदभाव को रेखांकित करता है।

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शनिवार, 27 जून 2026

बुडापेस्ट की सड़कों पर गूंजा 'साधारण' जश्न, पहला प्राइड जहां डर नहीं था

हंगरी में ओर्बन युग के बाद पहली बार बिना प्रतिबंध के निकली प्राइड परेड, जहां गर्म हवाओं के बीच इंद्रधनुषी झंडे एक नई राजनीतिक सुबह के गवाह बने।

बुडापेस्ट के एलिज़ाबेथ पुल पर इंद्रधनुषी झंडे लहरा रहे थे, तभी कुछ हाथों ने उन्हें खींचकर डेन्यूब नदी में फेंक दिया। यह विरोध का एक छोटा-सा दृश्य था, लेकिन शहर के बीचोंबीच गूंजता संगीत और चमकीले परिधानों में सजे हजारों लोगों का हुजूम इस बात का सबूत था कि इस साल प्राइड मार्च का स्वाद बिल्कुल अलग था। पिछले साल जहां पुलिस के प्रतिबंध के बावजूद करीब दो लाख लोग सड़कों पर उतरे थे, वहीं इस शनिवार को 40 डिग्री के करीब पहुंचते तापमान के बीच महज 25,000 प्रतिभागियों ने शिरकत की। लेकिन इस बार किसी को गिरफ्तारी का डर नहीं था, न ही यह मार्च किसी सरकार के खिलाफ सीधी चुनौती था।

कार्यकर्ता और पत्रकार अदाम कानिचार ने इस बदलाव को एक वाक्य में समेटा: 'पिछले साल हम अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे थे, इस साल यह एक सामान्य उत्सव है।' उनके लिए यह 'सामान्य' होना ही सबसे बड़ी उपलब्धि थी, क्योंकि विक्टर ओर्बान के 16 साल के शासन ने एलजीबीटीक्यू समुदाय के अधिकारों को लगातार क्षीण किया था। कानिचार कहते हैं कि उस दौर ने एक 'लगभग अभिघातजन्य प्रभाव' छोड़ा है, जिसे भरने में समय लगेगा। पिछले साल का प्रतिबंध, जिसे 'बाल संरक्षण' कानून के तहत लगाया गया था, अंततः ओर्बान के पतन की शुरुआत बन गया।

यूरोपीय संघ के न्यायालय ने अप्रैल में उस कानून को यूरोपीय कानून के खिलाफ करार दिया, और इसके ठीक नौ दिन बाद हुए चुनाव में ओर्बान की पार्टी सत्ता से बाहर हो गई। नए प्रधानमंत्री पीटर माग्यार ने प्राइड पर लगी रोक हटा दी और जून में एक तीखे संदेश में पूर्ववर्ती सरकार से कहा कि 'जितनी जल्दी हो सके, हंगरीवासियों के शयनकक्ष से बाहर निकलें।' हालांकि, माग्यार खुद इस परेड में शामिल नहीं हुए, ठीक वैसे ही जैसे पिछले साल विवाद के दौरान वे छुट्टी पर चले गए थे। उनकी रणनीति सांस्कृतिक मुद्दों से बचते हुए भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन पर केंद्रित रही, जिसने ग्रामीण और शहरी मतदाताओं को एकजुट किया।

बुडापेस्ट के उदारवादी मेयर गेर्गेली काराचोन्य, जिन्होंने पिछले साल कानूनी बारीकियों का सहारा लेकर परेड को नगर निगम का आयोजन घोषित किया था, इस बार मंच पर यूरोपीय आयुक्त हाद्जा लाहबीब के साथ खड़े दिखे। उन्होंने यौन अल्पसंख्यकों को प्रभावित करने वाले कानूनों को शीघ्र निरस्त करने की मांग की। वहीं, इटली में स्थिति बिल्कुल विपरीत थी। मिलान में उसी दिन प्राइड मार्च निकला, लेकिन वहां का माहौल 'विद्रोही शरीरों' के नारे के साथ सरकारी प्रतिबंधों और राजनेताओं की घृणित टिप्पणियों के खिलाफ गुस्से से भरा था। इल्गा-यूरोप के रेनबो मैप 2026 में हंगरी और इटली दोनों ही महाद्वीप के सबसे निचले पायदान पर हैं, लेकिन बुडापेस्ट की सड़कों पर इस साल जो राहत महसूस हुई, वह मिलान में नदारद थी।

पूरे यूरोप में भीषण गर्मी ने प्राइड आयोजनों की तस्वीर बदल दी। मिलान में परेड का समय शाम 5 बजे कर दिया गया ताकि छाया का सहारा लिया जा सके, और शराब पर प्रतिबंध लगा दिया गया। पेरिस ने तो अपनी मार्च पूरी तरह रद्द कर दी, क्योंकि अस्पताल मरीजों से भरे थे और आपात सेवाएं चरमरा गई थीं। बुडापेस्ट में भी आयोजकों ने कमजोर प्रतिभागियों को सावधानी बरतने की सलाह दी, लेकिन वहां गर्म हवाओं के बीच जो चीज सबसे अलग थी, वह थी एक लंबे संघर्ष के बाद मिली सामान्यता की सांस।

डेन्यूब में फेंके गए वे इंद्रधनुषी झंडे पानी पर कुछ देर तैरते रहे, फिर बह गए। लेकिन पुल के इस पार, हजारों लोगों के हाथों में थमे झंडे एक ऐसे शहर की कहानी कह रहे थे, जहां प्राइड अब प्रतिरोध का प्रतीक नहीं, बल्कि एक मौसमी उत्सव बनने की ओर है।

स्रोतों में मतभेद

समाज और संस्कृति · 10 स्रोत · 6 भाषाएँ

18%कम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

समर्थक90%
न्यूनत्र10%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 6 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेसलैटिन अमेरिकी प्रेस
महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस
विजयव्यंग्यपरपीड़ासुख

इस वर्ष की बुडापेस्ट प्राइड परेड सामान्य महसूस हुई, जो पिछले वर्ष की अवज्ञा से बिल्कुल अलग थी। ओर्बान के सोलह वर्षों के प्रतिबंधों के बाद, एलजीबीटीक्यू समुदाय ने पुलिस के हस्तक्षेप के डर के बिना मार्च किया, हालांकि दूर-दराज़ के कार्यकर्ताओं ने कुछ इंद्रधनुषी झंडे हटा दिए। यह आयोजन ऐतिहासिक रूप से सामान्य स्थिति की वापसी का प्रतीक है, भले ही गर्मी की लहर और राजनीतिक तनाव पृष्ठभूमि में बने रहे।

लैटिन अमेरिकी प्रेस/ बाज़ार
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इस शनिवार को बुडापेस्ट और मिलान में प्राइड मार्च विपरीत मनोदशाओं को उजागर करते हैं। जहाँ हंगरी की राजधानी ओर्बान युग की समाप्ति के बाद एक शांत उत्सव का आनंद ले रही है, वहीं मिलान की परेड शारीरिक विद्रोह का नारा अपनाती है। दोनों देश यूरोपीय रेनबो मानचित्र में सबसे निचले पायदान पर बने हुए हैं, जो लगातार भेदभाव को रेखांकित करता है।

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