
जुलाई में स्वीडन में कर राहत और केरल में कम-अल्कोहल पेय पर नई दरें लागू होंगी
स्वीडन ने ईंधन, बाल देखभाल और आयात पर उपभोक्ता अनुकूल बदलाव किए हैं, जबकि केरल ने कम-अल्कोहल पेय पर कर बढ़ाकर राजस्व और स्वास्थ्य संतुलन साधा है।
स्वीडन में 1 जुलाई से कई नई व्यवस्थाएँ लागू हो रही हैं जो परिवारों और बाज़ार की माँग को सीधे प्रभावित करेंगी। पेट्रोल और डीज़ल पर अस्थायी उत्पाद शुल्क में तीन क्रोनर प्रति लीटर की कटौती जुलाई-नवंबर तक प्रभावी रहेगी, जो मई-सितंबर की मौजूदा राहत में जुड़ जाएगी। आवासीय संपत्ति (बोस्ताद्स्रेत) और विला किराए पर देने के नियम उदार किए गए हैं, जिससे लंबी अवधि के लिए किराए पर देना आसान हो गया है और किराया निर्धारण में अधिक लचीलापन आया है, हालाँकि अत्यधिक किराए के विरुद्ध सुरक्षा उपाय बने रहेंगे।
घरेलू बजट को सीधे लाभ पहुँचाने वाले कदमों में बाल देखभाल शुल्क की अधिकतम सीमा में 10,000 क्रोनर की कटौती शामिल है। यह राशि शुल्क गणना से पहले घरेलू आय से घटा दी जाएगी। सांस्कृतिक क्षेत्र में, डांस आयोजनों पर प्रवेश मूल्य वर्धित कर (वैट) 25% से घटाकर 6% कर दिया गया है, इसे सर्कस, रंगमंच और बैले के समान दर पर ला दिया गया है। खुदरा क्षेत्र के लिए, नया नकदी कानून किराना दुकानों और फार्मेसियों को, कुछ अपवादों के साथ, नकद स्वीकार करने के लिए बाध्य करता है, और बैंकों को ग्राहकों के लिए नकद जमा की सुविधाएँ सुनिश्चित करनी होंगी।
भारत में, केरल विधान सभा वित्त (संख्या 3) विधेयक, 2026 के माध्यम से कम-अल्कोहल पेय पदार्थों पर संशोधित कर दरें लागू करने की तैयारी कर रही है। 0.5% से 10% अल्कोहल सांद्रता वाले पेय पर 120% और 10% से 20% सांद्रता वालों पर 175% की दर प्रस्तावित है। ये दरें मुख्यमंत्री के संशोधित बजट में घोषित थीं, लेकिन राजनीतिक विवाद के कारण इन्हें तत्काल लागू नहीं किया जाएगा। विपक्षी वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) का आरोप है कि इससे नशे की लत को बढ़ावा मिलेगा, जबकि सत्तारूढ़ संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) ने कहा है कि अंतिम निर्णय गठबंधन लेगा। उल्लेखनीय है कि 2022-23 की आबकारी नीति में LDF सरकार ने ही कम-अल्कोहल पेय को एक नई श्रेणी के रूप में अधिसूचित किया था।
वैश्विक परिदृश्य में, स्वीडन के कदम उपभोग को प्रोत्साहित करने और डिजिटल अर्थव्यवस्था में नकदी की भूमिका बनाए रखने के प्रयास दर्शाते हैं। वहीं केरल का कर ढाँचा विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में राजस्व और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बीच संतुलन की चुनौती को रेखांकित करता है। आगामी मील के पत्थर: स्वीडन में 1 जुलाई से नियम प्रभावी होंगे, जबकि केरल में सरकार द्वारा राजपत्र अधिसूचना जारी होने के बाद ही संशोधित दरें लागू होंगी, जिसकी तिथि अभी निर्धारित नहीं है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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जुलाई में कई यूरोपीय देश ईंधन कर में अस्थायी कटौती और किराए के अधिक लचीले नियम लागू कर रहे हैं। इन कदमों का उद्देश्य घरेलू बजट पर बोझ कम करना है, कुछ बाजारों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें 1.90 यूरो प्रति लीटर से नीचे आ गई हैं। इन बदलावों को जीवन-यापन की लागत के दबाव का सामना कर रहे परिवारों के लिए व्यावहारिक राहत के रूप में पेश किया गया है।
जुलाई पूरे क्षेत्र में आवश्यक सेवाओं—सार्वजनिक परिवहन, निजी स्वास्थ्य बीमा, किराए और उपयोगिताओं—में कीमतों में तेज वृद्धि लेकर आया है। विनियमित कीमतों में बढ़ोतरी से घरेलू बजट पर भारी दबाव पड़ रहा है और व्यापक चिंता फैल गई है। ये वृद्धि पहले से ही उच्च मुद्रास्फीति के बीच आई है, जिससे आम परिवारों पर वित्तीय शिकंजा और कस गया है।
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