
रूस का ईंधन संकट: बेलारूस से विमान ईंधन आयात चार गुना बढ़ा, क्रीमिया से साइबेरिया तक दिखा असर
यूक्रेनी ड्रोन हमलों से क्षतिग्रस्त रिफाइनरियों के चलते रूस ने पहली बार एविएशन केरोसिन के निर्यात पर रोक लगाई, फिर भी घरेलू आपूर्ति का संकट गहराया।
रूस ने मई 2026 में बेलारूस से लगभग 5,170 टन विमानन केरोसिन का आयात किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग चार गुना अधिक है। जून के पहले दस दिनों में ही 2,600 टन और मंगाया जा चुका था। यह वृद्धि यूक्रेनी ड्रोन हमलों के कारण घरेलू रिफाइनिंग क्षमता में आई भारी गिरावट से जुड़ी है, विशेषकर मॉस्को रिफाइनरी पर 16 और 18 जून के हमलों के बाद, जिसके कारण संयंत्र की दोनों प्राथमिक प्रसंस्करण इकाइयां ठप हो गईं और सूत्रों के अनुसार यह 2026 के अंत तक बंद रह सकता है।
संकट का भौगोलिक विस्तार असमान रहा है। क्रीमिया में पेट्रोल की खुदरा बिक्री पूरी तरह रोक दी गई और ईंधन केवल सरकारी सेवाओं के लिए आरक्षित कर दिया गया, जबकि सेवस्तोपोल में क्यूआर कोड आधारित टोकन प्रणाली लागू की गई। मध्य रूस, वोल्गा क्षेत्र और दक्षिणी संघीय जिलों में स्थिति सबसे विकट दिखी, जहाँ ‘बेंज़िन’ से जुड़ी ऑनलाइन खोजों की हिस्सेदारी पिछले वर्ष की तुलना में 10 से 20 गुना तक बढ़ गई। इसके विपरीत, साइबेरिया के नोवोसिबिर्स्क, ओम्स्क और तोम्स्क क्षेत्रों में खोज की तीव्रता अपेक्षाकृत कम रही, जो स्थानीय आपूर्ति की तुलनात्मक स्थिरता की ओर इशारा करती है।
सरकारी प्रतिक्रिया में 1 जून 2026 से विमानन केरोसिन के निर्यात पर अस्थायी प्रतिबंध शामिल है, जिसे घरेलू बाजार को स्थिर करने के लिए लगाया गया। साथ ही, कुछ रिफाइनरियों को ‘यूरो-5’ मानक के बजाय ‘यूरो-3’ उत्सर्जन स्तर वाला ईंधन उत्पादित करने की अनुमति दी गई, ताकि आपूर्ति बनाए रखी जा सके। हालांकि, एयरलाइन ‘अज़ीमुत’ ने चेतावनी दी कि ईंधन की कमी से उड़ानों का आर्थिक औचित्य समाप्त हो रहा है, जबकि उप-प्रधानमंत्री विटाली सेवेल्येव ने सार्वजनिक रूप से किसी समस्या से इनकार किया। राज्य ड्यूमा में ‘स्प्रावेद्लिवाया रोसिया’ के नेता सर्गेई मिरोनोव ने इस कमी को कृत्रिम बताते हुए कहा कि देश में पर्याप्त पेट्रोल मौजूद है और कीमतें बढ़ाने के लिए माहौल बनाया जा रहा है।
संघर्ष का दूसरा पक्ष यूक्रेन के अग्रिम मोर्चों पर भी दिखा, जहाँ रूसी ड्रोन हमलों के कारण ईंधन टैंकर चालक खतरनाक क्षेत्रों में जाने से इनकार कर रहे हैं। ज़ापोरिज्झिया क्षेत्र में एक बड़े ईंधन डिपो पर हमले के बाद स्थानीय सैन्य आपूर्ति प्रभावित हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेलारूस से आयात एक अस्थायी उपाय है, जो उच्च मांग के मौसम के बाद अक्टूबर तक घट सकता है, लेकिन रिफाइनरियों की सुरक्षा अनिश्चित बनी हुई है। अगला ध्यान देने योग्य बिंदु सरकारी निगरानी रिपोर्ट और मॉस्को रिफाइनरी की मरम्मत की समय-सीमा होगी, जिस पर राजधानी क्षेत्र की आपूर्ति निर्भर करती है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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रूस में ईंधन की राशनिंग राष्ट्रव्यापी हो गई है, पेट्रोल पंपों पर किलोमीटर लंबी कतारें लग रही हैं। कई क्षेत्रों में पेट्रोल और डीजल की कमी से अराजक दृश्य देखने को मिल रहे हैं। यह संकट क्रीमिया से साइबेरिया तक फैल रहा है, जिससे रूस को बेलारूस से विमान ईंधन का आयात चार गुना बढ़ाना पड़ रहा है।
रूसी अधिकारियों का दावा है कि ईंधन की कमी कृत्रिम है और पर्याप्त पेट्रोल उपलब्ध है। वे सट्टेबाजों पर मुनाफाखोरी का आरोप लगाते हैं, जबकि यह भी बताते हैं कि केवल एक रिफाइनरी पर हमला हुआ है। इस बीच, वे इस बात पर जोर देते हैं कि रूसी सेना यूक्रेन के लिए ईंधन संकट पैदा कर रही है, जिससे कथा बदल जाती है।
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