
चीन से रूस तक सड़क माल ढुलाई दरों में 15-25% का उछाल, ईंधन संकट ने बढ़ाई लागत
डीज़ल की किल्लत और सीमाई अड़चनों के चलते शंघाई-मॉस्को रूट पर प्रति ट्रक किराया 10.5 लाख रुपये के पार, आयातकों पर दबाव।
चीन से रूस जाने वाली सड़क माल ढुलाई की दरें पिछले एक महीने में 15 से 25 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। शंघाई से मॉस्को तक एक पूरे ट्रक का किराया अप्रैल के 7.3-7.5 लाख रूबल से बढ़कर अब 10.5-11 लाख रूबल तक पहुंच गया है। मंचूरिया से नोवोलिपेत्स्क जैसे मार्गों पर 20 टन माल की ढुलाई 5 जुलाई को 9 लाख रूबल में हो रही थी, जो महज दो दिन बाद 11.5 लाख रूबल से शुरू हुई। बाजार में खाली ट्रक लगभग अनुपलब्ध हैं और मांग अप्रैल से 50 प्रतिशत तक उछल चुकी है।
इस तेज वृद्धि की मुख्य वजह ईंधन की कीमत से अधिक, ईंधन की उपलब्धता और सीमा पर लगने वाला समय है। रूस में यूक्रेनी ड्रोन हमलों के बाद तेल रिफाइनरियों की क्षमता प्रभावित हुई है, जिससे कई क्षेत्रों में पेट्रोल पंपों पर प्रतिबंध लगा दिए गए हैं। ट्रकों को ईंधन भरने में घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे दैनिक औसत दूरी 600-700 किमी से गिरकर 500 किमी रह गई है। साथ ही, ज़बाइकाल्स्क जैसे प्रमुख सीमा पारगमन केंद्रों पर ईंधन टैंकरों को प्राथमिकता वाली ‘ग्रीन कॉरिडोर’ सुविधा दी जा रही है, जिससे सामान्य माल वाहकों की कतार लंबी खिंच रही है और मॉस्को तक का ट्रांज़िट समय 23 प्रतिशत बढ़कर 10-12 दिन हो गया है।
इस संकट का असर सिर्फ सड़क मार्ग तक सीमित नहीं है। आयातक मजबूरन रेल और समुद्री मार्ग की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे वहां भी दरें चढ़ गई हैं—रेल कंटेनर 150-250 डॉलर और समुद्री कंटेनर 100-400 डॉलर तक महंगे हुए हैं। दूसरी ओर, चीन स्वयं इलेक्ट्रिक टैक्सियों के तेज विस्तार से तेल आयात पर निर्भरता घटा रहा है; मई में उसकी गैसोलीन खपत सालाना आधार पर 10 प्रतिशत गिरी, जबकि सड़क माल ढुलाई 2 प्रतिशत बढ़ी। यह विरोधाभास दर्शाता है कि रूस की लॉजिस्टिक लागत में उछाल का कारण वैश्विक तेल कीमतों से अधिक उसकी आंतरिक आपूर्ति बाधाएं हैं।
रूसी परिवहन मंत्रालय ने कहा है कि उच्च सीज़न में चीनी आयात की डिलीवरी में कोई बड़ी समस्या नहीं आएगी, लेकिन बाजार सहभागियों को कम से कम गर्मियों के अंत तक दरों में और वृद्धि की आशंका है। अगला ध्यान देने योग्य पड़ाव सितंबर का मांग चक्र होगा, जब त्योहारी सीज़न से पहले माल ढुलाई की मांग और बढ़ सकती है।
| रूसी और सीआईएस प्रेस | 0.00 | neutral |
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| अरब खाड़ी प्रेस | +0.50 | aligned |
रूसी रसद क्षेत्र ईंधन संकट के कारण लागत में वृद्धि का सामना कर रहा है, जिसमें कतारें और देरी स्थिति को और खराब कर रही हैं।
कथा ठोस आंकड़ों और उद्योग संचालकों के उद्धरणों पर आधारित है, जो मूल्य वृद्धि को एक वस्तुनिष्ठ और अपरिहार्य तथ्य के रूप में प्रस्तुत करती है, बिना किसी को दोष दिए।
रूसी ब्लॉक ईंधन संकट के मूल कारणों और सरकार की किसी भी आलोचना के साथ-साथ इलेक्ट्रिक टैक्सियों पर चीनी दृष्टिकोण को छोड़ देता है।
चीन इलेक्ट्रिक टैक्सियों की बदौलत तेल के झटकों से खुद को बचाता है, जो किराए को कम रखती हैं और यात्रियों को आकर्षित करती हैं।
लेख सकारात्मक आंकड़ों (यात्राओं में वृद्धि, किराए में गिरावट) पर जोर देता है ताकि सफलता और अनुकूलन की कथा बनाई जा सके, बिना लिथियम आयात पर निर्भरता जैसी संभावित कमियों का उल्लेख किए।
खाड़ी ब्लॉक रूस के ईंधन संकट और परिवहन पर इसके प्रभाव को छोड़ देता है, पूरी तरह से चीन की सफलता पर ध्यान केंद्रित करता है।
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