
अमेरिका और खाड़ी देशों ने हिजबुल्लाह के वित्तीय ढांचे पर लगाए संयुक्त प्रतिबंध
पांच संस्थाओं और 16 अधिकारियों को निशाना बनाकर हिजबुल्लाह की समानांतर बैंकिंग प्रणाली को बाधित करने का प्रयास, जिसे समूह ने लेबनानी जनता को डराने वाला कदम बताया।
अमेरिका और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्य देशों ने आतंकवादी वित्तपोषण लक्ष्यीकरण केंद्र (TFTC) के माध्यम से मंगलवार को हिजबुल्लाह की वित्तीय संरचना पर संयुक्त प्रतिबंध लगाए। इनमें पांच संस्थाएं और 16 वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं, जिनमें अल-कर्द अल-हसन (AQAH) और बैत अल-माल जैसी प्रमुख वित्तीय इकाइयां शामिल हैं। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अनुसार, ये सभी लक्ष्य पहले से अमेरिकी प्रतिबंध सूची में थे, लेकिन अब TFTC के सभी सात सदस्यों—अमेरिका और छह खाड़ी देशों—ने इन्हें संयुक्त रूप से निशाना बनाया है।
वाशिंगटन और खाड़ी देशों के अनुसार, यह कार्रवाई हिजबुल्लाह की अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली तक पहुंच को बाधित करने और क्षेत्रीय स्थिरता की रक्षा के लिए की गई है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने आरोप लगाया कि अल-कर्द अल-हसन एक गैर-सरकारी संगठन की आड़ में बैंकिंग सेवाएं प्रदान करता है और शेल कंपनियों व दलालों के जरिए अवैध धन हस्तांतरण करता है। बैत अल-माल को हिजबुल्लाह का अनौपचारिक खजाना बताया गया, जो सीधे महासचिव की निगरानी में काम करता है। इसके विपरीत, हिजबुल्लाह और उसके सहयोगियों ने इन प्रतिबंधों को लेबनानी जनता को डराने और इजरायली आक्रमण का समर्थन करने वाला कदम बताया है। हिजबुल्लाह के सांसद हसन इज़्ज़दीन ने कहा कि ये प्रतिबंध नए नहीं हैं और इनसे डरने की कोई बात नहीं है।
इन प्रतिबंधों का व्यावहारिक प्रभाव हिजबुल्लाह की समानांतर बैंकिंग प्रणाली पर पड़ेगा, जो लेबनान के आधिकारिक वित्तीय ढांचे से बाहर संचालित होती है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार, अल-कर्द अल-हसन और बैत अल-माल के अधिकारियों ने लेबनानी और अमेरिकी बैंकों में छाया खातों के जरिए एक दशक में 50 करोड़ डॉलर से अधिक की राशि स्थानांतरित की। साथ ही, सोने की खरीद और विनिमय गृहों के माध्यम से भी धन का प्रवाह जारी रहा। प्रतिबंधित संस्थाओं में लेखा परीक्षा फर्म 'अल-खोबारा' और ऋण कंपनी 'तशीलात' भी शामिल हैं, जो हिजबुल्लाह की वित्तीय इकाइयों को सेवाएं देती थीं।
TFTC की स्थापना मई 2017 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में हुई थी, और यह उसकी नौवीं संयुक्त कार्रवाई है। क्षेत्रीय विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के खिलाफ सुन्नी खाड़ी राज्यों और पश्चिमी शक्तियों के बढ़ते समन्वय को दर्शाता है, जो लेबनान के भीतर सांप्रदायिक तनाव को और गहरा सकता है। फिलहाल, TFTC सदस्य देशों ने सूचनाओं के आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण के जरिए हिजबुल्लाह के वित्तीय नेटवर्क पर निगरानी जारी रखने की घोषणा की है, जिससे भविष्य में और प्रतिबंध संभावित हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके खाड़ी सहयोगियों ने हिज़्बुल्लाह की वित्तीय रीढ़ पर संयुक्त रूप से प्रहार किया है, अल-क़र्द अल-हसन और बैत अल-माल जैसी प्रमुख संस्थाओं और 16 वरिष्ठ व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाए हैं। इस समन्वित कार्रवाई का उद्देश्य समूह की अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग प्रणाली तक पहुंच को खत्म करना और उसके वित्तपोषण के स्रोतों को बाधित करना है। यह कदम आतंकवाद के वित्तपोषण को लक्षित करने वाले केंद्र की उन नेटवर्कों को ध्वस्त करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा हैं।
वाशिंगटन ने अपने अरब सहयोगियों के साथ समन्वय में हिज़्बुल्लाह की वित्तीय संस्थाओं और अधिकारियों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं, जिसे तेहरान प्रतिरोध की धुरी को कमजोर करने के व्यापक अभियान के हिस्से के रूप में देखता है। ये प्रतिबंध दक्षिणी लेबनान में ज़ायोनी शासन के प्रधानमंत्री की उकसाने वाली यात्राओं के साथ मेल खाते हैं, जो अमेरिका और इज़राइल के बीच मिलीभगत को उजागर करता है। हिज़्बुल्लाह की वित्तीय संस्थाएं, जो लेबनानी लोगों की सेवा करती हैं, आतंकवाद विरोध के बहाने अनुचित रूप से निशाना बनाई जा रही हैं।
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