
मानवीय आधार पर गृह कारावास: नॉर्वे और ब्राजील में इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के साथ रिहाई के फैसले
ओस्लो की एक अदालत ने क्राउन प्रिंसेस के बेटे को फुट ब्रेसलेट के साथ हाउस अरेस्ट में भेजा, जबकि ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट ने एक पादरी को स्वास्थ्य कारणों से गृह कारावास प्रदान किया।
नॉर्वे की राजधानी ओस्लो की एक जिला अदालत ने सोमवार को क्राउन प्रिंसेस मेटे-मैरिट के सबसे बड़े बेटे मारियस बोर्ग होयबी को जेल से रिहा कर इलेक्ट्रॉनिक फुट ब्रेसलेट के साथ चार सप्ताह के गृह कारावास में भेजने का आदेश दिया। 29 वर्षीय होयबी को पिछले जून में दो बलात्कार और एक पूर्व प्रेमिका के खिलाफ हिंसा सहित कई आरोपों में चार साल की सजा सुनाई गई थी, हालांकि यह फैसला अभी अंतिम नहीं है। अदालत ने उसकी न्यायिक हिरासत को बरकरार रखा लेकिन उसे स्काउगम स्थित क्राउन प्रिंस के आवास पर रहने की अनुमति दे दी, जहां से वह बिना अनुमति के बाहर नहीं जा सकेगा।
अभियोजन पक्ष ने इस फैसले के खिलाफ तुरंत अपील दायर की है और चार सप्ताह की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की है। नॉर्वेजियन अभियोजकों के अनुसार, होयबी ने पहले भी पीड़िता से संपर्क न करने के अदालती आदेश का कई बार उल्लंघन किया है, जिससे नए अपराधों का खतरा बना हुआ है। बचाव पक्ष के वकील पेटार सेकुलिच ने कहा कि उनके मुवक्किल को यह विकल्प स्वीकार है और वह अपनी मां के साथ रहना चाहते हैं, जिनका हाल ही में फेफड़े का प्रत्यारोपण हुआ है और जिनकी सेहत गंभीर बनी हुई है। अदालत ने पारिवारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह राहत दी, लेकिन अभियोजन की अपील पर अगली सुनवाई से पहले होयबी की स्थिति अनिश्चित है।
इसी सप्ताह ब्राजील के सुप्रीम फेडरल कोर्ट के न्यायाधीश अलेक्जेंडर डी मोरेस ने भी एक मानवीय गृह कारावास का आदेश दिया। रियो डी जनेरियो में भ्रष्टाचार और संगठित अपराध से जुड़े ‘ऑपरेशन उन्हा ई कार्ने’ मामले में गिरफ्तार पादरी मार्सियो पोंसियो को गंभीर अल्सरेटिव कोलाइटिस बीमारी और उनकी पत्नी की उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था के चलते जेल से घर भेज दिया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह राहत जांच की अखंडता को प्रभावित किए बिना दी गई है, क्योंकि तलाशी और संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई पूरी हो चुकी है। पादरी को इलेक्ट्रॉनिक टखना मॉनिटर पहनना होगा, सोशल मीडिया का उपयोग नहीं कर सकते, और सह-अभियुक्तों से संपर्क वर्जित रहेगा।
दोनों मामलों में न्यायिक प्रणालियों ने स्वास्थ्य और पारिवारिक आपात स्थितियों को आधार बनाकर इलेक्ट्रॉनिक निगरानी वाले गृह कारावास का सहारा लिया। नॉर्वे में यह निर्णय अभियोजन की आपत्ति के बावजूद आया, जबकि ब्राजील में संघीय लोक अभियोजक कार्यालय ने स्वयं इस कदम का समर्थन किया। दोनों ही स्थितियों में अदालतों ने आरोपियों की व्यक्तिगत परिस्थितियों और जांच की प्रगति के बीच संतुलन साधने का प्रयास किया है। नॉर्वे में होयबी की अपील पर सुनवाई अगले वर्ष संभावित है, जबकि ब्राजील में पादरी पोंसियो के खिलाफ मुकदमा अभी शुरू होना बाकी है। दोनों देशों में इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के उल्लंघन पर तत्काल पुनः गिरफ्तारी का प्रावधान है।
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