
गूगल पर जेमिनाई एआई के प्रशिक्षण में कॉपीराइट उल्लंघन का मुकदमा
अमेरिकी प्रकाशकों और लेखकों ने गूगल पर आरोप लगाया है कि उसने जेमिनाई एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए बिना अनुमति लाखों कॉपीराइट पुस्तकों का इस्तेमाल किया, जिससे लेखकों की आय और सृजनात्मकता को खतरा है।
मंगलवार को न्यूयॉर्क की एक अदालत में हाशेट बुक ग्रुप, सेंगेज लर्निंग, एल्सेवियर, लेखक स्कॉट टरो और उनकी प्रकाशन कंपनी एस.सी.आर.आई.बी.ई. ने गूगल के खिलाफ सामूहिक मुकदमा दायर किया। वादी पक्ष के अनुसार, गूगल ने गूगल बुक्स और अन्य सेवाओं के माध्यम से सीमित उपयोग के लिए प्राप्त लाखों कृतियों को गुप्त रूप से कॉपी कर अपने जेमिनाई एआई मॉडल को प्रशिक्षित किया। मुकदमे में दावा किया गया है कि जेमिनाई की सामग्री सृजन की गति और पैमाना मानव लेखकों के लिए अभूतपूर्व प्रतिस्पर्धा उत्पन्न करता है, और यह मॉडल विशिष्ट लेखकों की शैली और रचनात्मक विकल्पों की नकल करने में सक्षम है।
अदालती दस्तावेजों में आरोप लगाया गया है कि गूगल ने कॉपीराइट प्रबंधन सूचना को हटाकर प्रशिक्षण सामग्री के स्रोत को छिपाने का प्रयास किया। वादी पक्ष ने अदालत से गूगल को इन गतिविधियों पर रोक लगाने और अज्ञात राशि के हर्जाने का आदेश देने का अनुरोध किया है। यह मामला अमेरिकी प्रकाशन उद्योग और प्रौद्योगिकी कंपनियों के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है, जहाँ सामग्री निर्माता अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी रास्ते अपना रहे हैं।
यह मुकदमा एआई प्रशिक्षण में कॉपीराइट उल्लंघन को लेकर दायर मामलों की श्रृंखला में नवीनतम है। मई में इन्हीं प्रकाशकों और लेखक ने मेटा के खिलाफ भी इसी तरह के आरोपों पर मुकदमा दायर किया था। अमेरिकी न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले वर्ष एक संघीय न्यायाधीश ने मेटा के पक्ष में आंशिक फैसला सुनाते हुए कॉपीराइट सामग्री के उपयोग को 'उचित उपयोग' माना था। वहीं, एंथ्रोपिक ने लेखकों और प्रकाशकों के साथ 1.5 अरब डॉलर के समझौते को मंजूरी दी थी, लेकिन न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि पुस्तकों का उपयोग प्रशिक्षण के लिए परिवर्तनकारी हो सकता है, जबकि पायरेटेड सामग्री का अन्य उपयोग कानूनी नहीं है।
भारतीय कॉपीराइट विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला वैश्विक स्तर पर एआई विनियमन की दिशा तय कर सकता है। दक्षिण एशिया में, जहाँ डिजिटल सामग्री का तेजी से विस्तार हो रहा है, प्रकाशक और तकनीकी कंपनियाँ अमेरिकी अदालतों के फैसलों पर नजर रखे हुए हैं। भारतीय कानून के तहत एआई प्रशिक्षण में कॉपीराइट सामग्री के उपयोग पर अभी तक कोई स्पष्ट न्यायिक मिसाल नहीं है, लेकिन विधि आयोग की रिपोर्टों में इस मुद्दे पर विस्तृत विचार-विमर्श की आवश्यकता बताई गई है।
फिलहाल, गूगल ने इस मुकदमे पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। अदालत में सुनवाई की तारीख तय होना बाकी है, और वादी पक्ष ने स्थायी निषेधाज्ञा के साथ-साथ वैधानिक क्षतिपूर्ति की माँग की है। अमेरिकी कानूनी हलकों में इस बात पर बहस जारी है कि क्या एआई प्रशिक्षण को 'उचित उपयोग' के दायरे में रखा जा सकता है, या यह सृजनात्मक उद्योगों के लिए एक संरचनात्मक खतरा है।
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.20 | neutral |
|---|---|---|
| चीनी प्रेस | −0.50 | critical |
European and American publishers take Google to court for copyright infringement, seeking justice for the unauthorized use of their works.
The narrative relies on direct quotes from the lawsuit and legal terminology to present the case as a matter of law, without taking an explicit stance.
It does not mention Google's internal risk assessment nor the previous California rulings that recognized fair use for AI training.
Google knowingly violated copyright, as evidenced by its own internal documents estimating billions in fines.
Credibility is built by citing Google's internal documents and previous court rulings, creating a picture of premeditated guilt.
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