
तेल-तनाव के बीच सोना दो-सप्ताह के शिखर से फिसला, बाज़ार की निगाहें फेड बैठक पर
पश्चिम एशिया में सैन्य टकराव से कच्चे तेल की कीमतें छह सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं, जिससे मुद्रास्फीति की आशंका बढ़ी और सोने की चमक फीकी पड़ गई।
वैश्विक बेंचमार्क सोना गुरुवार को अपने दो-सप्ताह के शिखर 4,165.87 डॉलर प्रति औंस से 2% से अधिक की गिरावट के साथ 4,041 डॉलर के आसपास आ गया। यह गिरावट तब दर्ज हुई जब अमेरिका और ईरान के बीच सीधे सैन्य हमलों और यमन के हूती बलों द्वारा लाल सागर में दो सऊदी तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने की खबरों ने कच्चे तेल की कीमतों को 100 डॉलर प्रति बैरल के पार भेज दिया। तेल में यह उछाल मुद्रास्फीति के दबाव का एक प्रमुख कारक बन गया, जिसने निवेशकों की जोखिम गणना को बदल दिया।
तेल की बढ़ती कीमतों ने सीधे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को प्रभावित किया। दो-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड, जो ब्याज दरों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है, 17 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जबकि दस-वर्षीय यील्ड में भी 1% से अधिक की वृद्धि हुई। बाजार की आशंका यह है कि ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान मुद्रास्फीति को फिर से भड़का सकता है, जिससे केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में कटौती करना कठिन हो जाएगा। ऊंची ब्याज दरों की संभावना ने सोने जैसी बिना-यील्ड वाली परिसंपत्तियों के आकर्षण को कम कर दिया, क्योंकि निवेशक बॉन्ड से बेहतर रिटर्न की उम्मीद कर सकते हैं।
तेहरान के बाजारों में, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और मुद्रास्फीति की उम्मीदों ने ईरानी रियाल पर दबाव डाला। डॉलर की मुक्त बाजार दर बढ़कर 1,91,920 तोमान पर पहुंच गई, जबकि हवाला दर 1,51,368 तोमान पर रही। स्थानीय सोने की कीमतों में भी तेजी रही, 18-कैरेट सोना 1.88 करोड़ तोमान प्रति ग्राम से अधिक पर बिका और सिक्का (सोने का सिक्का) 18.95 करोड़ तोमान के स्तर पर पहुंच गया। यह वृद्धि वैश्विक सोने की गिरावट के विपरीत थी, जो स्थानीय मुद्रा की कमजोरी और सुरक्षित-पनाह की मांग को दर्शाती है।
वैश्विक निवेशकों का ध्यान अब पूरी तरह से अगले सप्ताह होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक पर केंद्रित है। सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार, सितंबर में ब्याज दर में वृद्धि की संभावना 77% से बढ़कर 80% हो गई है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक से भी गुरुवार को दरों को स्थिर रखने की उम्मीद है, लेकिन सितंबर में वृद्धि का विकल्प खुला रहेगा। इस बीच, चांदी 4.3% गिरकर 57.15 डॉलर प्रति औंस पर आ गई, प्लैटिनम 3.1% टूटकर 1,593 डॉलर पर और पैलेडियम 2.8% गिरकर 1,255 डॉलर पर आ गया, जो कीमती धातु परिसर में व्यापक दबाव को दर्शाता है।
बाजार के लिए अगला निर्णायक क्षण फेडरल ओपन मार्केट कमेटी का बयान और अध्यक्ष के संकेत होंगे, जो यह स्पष्ट करेंगे कि क्या तेल-प्रेरित मुद्रास्फीति का जोखिम दर-वृद्धि चक्र को लम्बा खींचेगा।
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | 0.00 | neutral |
|---|---|---|
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | 0.00 | neutral |
| अरब खाड़ी प्रेस | 0.00 | neutral |
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | 0.00 | neutral |
Il mercato iraniano registra le oscillazioni dei prezzi dell'oro e delle valute, con l'attenzione rivolta alla svalutazione del rial e all'inflazione interna.
The bloc makes its position plausible by presenting a constant stream of local price data, implying that the global narrative is secondary to domestic economic realities.
The Iranian bloc omits any mention of the US-Iran conflict as a driver, instead attributing gold price movements to oil tensions and Fed meeting without specifying the geopolitical source.
I mercati arabi osservano il calo dell'oro come conseguenza dell'escalation in Medio Oriente e delle aspettative di rialzo dei tassi Fed.
The bloc builds plausibility by linking gold's decline to a clear chain of causes: Middle East conflict → oil rise → inflation fears → Fed rate hike expectations → dollar strength → gold fall.
The Arab bloc omits any detailed discussion of domestic gold prices in local currencies, focusing solely on the global dollar-denominated market.
I mercati del Golfo registrano il ritracciamento dell'oro dal massimo, con l'attenzione sulla riunione Fed.
The bloc presents a concise, factual summary that avoids attributing blame or emphasizing any single cause, maintaining a tone of market observation.
The Gulf bloc omits any mention of the specific US-Iran conflict, using the generic 'Middle East tensions' and not naming Iran.
L'America Latina vede l'oro colpito dall'escalation bellica tra USA e Iran, con il petrolio che sale e la Fed in agguato.
The bloc makes its position plausible by explicitly naming the US-Iran war as the root cause, creating a direct narrative of geopolitical conflict impacting financial markets.
The Latin bloc omits any reference to domestic gold prices in local currencies or the specific impact on Iranian markets.
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