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भू-राजनीति और राजनीतिरविवार, 28 जून 2026

इज़राइल-लेबनान समझौता: हिज़्बुल्लाह का विरोध, सुरक्षा क्षेत्र पर इज़राइल अडिग

अमेरिकी मध्यस्थता में हस्ताक्षरित समझौते को हिज़्बुल्लाह ने 'अमान्य' बताया, जबकि नेतन्याहू ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि कहा और दक्षिणी लेबनान में सैन्य मौजूदगी बनाए रखने की बात दोहराई।

शुक्रवार को वाशिंगटन में इज़राइल, लेबनान और अमेरिका के बीच एक ढांचा समझौते पर हस्ताक्षर हुए, जिसका लक्ष्य दोनों देशों के बीच दशकों से चली आ रही शत्रुता को समाप्त कर शांति की प्रक्रिया शुरू करना है। इसके तहत इज़राइल दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना वापस बुलाएगा, लेकिन यह वापसी पूरी तरह हिज़्बुल्लाह और अन्य गैर-राज्य सशस्त्र समूहों के निरस्त्रीकरण पर निर्भर होगी। इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे 'ऐतिहासिक उपलब्धि' बताते हुए कहा कि जब तक हिज़्बुल्लाह निहत्था नहीं होता, तब तक इज़राइली सेना लेबनानी सीमा के पास 10 किलोमीटर के सुरक्षा क्षेत्र में डटी रहेगी। दूसरी ओर, हिज़्बुल्लाह प्रमुख नईम क़ासिम ने समझौते को 'अमान्य' और 'संप्रभुता का समर्पण' करार दिया।

समझौते को लेकर लेबनानी राजनीति में गहरा विभाजन उभर कर सामने आया है। लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ फोन वार्ता में आश्वासन दिया कि राज्य अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेगा और लेबनानी सेना दो 'पायलट जोन' में सुरक्षा की कमान संभालेगी। वहीं, हिज़्बुल्लाह के सांसद हसन फदलल्लाह ने चेतावनी दी कि हथियार न छोड़ने की स्थिति में यह प्रक्रिया गृह युद्ध का कारण बन सकती है। बेरूत में हिज़्बुल्लाह समर्थकों ने समझौते के विरोध में सड़कें जाम कीं और हवाई अड्डे की ओर ले जाने वाले रास्तों पर टायर जलाए, जो समूह की जमीनी स्तर पर अस्थिरता फैलाने की क्षमता को दर्शाता है।

समझौते का क्रियान्वयन बीते अनुभवों के मद्देनज़र बेहद चुनौतीपूर्ण नज़र आता है। वर्ष 2006 के युद्ध के बाद पारित संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव 1701 हिज़्बुल्लाह को लितानी नदी के उत्तर रखने में विफल रहा, और समूह ने लगभग दो दशकों तक अपनी सैन्य ताकत फिर से खड़ी कर ली। इज़राइली रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने सेना को 'लंबी अवधि तक डटे रहने' के आदेश दिए हैं। हालाँकि, फ्रांस ने कहा है कि वह समझौते के कार्यान्वयन में मदद को तैयार है, और जॉर्डन व संयुक्त अरब अमीरात जैसे क्षेत्रीय देशों ने इसका स्वागत किया है।

वैश्विक कूटनीति के स्तर पर यह समझौता अमेरिका-ईरान के बीच हुए हालिया समझौता ज्ञापन (एमओयू) के साथ विरोधाभास पैदा करता है, जिसमें लेबनान के लिए एक अलग संघर्ष-निवारण तंत्र बनाया गया है और उसमें ईरान को शामिल किया गया है। हिज़्बुल्लाह उसी एमओयू को लागू करने की मांग कर रहा है। फिलहाल, दो परीक्षण क्षेत्रों में लेबनानी सेना की तैनाती और इज़राइल की वापसी पर सभी की निगाहें हैं। यह प्रक्रिया तय करेगी कि क्या बेरूत सरकार हिज़्बुल्लाह को निहत्था करने में सक्षम है, या क्षेत्र में तनाव भड़कने की आशंका बरकरार रहेगी।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

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लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
इज़राइली प्रेसभारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस
इज़राइली प्रेस
विजयव्यावहारिकता

Netanyahu presents the deal as a historic victory that strengthens Israel and weakens Hezbollah and Iran, reaffirming Israel's right to maintain a security zone in southern Lebanon until disarmament. The strike is portrayed as a necessary defensive action against a threat.

भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस
आक्रोशसंदेह

Hezbollah's leader rejects the US-brokered deal as a humiliating surrender that legitimizes Israeli occupation and violates Lebanese sovereignty. The group vows to continue resistance until full Israeli withdrawal, dismissing the framework as null and void.

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इज़राइल-लेबनान समझौता: हिज़्बुल्लाह का विरोध, सुरक्षा क्षेत्र पर इज़राइल अडिग

अमेरिकी मध्यस्थता में हस्ताक्षरित समझौते को हिज़्बुल्लाह ने 'अमान्य' बताया, जबकि नेतन्याहू ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि कहा और दक्षिणी लेबनान में सैन्य मौजूदगी बनाए रखने की बात दोहराई।

शुक्रवार को वाशिंगटन में इज़राइल, लेबनान और अमेरिका के बीच एक ढांचा समझौते पर हस्ताक्षर हुए, जिसका लक्ष्य दोनों देशों के बीच दशकों से चली आ रही शत्रुता को समाप्त कर शांति की प्रक्रिया शुरू करना है। इसके तहत इज़राइल दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना वापस बुलाएगा, लेकिन यह वापसी पूरी तरह हिज़्बुल्लाह और अन्य गैर-राज्य सशस्त्र समूहों के निरस्त्रीकरण पर निर्भर होगी। इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे 'ऐतिहासिक उपलब्धि' बताते हुए कहा कि जब तक हिज़्बुल्लाह निहत्था नहीं होता, तब तक इज़राइली सेना लेबनानी सीमा के पास 10 किलोमीटर के सुरक्षा क्षेत्र में डटी रहेगी। दूसरी ओर, हिज़्बुल्लाह प्रमुख नईम क़ासिम ने समझौते को 'अमान्य' और 'संप्रभुता का समर्पण' करार दिया।\n\nसमझौते को लेकर लेबनानी राजनीति में गहरा विभाजन उभर कर सामने आया है। लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ फोन वार्ता में आश्वासन दिया कि राज्य अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेगा और लेबनानी सेना दो 'पायलट जोन' में सुरक्षा की कमान संभालेगी। वहीं, हिज़्बुल्लाह के सांसद हसन फदलल्लाह ने चेतावनी दी कि हथियार न छोड़ने की स्थिति में यह प्रक्रिया गृह युद्ध का कारण बन सकती है। बेरूत में हिज़्बुल्लाह समर्थकों ने समझौते के विरोध में सड़कें जाम कीं और हवाई अड्डे की ओर ले जाने वाले रास्तों पर टायर जलाए, जो समूह की जमीनी स्तर पर अस्थिरता फैलाने की क्षमता को दर्शाता है।\n\nसमझौते का क्रियान्वयन बीते अनुभवों के मद्देनज़र बेहद चुनौतीपूर्ण नज़र आता है। वर्ष 2006 के युद्ध के बाद पारित संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव 1701 हिज़्बुल्लाह को लितानी नदी के उत्तर रखने में विफल रहा, और समूह ने लगभग दो दशकों तक अपनी सैन्य ताकत फिर से खड़ी कर ली। इज़राइली रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने सेना को 'लंबी अवधि तक डटे रहने' के आदेश दिए हैं। हालाँकि, फ्रांस ने कहा है कि वह समझौते के कार्यान्वयन में मदद को तैयार है, और जॉर्डन व संयुक्त अरब अमीरात जैसे क्षेत्रीय देशों ने इसका स्वागत किया है।\n\nवैश्विक कूटनीति के स्तर पर यह समझौता अमेरिका-ईरान के बीच हुए हालिया समझौता ज्ञापन (एमओयू) के साथ विरोधाभास पैदा करता है, जिसमें लेबनान के लिए एक अलग संघर्ष-निवारण तंत्र बनाया गया है और उसमें ईरान को शामिल किया गया है। हिज़्बुल्लाह उसी एमओयू को लागू करने की मांग कर रहा है। फिलहाल, दो परीक्षण क्षेत्रों में लेबनानी सेना की तैनाती और इज़राइल की वापसी पर सभी की निगाहें हैं। यह प्रक्रिया तय करेगी कि क्या बेरूत सरकार हिज़्बुल्लाह को निहत्था करने में सक्षम है, या क्षेत्र में तनाव भड़कने की आशंका बरकरार रहेगी।

स्रोतों में मतभेद

भू-राजनीति और राजनीति · 3 स्रोत · 2 भाषाएँ

20%कम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

समर्थक11%
निंदक89%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 2 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
इज़राइली प्रेसभारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस
इज़राइली प्रेस
विजयव्यावहारिकता

Netanyahu presents the deal as a historic victory that strengthens Israel and weakens Hezbollah and Iran, reaffirming Israel's right to maintain a security zone in southern Lebanon until disarmament. The strike is portrayed as a necessary defensive action against a threat.

भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस
आक्रोशसंदेह

Hezbollah's leader rejects the US-brokered deal as a humiliating surrender that legitimizes Israeli occupation and violates Lebanese sovereignty. The group vows to continue resistance until full Israeli withdrawal, dismissing the framework as null and void.

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