
कनाडा की ऐतिहासिक जीत पर चोट का साया: कतर को 6-0 से रौंदा, कोने की टूटी टांग ने जश्न फीका किया
वैंकूवर में पहली बार विश्व कप मैच जीतने वाले मेज़बान कनाडा ने नौ खिलाड़ियों वाले कतर को ध्वस्त किया, लेकिन इस्माइल कोने की भयावह चोट ने पूरे स्टेडियम को झकझोर दिया।
कनाडा ने गुरुवार रात वैंकूवर के बीसी प्लेस स्टेडियम में फुटबॉल इतिहास का सबसे बड़ा विरोधाभास जिया। एक ओर जोनाथन डेविड की हैट्रिक की बदौलत टीम ने कतर को 6-0 से कुचलकर अपनी पहली विश्व कप जीत दर्ज की और नॉकआउट की राह लगभग तय कर ली, वहीं दूसरी ओर मिडफील्डर इस्माइल कोने की बायीं टांग की भीषण चोट ने 52,497 दर्शकों की खुशी को सन्नाटे में बदल दिया। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फैनटिनो की मौजूदगी में खेले गए इस मुकाबले ने कनाडाई खेल प्रेमियों को एक साथ जश्न और मातम का अनुभव कराया।
मैच की शुरुआत से ही जेसी मार्श की टीम ने आक्रामक रुख अपनाया। 16वें मिनट में काइल लारिन ने गोलकीपर के रिबाउंड पर पहला गोल ठोका, फिर डेविड ने 29वें मिनट में शानदार वॉली से स्कोर 2-0 किया। 33वें मिनट में कतर के होमम अहमद को ताजोन ब्यूकैनन पर अंतिम खिलाड़ी के रूप में फाउल करने पर सीधा लाल कार्ड मिला—वीएआर ने पेनल्टी को फ्री किक में बदला लेकिन कार्ड का रंग गहरा कर दिया। पहले हाफ के इंजरी टाइम में डेविड ने दूसरा गोल दागकर स्कोर 3-0 कर दिया। दूसरे हाफ की शुरुआत में ही असीम मादिबो ने कोने पर खतरनाक टैकल किया, जिससे उनकी टांग स्पष्ट रूप से टूट गई। मादिबो को भी लाल कार्ड दिखाया गया और कतर नौ खिलाड़ियों पर सिमट गया। इस घटना के बाद कोने के स्थान पर उतरे नाथन सालिबा ने 64वें मिनट में शानदार फ्री किक से चौथा गोल किया और अपने साथी की नंबर 8 की जर्सी दिखाकर भावुक श्रद्धांजलि दी। बाद में मोहम्मद मनाई के आत्मघाती गोल और डेविड के तीसरे गोल ने स्कोर 6-0 तक पहुंचा दिया।
यह जीत कनाडा के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक रही। 1986 और 2022 में खेले गए छह मैचों में एक ड्रॉ और पांच हार झेलने वाली टीम ने न केवल पहली जीत हासिल की, बल्कि कॉनकाकाफ क्षेत्र की किसी टीम द्वारा विश्व कप में दर्ज सबसे बड़ी जीत भी अपने नाम की। डेविड ने लियोनेल मेसी के बाद इस टूर्नामेंट की दूसरी हैट्रिक लगाई। यूरोपीय मीडिया ने इस बात पर ध्यान खींचा कि बायर्न म्यूनिख के स्टार अल्फोंसो डेविस को चोट से उबरने के बावजूद मैदान पर उतारने की जरूरत नहीं पड़ी—कनाडा की गहराई कितनी मजबूत हो गई है। वहीं खाड़ी और अरब मीडिया ने कतर की रक्षात्मक विफलता और अनुशासनहीनता को रेखांकित किया; जूलेन लोपेतेगी की टीम लगातार दूसरे मैच में लाल कार्ड झेलने के बाद अब अस्तित्व की लड़ाई में है।
ग्रुप बी की तस्वीर अब साफ हो चली है। कनाडा और स्विट्जरलैंड दोनों के चार अंक हैं, लेकिन बेहतर गोल अंतर के कारण मेज़बान शीर्ष पर है। 24 जून को वैंकूवर में दोनों के बीच सीधी टक्कर होगी, जहां कनाडा को ग्रुप विजेता बनने के लिए ड्रॉ भी काफी होगा। कतर और बोस्निया एक-एक अंक के साथ सिएटल में भिड़ेंगे; दोनों के लिए जीत अनिवार्य है, वरना सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान की टीम के रूप में आगे बढ़ने की उम्मीद भी धूमिल हो जाएगी।
कोने की चोट ने पूरे टूर्नामेंट पर एक उदास छाया डाल दी है। मैदान पर रोते हुए डेविड और स्तब्ध खिलाड़ियों की तस्वीरें वैश्विक सुर्खियों में रहीं। कोच मार्श ने कहा कि टीम उनके लिए सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा जुटाएगी, लेकिन यह क्षति खेल से परे एक मानवीय पीड़ा बन गई। कनाडा अब एक ओर नॉकआउट में पहुंचने के सपने को साकार करने की कगार पर है, तो दूसरी ओर अपने एक अहम स्तंभ के बिना आगे की राह तय करने की चुनौती से जूझ रहा है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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कनाडा ने कतर को 6-0 से रौंदकर विश्व कप में अपनी पहली ऐतिहासिक जीत दर्ज की, लेकिन इस्माइल कोने की गंभीर टांग की चोट ने जश्न को फीका कर दिया। यह जीत कनाडा को नॉकआउट चरण के करीब ले जाती है, लेकिन मिडफील्डर की चोट ने खुशी पर ग्रहण लगा दिया।
कनाडा की कतर पर 6-0 की जीत इस्माइल कोने की भयानक चोट के कारण फीकी पड़ गई, जिन्होंने एक कठोर फाउल के बाद अपना बायां पैर तोड़ दिया। मेज़बानों ने अपनी पहली विश्व कप जीत का जश्न मनाया, लेकिन चोट के झटके ने पार्टी बर्बाद कर दी और एक प्रमुख खिलाड़ी को खोने की चिंता छोड़ दी।
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