
स्टोनहेंज का 5,000 साल पुराना लकड़ी का पूर्वज मिला, अफ्रीका और एशिया में भी मिले मानव विकास के नए सुराग
ब्रिटेन में सूर्य पूजा का सबसे प्राचीन साक्ष्य, दक्षिण अफ्रीका में 17 लाख साल पहले आग के इस्तेमाल के संकेत और इंडोनेशिया में 2 लाख साल पुरानी मानव बस्ती — तीन महाद्वीपों की खोजें मानव सभ्यता की रेखीय कहानी को चुनौती दे रही हैं।
दक्षिण-पश्चिम इंग्लैंड के विल्टशायर में स्टोनहेंज से महज पाँच किलोमीटर दूर बुलफ़ोर्ड गाँव के पास पुरातत्वविदों को एक ऐसी संरचना मिली है जो प्रसिद्ध पत्थरों के घेरे की ‘पूर्वज’ कही जा सकती है। वेसेक्स आर्कियोलॉजी की टीम ने ज़मीन में दो बड़े गड्ढे खोद निकाले, जिनमें कभी ऊँचे लकड़ी के खंभे गड़े थे। रेडियोकार्बन डेटिंग से पता चला कि यह ढाँचा लगभग 5,000 वर्ष पुराना है — स्टोनहेंज के मुख्य चरण से कम-से-कम 500 साल पहले का। सबसे चौंकाने वाली बात इसकी खगोलीय सटीकता है: दोनों खंभे 120 मीटर की दूरी पर इस तरह रखे गए थे कि वे ग्रीष्म संक्रांति के सूर्योदय और शीत संक्रांति के सूर्यास्त के ठीक सीध में आते थे — ठीक वैसे ही जैसे बाद में विशाल पत्थरों को संरेखित किया गया। खुदाई में मिले मिट्टी के बर्तन, चकमक औज़ार और जानवरों की हड्डियाँ इस बात की पुष्टि करते हैं कि यह स्थल किसी धार्मिक या सामुदायिक अनुष्ठान का केंद्र रहा होगा।
यह खोज यूरोपीय प्रागैतिहासिक काल की समझ को एक बड़ा धक्का देती है। अब तक माना जाता था कि स्टोनहेंज जैसे स्मारकों में सूर्य-संरेखण की परंपरा नवपाषाण काल के उत्तरार्ध में शुरू हुई, लेकिन बुलफ़ोर्ड का लकड़ी का ‘प्रोटोटाइप’ बताता है कि ब्रिटेन में सूर्य पूजा और खगोलीय ज्ञान का चलन 3,000 ईसा पूर्व तक पूरी तरह विकसित हो चुका था। पुरातत्वविदों के अनुसार, यह कोई अकेला मामला नहीं है; इस क्षेत्र में ऐसे ही कई लकड़ी के घेरे मिल चुके हैं, जो संकेत देते हैं कि पत्थरों के स्मारकों से पहले लकड़ी के ढाँचों का एक समृद्ध अनुष्ठानिक परिदृश्य मौजूद था।
जब नज़र यूरोप से हटकर अफ्रीका और एशिया की ओर जाती है, तो तस्वीर और भी व्यापक हो जाती है। दक्षिण अफ्रीका की वंडरवर्क गुफा में चूना पत्थर की गहराइयों से मिली हड्डियों के सूक्ष्म टुकड़ों पर एक नए अध्ययन ने आग के इस्तेमाल के सबसे पुराने साक्ष्य को लगभग 10.7 से 17.9 लाख साल पीछे धकेल दिया है। विशेष प्रकाश तरंगों में ये हड्डियाँ ऐसे व्यवहार करती हैं मानो उनमें गर्मी की स्मृति बसी हो, जिससे संकेत मिलता है कि प्रारंभिक मानव पूर्वज आग पर पूर्ण नियंत्रण से पहले ही उसके साथ रहना सीख रहे थे। इसी तरह, इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप पर लियांग बुलु बेट्टुए गुफा में पुरातत्वविदों ने आठ मीटर गहरी खुदाई में 1,32,300 से 2,08,400 साल पुरानी परतों में पशुओं के काटने के निशान और पत्थर के औज़ार खोजे हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि आधुनिक मानव के स्पष्ट आगमन से बहुत पहले ही दक्षिण-पूर्व एशिया के द्वीपों में मानव-सदृश प्रजातियाँ सक्रिय थीं।
ये तीनों खोजें अलग-अलग महाद्वीपों से आई हैं, लेकिन इनका सामूहिक संदेश एक जैसा है: मानव विकास की कहानी सीधी रेखा में नहीं चली। ब्रिटेन का लकड़ी का स्मारक बताता है कि जटिल खगोलीय अनुष्ठान हमारी सोच से कहीं पहले शुरू हो गए थे; अफ्रीकी गुफा आग से रिश्ते की शुरुआत को लाखों साल पीछे ले जाती है; और सुलावेसी की गुफा इस धारणा को तोड़ती है कि द्वीपीय दक्षिण-पूर्व एशिया में मानव बस्ती अपेक्षाकृत हाल की घटना है। भारतीय उपमहाद्वीप के संदर्भ में देखें तो यह निष्कर्ष विशेष रूप से प्रासंगिक हैं, क्योंकि दक्षिण एशिया भी प्रारंभिक मानव प्रवास के मार्ग पर स्थित था और यहाँ से मिलने वाले प्रागैतिहासिक साक्ष्य अब तक पूरी तरह खोजे नहीं गए हैं।
आगे का विश्लेषण इस ओर इशारा करता है कि पुरातत्व अब ‘एकल उत्पत्ति’ के मॉडल से आगे बढ़कर बहु-केंद्रित और समानांतर विकास की संभावनाओं को गंभीरता से ले रहा है। जिस तरह स्टोनहेंज का प्रोटोटाइप दिखाता है कि स्मारकीयता का विचार धीरे-धीरे लकड़ी से पत्थर की ओर विकसित हुआ, ठीक उसी तरह आग पर नियंत्रण और द्वीपों तक पहुँचने की क्षमता भी किसी एक प्रजाति या एक क्षण की उपलब्धि नहीं रही होगी। ये खोजें हमें याद दिलाती हैं कि मानव पूर्वजों की सांस्कृतिक और तकनीकी जटिलता हमारे अनुमान से कहीं अधिक गहरी और पुरानी है, और आने वाले वर्षों में अफ्रीका, एशिया और यूरोप की गुफाएँ व खुले स्थल इस गाथा के और भी अध्याय खोल सकते हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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मेक्सिको के वेराक्रूज़ में एक पूर्व-हिस्पैनिक मंच मिला है जिसमें गोलाकार पत्थर और माया शैली की एक विशाल मूर्ति है। खाड़ी तट पर यह अभूतपूर्व खोज प्राचीन सूर्य पंथों पर नई रोशनी डालती है और मेसोअमेरिकी अनुष्ठानों के इतिहास को फिर से लिखती है।
स्टोनहेंज से कुछ किलोमीटर दूर 5000 साल पुरानी एक लकड़ी की संरचना मिली है जो संक्रांतियों के अनुसार खगोलीय रूप से संरेखित है। पुरातत्वविद इसे प्रसिद्ध पत्थर के घेरे का संभावित प्रोटोटाइप मानते हैं, जो उससे पाँच सौ साल पुराना है।
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