
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण: अनिवार्य बीमा, भविष्य में शुल्क की चेतावनी
अमेरिका-ईरान अंतरिम समझौते के तहत 60 दिनों के लिए शुल्क माफ, लेकिन ईरानी प्राधिकरण ने भविष्य में बीमा शुल्क लगाने का अधिकार सुरक्षित रखा, जिससे वैश्विक जहाजरानी उद्योग चिंतित है।
ईरान की फ़ारस की खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण (पीजीएसए) ने शुक्रवार को घोषणा की कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले सभी जहाज़ों के लिए अनिवार्य बीमा पॉलिसी खरीदना और ईरानी अनुमति लेना आवश्यक होगा। प्राधिकरण के दस्तावेज़ के अनुसार, फ़िलहाल यह बीमा मुफ़्त है, लेकिन भविष्य में इस पर शुल्क लगाया जा सकता है। साथ ही, जहाज़ों को ईरान के तट के साथ निर्धारित मार्ग का ही अनुसरण करना होगा और कोई भी वैकल्पिक मार्ग प्रतिबंधित रहेगा। यह क़दम अमेरिका और ईरान के बीच इसी सप्ताह हस्ताक्षरित अंतरिम शांति समझौते के ठीक बाद उठाया गया, जिसमें 60 दिनों के लिए जलडमरूमध्य में मुफ़्त आवाजाही की गारंटी दी गई है।
अमेरिकी पक्ष ने इस क़दम पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी नौसेना ने ओमान के तटीय मार्ग से 20 जहाज़ों को सुरक्षित निकलने की सूचना दी, और पश्चिमी नौसेना समूहों ने जहाज़ों को इसी मार्ग का उपयोग करने की सिफारिश की है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट पहले ही पीजीएसए को 'मज़ाक' कह चुके हैं और इस संस्था पर प्रतिबंध लगा चुके हैं। ब्रिटेन के नेतृत्व में अमेरिकी सहयोगी देश ट्रंप प्रशासन पर दबाव डाल रहे हैं कि वह ईरान के शुल्क लगाने के किसी भी प्रयास को स्वीकार या सामान्य न करे। जहाजरानी उद्योग के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि इस तरह के शुल्क अंतरराष्ट्रीय समुद्री क़ानून का उल्लंघन होंगे और दुनिया के अन्य जलमार्गों पर भी ख़तरनाक मिसाल क़ायम कर सकते हैं।
हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के अनुसार, 60 दिनों की अवधि के दौरान सभी सुरक्षा, पर्यावरण और बीमा शुल्क माफ़ रहेंगे, लेकिन ईरानी प्राधिकरण ने भविष्य में शुल्क वसूलने का अधिकार सुरक्षित रखा है। इस बीच, ईरानी विदेश मंत्रालय ने लेबनान पर इज़राइली हमलों की निंदा करते हुए कहा कि अमेरिका इसके लिए सीधे तौर पर ज़िम्मेदार है और लेबनान में युद्ध समाप्त करना समझौते का अभिन्न अंग है। इज़राइली सरकार ने इस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और दक्षिणी लेबनान में सैन्य कार्रवाई जारी रखी है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने इज़राइल की प्रतिक्रिया को 'अजीब घबराहट' और 'बचकाना व्यवहार' कहा है। समझौते में परमाणु हथियार न बनाने की ईरानी प्रतिबद्धता, अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील, और ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर की अंतरराष्ट्रीय निधि का प्रावधान भी शामिल है।
व्यावहारिक स्तर पर, शुक्रवार को जलडमरूमध्य से दिखाई देने वाला तेल यातायात तेज़ी से घट गया, जबकि पाकिस्तानी नौसेना ने ओमान के तट के पास एक खदान दिखने की सूचना दी। दूसरी ओर, समझौते के बाद ईरान ने चाबहार बंदरगाह से लाखों बैरल तेल की ढुलाई शुरू कर दी है। स्विस विदेश मंत्रालय के अनुसार, जिनेवा में होने वाला हस्ताक्षर समारोह रद्द कर दिया गया, लेकिन अमेरिका, ईरान, पाकिस्तान और क़तर के प्रतिनिधिमंडल तकनीकी वार्ता शुरू करने के लिए शुक्रवार को स्विट्ज़रलैंड में मिले। अब 60 दिनों की समय-सीमा के भीतर खदानों की सफ़ाई, परमाणु निगरानी और पारगमन नियमों पर विस्तृत बातचीत होगी। इसके नतीजे तय करेंगे कि ईरान का शुल्क प्रस्ताव स्थायी रूप लेता है या नहीं, जिसका भारत समेत दक्षिण एशिया की ऊर्जा सुरक्षा पर गहरा असर पड़ेगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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ईरान ने अमेरिका के साथ 60 दिनों की बातचीत की अवधि के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में पारगमन शुल्क अस्थायी रूप से माफ कर दिया है, लेकिन जहाजों को 48 घंटे पहले अनुमति लेनी होगी और निर्धारित मार्गों का पालन करना होगा। एक अनिवार्य बीमा पॉलिसी शुरू की गई है, जो फिलहाल मुफ्त है, भविष्य में लागत का संकेत देती है। इस कदम को नियंत्रण बनाए रखते हुए सद्भावना के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
ईरान युद्धविराम समझौते के बावजूद सभी जहाजों पर अनिवार्य परमिट और जबरन बीमा लगाकर होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। इस कदम से नौवहन की स्वतंत्रता को खतरा है और वैश्विक तेल प्रवाह अवरुद्ध हो सकता है, जिससे तत्काल सुरक्षा चेतावनी जारी हो गई है। पश्चिमी शक्तियां एक खतरनाक वृद्धि की निंदा करती हैं जो अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को रणनीतिक टोल गेट में बदल देती है।