
चीन का लाइनशाइन सुपरकंप्यूटर टॉप500 में शीर्ष पर, नौ वर्षों बाद वापसी
2.19 एक्साफ्लॉप्स प्रदर्शन के साथ शेनझेन के लाइनशाइन ने अमेरिकी एल कैपिटन को पीछे छोड़ दिया, पूर्णतः घरेलू आर्किटेक्चर पर चीन की तकनीकी स्वायत्तता की ओर बड़ा कदम।
हैम्बर्ग में आयोजित आईएससी 2026 सम्मेलन में जारी टॉप500 सूची के अनुसार, चीन के शेनझेन स्थित सुपरकंप्यूटर ‘लाइनशाइन’ ने 2.198 एक्साफ्लॉप्स की सतत प्रदर्शन क्षमता के साथ पहला स्थान हासिल किया। इसने अमेरिकी एल कैपिटन (1.809 एक्साफ्लॉप्स) को पीछे छोड़ दिया, जो लॉरेंस लिवरमोर राष्ट्रीय प्रयोगशाला में परमाणु शस्त्रागार के अनुरक्षण हेतु उपयोग होता है। यह 2017 के बाद पहली बार है जब किसी चीनी प्रणाली ने यह शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। इस सूची में अब पाँच एक्सास्केल प्रणालियाँ शामिल हैं—शेष चार अमेरिका और जर्मनी में स्थित हैं।
लाइनशाइन को शेनझेन क्लाउड कंप्यूटिंग केंद्र ने विकसित किया है और यह राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग केंद्र, शेनझेन में संचालित है। इसकी विशेषता पूर्णतः घरेलू आर्किटेक्चर है: इसमें चीनी एलएक्स2 प्रोसेसर, काइलिन ऑपरेटिंग सिस्टम और स्वदेशी मेमोरी व नेटवर्किंग तकनीक का उपयोग किया गया है, तथा यह ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (जीपीयू) पर निर्भर नहीं है। केवल सीपीयू पर आधारित यह पहली प्रणाली है जिसने 2 एक्साफ्लॉप्स का आँकड़ा पार किया। इसकी बिजली खपत 42.2 मेगावाट है। हालाँकि, टॉप500 का लिनपैक बेंचमार्क पारंपरिक वैज्ञानिक गणना पर केंद्रित है; सम्मेलन में उपस्थित विशेषज्ञों ने रेखांकित किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) कार्यभार के लिए अनुकूलित बेंचमार्क पर लाइनशाइन चौथे स्थान पर है। माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न और गूगल जैसी अमेरिकी क्लाउड कंपनियों ने एआई के लिए विशाल अवसंरचना विकसित की है, परंतु उन्होंने इसे सार्वजनिक रैंकिंग में शामिल नहीं किया, जिससे सीधी तुलना सीमित रहती है।
शेनझेन राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग केंद्र ने इस उपलब्धि को विदेशी प्रौद्योगिकी प्रतिबंधों के बावजूद एक स्वतंत्र सॉफ्टवेयर-हार्डवेयर पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में ‘ऐतिहासिक कदम’ बताया। टॉप500 सूची के आयोजकों में शामिल टेनेसी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जैक डोंगरा ने कहा कि अमेरिकी निर्यात नियंत्रण चीन की उन्नत चिप्स तक पहुँच को धीमा कर सकते हैं, लेकिन साथ ही घरेलू विकल्पों के लिए प्रबल प्रोत्साहन भी देते हैं। उन्होंने माना कि चीन का शीर्ष पर पहुँचना ‘पूरी तरह अप्रत्याशित नहीं’ था। यह घटनाक्रम अमेरिका-चीन प्रौद्योगिकी प्रतिद्वंद्विता को और तीव्र करता है, और इसका प्रभाव दक्षिण एशिया की उभरती सुपरकंप्यूटिंग महत्वाकांक्षाओं पर भी पड़ सकता है, जहाँ भारत जैसे देश एक्सास्केल क्षमता की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
टॉप500 सूची वर्ष में दो बार अद्यतन होती है; अगला संस्करण नवंबर 2026 में जारी होगा। इससे यह स्पष्ट होगा कि क्या लाइनशाइन अपनी बढ़त बनाए रखता है या अमेरिकी क्लाउड प्रदाताओं की अनदेखी प्रणालियाँ अथवा अन्य देशों की नई मशीनें रैंकिंग में बदलाव लाती हैं। साथ ही, पारंपरिक एचपीसी बेंचमार्क और एआई कार्यभार के बीच बढ़ती दूरी को देखते हुए नए मूल्यांकन मानदंडों पर चर्चा तेज़ होने की संभावना है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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चीन ने पूरी तरह से घरेलू डिज़ाइन वाले लाइनशाइन सिस्टम की बदौलत आठ साल बाद वैश्विक सुपरकंप्यूटर रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल कर लिया है। यह उपलब्धि देश की तकनीकी आत्मनिर्भरता को दर्शाती है और संयुक्त राज्य अमेरिका के खिलाफ एक वापसी का प्रतीक है। पुनः प्राप्त नेतृत्व को चीनी कंप्यूटिंग शक्ति के लिए एक रणनीतिक मील का पत्थर बताया जा रहा है।
एक चीनी सुपरकंप्यूटर ने 2017 के बाद पहली बार संयुक्त राज्य अमेरिका से दुनिया की सबसे तेज़ मशीन का खिताब छीन लिया है। यह सिस्टम विशेष ग्राफिक्स चिप्स पर निर्भर हुए बिना केवल मानक माइक्रोप्रोसेसरों का उपयोग करता है। इस खबर को TOP500 रैंकिंग के अपडेट के रूप में रिपोर्ट किया गया है, जिसमें लगभग एक दशक के अमेरिकी प्रभुत्व के अंत को रेखांकित किया गया है।
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