
AI डेटा सेंटरों की भूख ने बढ़ाए मैकबुक-आईपैड के दाम, अब आईफोन पर मंडरा रहा संकट
मेमोरी चिप की वैश्विक किल्लत के चलते एप्पल ने अपने लैपटॉप और टैबलेट की कीमतों में 15 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी, जिससे कंपनी के शेयर 6 प्रतिशत से अधिक लुढ़क गए।
एप्पल ने गुरुवार को अपने मैकबुक, आईपैड और कई एक्सेसरीज की वैश्विक कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के विस्तार से उपजे एक नए आर्थिक दबाव का सबसे ठोस संकेत है। अमेरिकी बाजार में मैकबुक प्रो 14-इंच की कीमत 1,700 डॉलर से बढ़कर 2,000 डॉलर और आईपैड एयर 600 डॉलर से 750 डॉलर पर पहुंच गई। भारत में इसका असर और गहरा दिखा, जहां बेस 14-इंच मैकबुक प्रो की कीमत में 70,000 रुपये तक का इजाफा हुआ। इस घोषणा के तुरंत बाद एप्पल के शेयर 6.2 प्रतिशत तक टूट गए, जिससे कंपनी की बाजार हैसियत से लगभग 275 अरब डॉलर साफ हो गए।
इस मूल्य वृद्धि की जड़ में AI डेटा सेंटरों का तीव्र निर्माण है। दक्षिण कोरिया और ताइवान की मेमोरी चिप निर्माता कंपनियों, जैसे सैमसंग और एसके हाइनिक्स, ने अपनी उत्पादन क्षमता का बड़ा हिस्सा उच्च-प्रदर्शन वाली मेमोरी (HBM) की ओर मोड़ दिया है, जिसकी मांग एनवीडिया जैसी AI चिप कंपनियां कर रही हैं। इससे उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए जरूरी DRAM और NAND स्टोरेज चिप्स की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। काउंटरपॉइंट रिसर्च और ट्रेंडफोर्स के आंकड़ों के अनुसार, 2025 के अंत से हर तिमाही मेमोरी चिप की कीमतों में 50 से 100 प्रतिशत तक की वृद्धि हो रही है, और यह स्थिति 2027 तक बनी रहने का अनुमान है। उद्योग जगत ने इस संकट को ‘रैमागेडन’ (RAMageddon) का नाम दिया है।
एप्पल अकेला प्रभावित नहीं है। उत्तरी अमेरिका में माइक्रोसॉफ्ट ने अपने सरफेस लैपटॉप और एक्सबॉक्स कंसोल की कीमतें बढ़ा दी हैं, जबकि डेल और एचपी ने भी अपने पीसी महंगे किए हैं। एशिया में, जापान की सोनी और निंटेंडो ने प्लेस्टेशन और स्विच कंसोल के दाम बढ़ाए हैं, और चीन की लेनोवो ने सर्वर और पीसी की कीमतों में इजाफा किया है। यूरोपीय बाजारों में भी यह झटका साफ दिखा, जहां फ्रांस में मैकबुक प्रो की कीमत 400 यूरो तक उछल गई। लैटिन अमेरिकी देशों, जैसे अर्जेंटीना, में पहले से ऊंची कीमतों पर यह वृद्धि और भारी पड़ेगी, जहां आयात शुल्क और मुद्रा अंतर पहले से ही उपकरणों को अमेरिकी मूल्य से 40-55 प्रतिशत महंगा बना देते हैं।
एप्पल के निवर्तमान सीईओ टिम कुक ने इस स्थिति को “सौ साल की बाढ़” करार दिया था और कहा था कि मूल्य वृद्धि “अपरिहार्य” है। कंपनी ने अभी तक आईफोन, एप्पल वॉच और एयरपॉड्स की कीमतों को नहीं छुआ है, लेकिन साफ संकेत दिया है कि भविष्य में अन्य उत्पादों पर भी असर पड़ सकता है। विश्लेषकों का अनुमान है कि सितंबर में लॉन्च होने वाले आईफोन 18 प्रो और संभावित फोल्डेबल आईफोन की कीमत में 150 से 200 डॉलर तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
अब सारी निगाहें 1 सितंबर को कार्यभार संभालने वाले नए सीईओ जॉन टर्नस पर होंगी, जिनके सामने यह आपूर्ति संकट और नई आईफोन श्रृंखला का लॉन्च पहली बड़ी चुनौती होगी। उपभोक्ताओं के लिए अगला ठोस पड़ाव सितंबर में आईफोन की नई कीमतों का खुलासा होगा, जो यह तय करेगा कि AI की लागत का बोझ स्मार्टफोन बाजार तक कितनी गहराई तक पहुंचता है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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एप्पल ने मैकबुक और आईपैड की कीमतों में लगभग 20% की वृद्धि की है, और इस वृद्धि को सीधे तौर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उछाल से प्रेरित मेमोरी चिप की लागत में वृद्धि से जोड़ा है। यह पहली बार है जब किसी बड़ी उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी ने मूल्य वृद्धि का सीधा कारण एआई से संबंधित मांग को बताया है, जो इस बात का संकेत है कि प्रौद्योगिकी का प्रभाव अब आम खरीदारों तक पहुँच रहा है।
मैकबुक और आईपैड अभी-अभी काफी महंगे हो गए हैं, कीमतों में 300 डॉलर तक की वृद्धि हुई है, क्योंकि एआई उछाल मेमोरी चिप की लागत बढ़ा रहा है। सीईओ टिम कुक ने चेतावनी दी कि ये वृद्धि 'अपरिहार्य' थी, और सीधे एआई उछाल को दोषी ठहराया। उपभोक्ता अब एआई क्रांति की वित्तीय चपेट में आ रहे हैं।
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