
मेक्सिको बनाम इक्वाडोर: एज़्टेका में अभेद्य रक्षा और पुनर्जीवित ला त्रि की परीक्षा
ग्रुप चरण में बिना गोल खाए शत-प्रतिशत जीत दर्ज करने वाला मेज़बान मेक्सिको, जर्मनी को हराकर आए इक्वाडोर के ख़िलाफ़ एज़्टेका स्टेडियम में अंतिम-32 के मुक़ाबले में उतरेगा।
मेक्सिको सिटी के एज़्टेका स्टेडियम में मंगलवार रात जब रेफ़री स्लाव्को विंचिच सीटी बजाएंगे, तब 80,000 से अधिक दर्शकों की गूंज में एक ऐतिहासिक दबाव और अवसर का संगम होगा। मेज़बान मेक्सिको ने ग्रुप ए में दक्षिण अफ़्रीका (2-0), दक्षिण कोरिया (1-0) और चेक गणराज्य (3-0) को हराकर न केवल नौ अंक जुटाए, बल्कि पूरे टूर्नामेंट में इकलौती टीम बनी जिसने एक भी गोल नहीं खाया। यह रक्षात्मक अभेद्यता और गोलकीपर राउल रांगेल की चट्टानी मौजूदगी, जेवियर अगुइरे की टीम को आत्मविश्वास की उस ऊंचाई पर ले गई है जहां ‘पांचवां मैच’ (क्वार्टर फ़ाइनल) का सपना अब महज़ कल्पना नहीं रहा।
दूसरी ओर, इक्वाडोर की राह कहीं अधिक ऊबड़-खाबड़ रही। सेबास्टियन बेकाचेचे की टीम ग्रुप ई में आइवरी कोस्ट से 0-1 से हारी, कुराकाओ से गोलरहित ड्रॉ खेली और अंतिम दौर में जर्मनी के ख़िलाफ़ 0-1 से पिछड़ने के बाद निल्सन आंगुलो और गोंज़ालो प्लाटा के गोलों से 2-1 की ऐतिहासिक वापसी दर्ज की। यह जीत 2006 के बाद किसी यूरोपीय टीम पर विश्व कप में उनकी पहली जीत थी और इसने ला त्रि को सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली टीम के रूप में नॉकआउट में पहुंचा दिया। एनर वालेंसिया, जो अंतरराष्ट्रीय फ़ुटबॉल में 50 गोल के आंकड़े से एक कदम दूर हैं, और मोइसेस कैसेडो की अगुआई वाली मध्य पंक्ति ने दिखाया कि दबाव में टीम कितनी ख़तरनाक हो सकती है।
ऐतिहासिक आंकड़े मेक्सिको के पक्ष में भारी हैं: दोनों टीमों के बीच 25 मुक़ाबलों में मेक्सिको ने 14 जीते, इक्वाडोर सिर्फ़ चार, और सात मैच ड्रॉ रहे। विश्व कप में एकमात्र भिड़ंत 2002 में हुई थी, जब मेक्सिको ने 2-1 से जीत दर्ज की थी। हालांकि, पिछले चार मुक़ाबलों में तीन ड्रॉ और एक इक्वाडोर की जीत यह संकेत देते हैं कि अब अंतर काफ़ी कम हो गया है। मेक्सिको की आक्रामक क्षमता (35 शॉट, 17% गोल रूपांतरण) और इक्वाडोर की शॉट वॉल्यूम (46 शॉट, मगर सिर्फ़ 4% रूपांतरण) के बीच का फ़र्क इस मैच को रणनीतिक बारीकियों का खेल बना सकता है।
एज़्टेका की ऊंचाई और घरेलू समर्थन मेक्सिको के लिए एक अतिरिक्त ढाल है, जहां वे पिछले नौ विश्व कप मैचों में अपराजित हैं। ब्राज़ीलियाई विश्लेषणों के अनुसार, ऑप्टा के आंकड़े मेक्सिको को 46.8% जीत की संभावना देते हैं, जबकि इक्वाडोर को 26.8%। फिर भी, इक्वाडोर के कोच बेकाचेचे ने कहा है कि उनकी टीम को ‘खिलाड़ियों के जादू’ पर भरोसा है, और जर्मनी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन ने साबित किया कि वे बड़े मंच पर किसी को भी चौंका सकते हैं।
इस मुक़ाबले का विजेता 16 के दौर में इंग्लैंड और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के बीच होने वाले मैच के विजेता से भिड़ेगा। मेक्सिको के लिए यह सिर्फ़ अगले दौर में पहुंचने का नहीं, बल्कि 1986 के बाद पहली बार घरेलू सरज़मीं पर क्वार्टर फ़ाइनल खेलने के सपने को जीवित रखने का मौक़ा है, जबकि इक्वाडोर अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (2006 के 16वें दौर) की बराबरी करने के इरादे से उतरेगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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मेज़बान मेक्सिको ने ग्रुप चरण में शानदार प्रदर्शन करते हुए 32 के दौर में प्रवेश किया, जबकि इक्वाडोर ने जर्मनी को हराकर सबको चौंका दिया। पूर्वानुमान एल ट्राई के पक्ष में हैं, जिन्हें अपनी रक्षात्मक मज़बूती बरकरार रखनी होगी। इस मैच को बिना भावनात्मक ज़ोर के आंकड़ों और तथ्यों के साथ विश्लेषण करने वाली खेल घटना के रूप में देखा जा रहा है।
एज़्टेका में मेक्सिको सिर्फ़ अगले दौर में जगह बनाने से कहीं ज़्यादा के लिए खेल रहा है: दांव पर है 'क्विंटो पार्टिडो' का पीढ़ीगत सपना, वह जुनून जो हाल की कोई भी टीम पूरा नहीं कर पाई। एक शानदार ग्रुप चरण और शून्य गोल खाकर, एल ट्राई पूरे देश का बोझ अपने कंधों पर लिए हुए है, और इक्वाडोर के ख़िलाफ़ यह मुक़ाबला गर्व और उत्कर्ष के बीच एक ऐतिहासिक दोराहा बन गया है।
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