
वोज़िन्हा का जादू: स्पेन को रोक काबो वर्दे ने रचा इतिहास, बाज़ार मूल्य पर बहस छिड़ी
40 वर्षीय गोलकीपर की सात बचाव ने विश्व कप के पहले मैच में स्पेन को गोलरहित बराबरी पर रोका, फिर मां के वीज़ा की कहानी ने दुनिया भर की सहानुभूति जगाई।
काबो वर्दे के पहले ही विश्व कप मुक़ाबले में 40 साल के गोलकीपर जोसिमार जोसे एवोरा डायस उर्फ़ वोज़िन्हा ने सात शानदार बचाव कर स्पेन जैसी दिग्गज टीम को गोलरहित ड्रॉ पर रोक दिया। मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुने गए वोज़िन्हा ने मार्क कुकुरेया और फेरान टोरेस जैसे सितारों के प्रहार विफल किए, जिससे काबो वर्दे को अपना ऐतिहासिक पहला अंक मिला। पुर्तगाल की दूसरी श्रेणी के क्लब जीडी शावेस में खेलने वाले इस अनुभवी कीपर का ट्रांसफ़रमार्कट पर बाज़ार मूल्य महज़ 40 लाख रुपए (50 हज़ार यूरो) आंका गया है।
भारतीय फ़ुटबॉल प्रशंसकों ने ऑनलाइन इस आंकड़े की तुलना घरेलू खिलाड़ियों के मूल्यांकन से की, जो कहीं अधिक है। भारतीय राष्ट्रीय टीम के गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू और अल्बिनो गोम्स का मूल्य 1.4 करोड़ रुपए, जबकि ऋतिक तिवारी का 1.8 करोड़ रुपए है, हालांकि भारत विश्व कप क्वालीफ़िकेशन से कोसों दूर है। पूर्व भारतीय अंतरराष्ट्रीय रॉबिन सिंह का मानना है कि यह असमानता क्लबों की मांग और घरेलू बाज़ार की क्रय शक्ति को दर्शाती है, न कि अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता को। ट्रांसफ़रमार्कट की मूल्यांकन प्रणाली सामुदायिक अनुमानों और स्थानीय लीग की वित्तीय स्थितियों पर आधारित है, जिससे ऐसे अंतर पैदा होते हैं।
मैदान के बाहर वोज़िन्हा की कहानी ने वैश्विक सहानुभूति जगाई। मैच के बाद प्रेस कॉन्फ़्रेंस में वह रो पड़े क्योंकि उनकी मां अमेरिकी वीज़ा शुल्क वहन न कर पाने के कारण स्टेडियम में मौजूद नहीं हो सकीं। काबो वर्दे के नागरिकों के लिए यह शुल्क 5,000 से 15,000 डॉलर के बीच होता है। इस भावुक अपील के बाद अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के डेमोक्रेटिक नेता हाकीम जेफ़्रीज़ ने घोषणा की कि फ़ीफ़ा, काबो वर्दे सरकार और अमेरिकी अधिकारियों के समन्वय से मां को उरुग्वे के ख़िलाफ़ अगले मैच से पहले वीज़ा मिल जाएगा।
काबो वर्दे की राजधानी प्राइया में वोज़िन्हा का एक विशाल भित्तिचित्र बनाया गया, जिसे देखने सड़कों पर भीड़ उमड़ी। पुर्तगाली में ‘दादी’ अर्थ वाला उनका उपनाम बचपन की उस कहानी से जुड़ा है जब दादा-दादी ने उनका पालन-पोषण किया और मोहल्ले के बच्चे उनकी प्रतिस्पर्धी प्रवृत्ति पर चिढ़ाते थे। अंगोला, मोल्दोवा, साइप्रस और स्लोवाकिया की यात्राओं के बाद 2012 से राष्ट्रीय टीम का हिस्सा रहे इस कीपर के इंस्टाग्राम फ़ॉलोअर्स 50 हज़ार से बढ़कर 1.33 करोड़ हो गए।
अब काबो वर्दे का सामना ग्रुप एच में रविवार को पूर्व विश्व विजेता उरुग्वे से मियामी में होगा। वोज़िन्हा के क्लब ने उनका अनुबंध समाप्त कर दिया है ताकि वह विश्व कप के प्रदर्शन के दम पर किसी बड़े क्लब से जुड़ सकें। इस बार मां की उपस्थिति से प्रेरित होकर ‘शार्क्स ऑफ़ ब्लू’ एक और यादगार प्रदर्शन की उम्मीद कर रहे हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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भारतीय मीडिया सवाल उठाती है कि केप वर्डे के हीरो गोलकीपर वोज़िन्हा की कीमत सिर्फ 40 लाख रुपये क्यों है, जबकि भारतीय खिलाड़ी तीन गुना तक कमाते हैं। लेख स्पेन के खिलाफ उनके सात बचावों की तुलना घरेलू प्रतिभाओं के बढ़े हुए मूल्यांकन से करता है, जो बाजार की अक्षमताओं या पूर्वाग्रहों की ओर इशारा करता है।
लैटिन अमेरिकी मीडिया वोज़िन्हा को एक जीवित किंवदंती के रूप में चित्रित करती है, जिसे केप वर्डे में एक विशाल भित्ति चित्र और इंस्टाग्राम पर 50,000 से 13.3 मिलियन फॉलोअर्स की बढ़ोतरी ने अमर कर दिया। कवरेज राष्ट्रीय गौरव और उनकी मां की भावनात्मक यात्रा पर जोर देती है, जिन्होंने आखिरकार उन्हें खेलते देखने के लिए वीज़ा प्राप्त कर लिया।
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