
ट्रंप-ईरान समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की आवाजाही फिर शुरू
अमेरिकी राष्ट्रपति ने नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और शांति समझौते की घोषणा के बाद सोमवार को पुष्टि की कि जहाज सुरक्षित दक्षिणी मार्ग से निकल रहे हैं, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव कम होने की उम्मीद है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाज, जिनमें कई तेल से लदे हैं, बाहर निकलना शुरू हो गए हैं। यह घोषणा रविवार को हुए उस शांति समझौते के ठीक बाद आई, जिसके तहत अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का आदेश दिया। ट्रंप ने कहा कि जहाज “दक्षिणी राजमार्ग” का उपयोग कर रहे हैं, जो पूरी तरह सुरक्षित और संरक्षित है, और यह भी संकेत दिया कि अन्य वैकल्पिक मार्ग भी उपलब्ध हैं।
यह समझौता 107 दिनों से जारी संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में अब तक का सबसे ठोस कदम है, जो फरवरी के अंत में भड़का था। ट्रंप ने रविवार को ही स्पष्ट कर दिया था कि “ईरान के साथ समझौता पूरा हो चुका है” और शुक्रवार को इस पर औपचारिक हस्ताक्षर होंगे। उन्होंने जलडमरूमध्य को बिना किसी शुल्क के खोलने की अनुमति दी और नौसैनिक नाकेबंदी तत्काल प्रभाव से हटाने का आदेश जारी किया। ईरान ने भी कहा कि वह ओमान के साथ समन्वय कर जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात को नियमित करेगा, हालांकि तेहरान ने नौवहन सेवाओं के लिए शुल्क लगाए जाने की बात कही थी, जिसे ट्रंप ने सिरे से खारिज कर दिया। यह घोषणा ऐसे समय हुई जब ट्रंप फ्रांस के एवियां में जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने जा रहे थे, जहां ईरान संघर्ष प्रमुख मुद्दा बना रहा।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार की धमनी है—दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी संकरे मार्ग से गुजरता है। नाकेबंदी के दौरान तेल की कीमतों में तेजी आई थी और आपूर्ति शृंखला पर गंभीर दबाव बना हुआ था। अब समझौते के बाद कच्चे तेल के दाम गिरने लगे हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिलने की उम्मीद है। दक्षिण एशिया, खासकर भारत, जो अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आयात करता है, के लिए यह घटनाक्रम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। स्थिर आपूर्ति और कम कीमतें न केवल आयात बिल घटाएंगी बल्कि ईंधन महंगाई को नियंत्रित करने में भी मदद करेंगी।
हालांकि, समुद्री उद्योग के विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि यातायात पूरी तरह सामान्य होने में कई सप्ताह लग सकते हैं, क्योंकि जहाज मालिक और बीमा कंपनियां सुरक्षा स्थिति का आकलन करने के बाद ही पूर्ण पैमाने पर परिचालन शुरू करेंगी। ईरान द्वारा नौवहन शुल्क की संभावना और अमेरिकी आश्वासन के बीच बारीक अंतर भविष्य में तनाव का कारण बन सकता है। फिलहाल यह समझौता एक रूपरेखा भर है, जिसे अंतिम रूप शुक्रवार को दिया जाना है।
वैश्विक स्तर पर यह घटनाक्रम पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की उम्मीद जगाता है, लेकिन भू-राजनीतिक जोखिम पूरी तरह टले नहीं हैं। जी7 नेताओं की बैठक में इस समझौते को लेकर सतर्क आशावाद देखा गया, वहीं क्षेत्रीय शक्तियां ओमान की मध्यस्थता की सराहना कर रही हैं। यदि शुक्रवार को समझौता सुचारू रूप से संपन्न होता है, तो यह न केवल तेल बाजार को स्थिर करेगा बल्कि हिंद-प्रशांत और दक्षिण एशिया की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ी राहत साबित होगा।
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