
फीफा का नया यू-15 टूर्नामेंट: इज़राइल-फिलिस्तीन मैच से आगाज़, रूस को भी मिलेगा न्योता
अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल महासंघ शांति का संदेश देने के लिए सितंबर में अमेरिका में होने वाले अंडर-15 फेस्टिवल की शुरुआत इज़राइल और फिलिस्तीन के बीच मुकाबले से करना चाहता है, जिसमें प्रतिबंधित रूस समेत सभी 211 सदस्य देशों को भाग लेने की अनुमति होगी।
फीफा एक ऐसे प्रतीकात्मक फुटबॉल मुकाबले की योजना बना रहा है जो खेल की दुनिया में गहरी राजनीतिक गूंज छोड़ सकता है। संस्था चाहती है कि सितंबर में अमेरिका में आयोजित होने वाले नए अंडर-15 टूर्नामेंट का उद्घाटन मैच इज़राइल और फिलिस्तीन की युवा टीमों के बीच खेला जाए। यह पहल फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फैंटिनो की उस नाकाम कोशिश के बाद सामने आई है, जिसमें उन्होंने अप्रैल में वैंकूवर में हुई फीफा कांग्रेस के दौरान दोनों देशों के फुटबॉल प्रमुखों से हाथ मिलवाने और संयुक्त तस्वीर खिंचवाने का प्रयास किया था। फिलिस्तीनी फुटबॉल संघ के अध्यक्ष जिब्रील रजौब ने तब इज़राइली उपाध्यक्ष के साथ खड़े होने से इनकार कर दिया था। अब फीफा का सपना है कि मैदान पर ये दोनों टीमें एक-दूसरे के आमने-सामने हों, जिसे शांति और वैश्विक एकता के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
यह टूर्नामेंट कोई आधिकारिक विश्व कप नहीं, बल्कि एक फुटबॉल महोत्सव होगा, जिसकी घोषणा पिछले दिसंबर में की गई थी। इसका प्रारूप पारंपरिक फुटबॉल से अलग होगा: मैच छोटे होंगे, मैदान का आकार घटाया जाएगा और हर टीम में सात से नौ खिलाड़ी ही उतरेंगे। पहला संस्करण केवल पुरुष टीमों के लिए है, लेकिन 2027 से महिला वर्ग को भी शामिल करने की योजना है। सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि प्रतियोगिता फीफा के सभी 211 सदस्य संघों के लिए खुली होगी, जिसमें रूस भी शामिल है, जो वरिष्ठ स्तर पर अभी भी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। इस कदम को फीफा की समावेशिता की दिशा में एक बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि इससे कुछ पश्चिमी देशों में असहजता भी पैदा हो सकती है।
विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों की मीडिया ने इस खबर को अपने-अपने नजरिए से रेखांकित किया है। रूसी समाचार आउटलेट्स ने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा प्रतिबंधों के बावजूद रूसी युवा टीम को अमेरिकी धरती पर खेलने का मौका मिलेगा, जो खेल कूटनीति में एक नरमी का संकेत हो सकता है। ब्राज़ील और इंडोनेशियाई मीडिया ने इसे शांति के औजार के रूप में फुटबॉल की भूमिका पर केंद्रित किया, जबकि इतालवी प्रेस ने इन्फैंटिनो के व्यक्तिगत सपने और कांग्रेस में हुई असफल हाथ मिलाने की घटना को प्रमुखता दी। आयोजन स्थल अभी तय नहीं है, लेकिन मियामी को सबसे संभावित मेजबान शहर माना जा रहा है।
दक्षिण एशिया के लिए यह टूर्नामेंट एक अहम अवसर लेकर आ सकता है। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अन्य पड़ोसी देशों की अंडर-15 टीमों को एक वैश्विक मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा, जहां वे पारंपरिक रूप से मजबूत फुटबॉल राष्ट्रों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खेल सकेंगी। हालांकि, इज़राइल-फिलिस्तीन मैच को लेकर उठने वाली राजनीतिक लहरें इस क्षेत्र के देशों के लिए भी संवेदनशील हो सकती हैं, क्योंकि दक्षिण एशिया में फिलिस्तीनी मुद्दे पर गहरी जनभावना मौजूद है। फिर भी, खेल के स्तर पर यह आयोजन युवा विकास और अंतरराष्ट्रीय अनुभव के लिहाज से बेहद मूल्यवान साबित हो सकता है।
आगे की राह आसान नहीं है। फीफा का यह शांति प्रयोग तभी सफल होगा जब दोनों पक्ष वास्तव में मैदान पर उतरने को तैयार हों। पिछला अनुभव बताता है कि प्रतीकात्मक हाथ मिलाना भी संभव नहीं हो पाया, ऐसे में पूरा मुकाबला खेलना एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती होगी। यदि यह मैच हुआ, तो यह खेल के इतिहास में एक मिसाल बन सकता है कि कैसे फुटबॉल सियासी दीवारों को गिराने का माध्यम बनता है। दूसरी ओर, रूस की भागीदारी और नए प्रारूप की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वैश्विक फुटबॉल समुदाय इस पहल को कितना स्वीकार करता है। फिलहाल, सितंबर की तारीखें जैसे-जैसे करीब आएंगी, इस महोत्सव को लेकर उम्मीदों और आशंकाओं का दौर एक साथ चलेगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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फीफा का अंडर-15 टूर्नामेंट इज़राइल-फिलिस्तीन मैच से शुरू करने का प्रस्ताव कांग्रेस में असफल हाथ मिलाने के बाद आया है। यूरोपीय टिप्पणीकारों को लगता है कि इन्फेंटिनो का किसी सदस्य संघ की सार्वजनिक आलोचना करना अनुचित है, भले ही वह योग्य हो, और व्यंग्य से कहते हैं कि उनका 48-टीम विश्व कप पहले ही अपनी कहानी कह चुका है।
फीफा सभी 211 सदस्य संघों, जिनमें रूस भी शामिल है, को अमेरिका में एक नए अंडर-15 टूर्नामेंट में आमंत्रित करने की योजना बना रहा है। इज़राइल-फिलिस्तीन उद्घाटन मैच को एक प्रतीकात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है, जबकि रूस की भागीदारी वरिष्ठ स्तर के निलंबन के बावजूद अंतरराष्ट्रीय युवा प्रतियोगिता में वापसी का संकेत है।
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